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यूपी बीजेपी: बर्तन तो बहुत हैं लेकिन गिरवी रखने लायक कोई नहीं

निखिल कुमार वर्मा | Updated on: 7 February 2016, 17:26 IST

पिछले साल दिल्ली और बिहार में मिली करारी हार के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है.

मीडिया में आई खबरों के अनुसार बीजेपी उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार का घोषणा कर सकती है. मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवारों में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी के नाम की चर्चा जोरों पर है.

हालांकि इस दौरान भाजपा में तेजी ऐसे नेताओं की गिनती बढ़ी है जिन्हें किसी न किसी समय पर उत्तर प्रदेश की कमान थमाने की सुगबुगाहटें सुनने को मिल चुकी हैं. स्मृति ईरानी के अलावा, महेश शर्मा, स्वतंत्र देव सिंह, योगी आदित्यनाथ, लक्ष्मीकांत वाजपेयी और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के नाम भी इस चर्चा में शामिल हैं.

मई, 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद दिल्ली के अलावा सभी राज्यों के विधानसभा चुनाव में बीजेपी  मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के बिना चुनाव लड़ी है. लेकिन बिहार में पटखनी के बाद बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व अपनी पुरानी रणनीति में बदलाव कर सकता है.

उत्तर प्रदेश में बीजेपी मुख्यमंत्री पद के लिए उम्मीदवार के नाम का एलान कर सकती है

उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. यह चुनाव बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और पीएम मोदी के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं. क्योंकि शाह के नेतृत्व में ही बीजेपी को यूपी में 73 संसदीय सीटें मिली थी और मोदी भी वाराणसी से सांसद हैं.

बीजेपी सूत्रों के अनुसार यूपी में नए फार्मूले के तहत प्रदेश की कमान किसी पिछड़े नेता को देकर मुख्यमंत्री पद के लिए अगड़ी जाति के उम्मीदवार के नाम की घोषणा हो सकती है.

बीजेपी की तरफ से मुख्यमंत्री पद के संभावित उम्मीदवार:

स्मृति ईरानी, केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री

दिल्ली में जन्मी 40 वर्षीय स्मृति ईरानी 2003 में बीजेपी की सदस्य बनी. 2011 में गुजरात से राज्यसभा सांसद चुनी गई ईरानी अभी मोदी कैबिनेट में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री है. लोकसभा चुनाव, 2014 में उन्होंने अमेठी में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ा. हार का सामना करने के बावजूद उन्हें सरकार में महत्वपूर्ण पद मिला.

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चुनाव हारने के बावजूद ईरानी अक्सर अमेठी का दौरा करती हैं. पिछले महीने वह अमेठी के दौरे पर गईं थी तो मीडिया उनसे जब पूछा कि क्या आपको पार्टी मुख्यमंत्री के रूप में सामने ला रही है, तो उन्होंने इस सवाल को टाल दिया.

ईरानी ने कहा, 'हमारी पार्टी में कार्यकर्ता का काफी सम्मान है. मैं भी पार्टी की एक कार्यकर्ता ही हूं. पार्टी का आदेश और निर्देश सभी के लिए सम्मान होता है. मैं भी पार्टी के निर्देश पर हर काम करने को तैयार हूं.'

योगी आदित्यनाथ, सांसद, गोरखपुर

1998 से लगातार गोरखपुर के सांसद योगी आदित्यनाथ का नाम हर चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद की रेस में होता है. आदित्यनाथ पूर्वांचल में बीजेपी के वरिष्ठ नेता है. उनकी छवि उग्र हिंदुत्ववादी नेता की है.

कुछ दिनों पहले ही गोरखनाथ मंदिर में भारतीय संत सभा की बैठक में संतों इशारों- इशारों में उनका नाम मुख्यमंत्री पद के लिए उछाल दिया है.

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संत सभा में शामिल पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री स्वामी चिन्मयानंद ने कहा, 'संत समाज की मंशा है कि प्रदेश का अगला मुख्यमंत्री युवा होने के साथ हिंदुत्व और विकास की बात करने वाला होना चाहिए.' हालांकि, उन्होंने आदित्यनाथ का नाम नहीं लिया.

महेश शर्मा, केंद्रीय संस्कृति मंत्री

गौतम बुद्ध नगर सीट से सांसद और पेशे से डॉक्टर महेश शर्मा प्रधानमंत्री मोदी के करीबी माने जाते हैं. एनडीए सरकार में उन्हें संस्कृति मंत्रालय का जिम्मा मिला हुआ है. हाल के दिनों में उनके विवादित बयान जहां मीडिया की सुर्खियों में रहे वहीं संघ को उनके बयान खूब रास आए. विशेषकर दादरी में बीफ के अफवाह में अखलाक अहमद की हत्या के बाद उनके बयान काफी विवादित रहे.

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ऐसी खबरे हैं कि राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) भी उनके कामकाज से खुश है. इन दिनों महेश शर्मा यूपी की राजनीति में काफी सक्रिय दिख रहे हैं.

लक्ष्मीकांत वाजपेयी, प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष

अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर नए अध्यक्ष की भूमिका अहम होगी. मौजूदा अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी का तीन साल का कार्यकाल खत्म हो चुका है. वाजपेयी ब्राह्मण हैं और माना जाता है केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के खेमे के हैं.

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प्रदेश के एक वरिष्ठ बीजेपी नेता ने नाम न बताने की शर्त पर कैच से कहा,  'वाजपेयी जमीनी नेता हैं. वो अपने कार्यकाल के दौरान काफी सक्रिय रहे हैं. उन्हें 2017 में अखिलेश यादव के सामने उतारने के लिए एक विकल्प हो सकते हैं.'

धर्मपाल सिंह, विधायक

पिछड़े नेताओं में बीजेपी की पहली पसंद बरेली के विधायक धर्मपाल सिंह हैं.  वे पिछड़ी लोध जाति के हैं. संगठन और सरकार दोनों का उन्हें लंबा अनुभव है. चार बार से लगातार विधानसभा चुनाव जीतते रहे हैं और फिलहाल सदन में पार्टी के उपनेता भी हैं.

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उनका नाम प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ मे भी है. वे कल्याण सिंह, रामप्रकाश गुप्ता और राजनाथ सिंह की सरकार में भी मंत्री रहे हैं.

इनके अलावा मौजूदा प्रदेश महासचिव स्वतंत्र देव सिंह भी मजबूत दावेदार हैं जो पिछड़ा वर्ग से आते हैं. उत्तर प्रदेश से आने वाले कई नेताओं ने भी माना कि बिहार में मिली हार के बाद पार्टी के अंदर यूपी में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करना चाहिए. लेकिन लाख टके का सवाल ये है कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह किस पर दांव लगाना चाहेंगे?

First published: 7 February 2016, 17:26 IST
 
निखिल कुमार वर्मा @nikhilbhusan

निखिल बिहार के कटिहार जिले के रहने वाले हैं. राजनीति और खेल पत्रकारिता की गहरी समझ रखते हैं. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से हिंदी में ग्रेजुएट और आईआईएमसी दिल्ली से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा हैं. हिंदी पट्टी के जनआंदोलनों से भी जुड़े रहे हैं. मनमौजी और घुमक्कड़ स्वभाव के निखिल बेहतरीन खाना बनाने के भी शौकीन हैं.

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