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बीके बंसल ख़ुदकुशी कांड: सीबीआई में अमित शाह की दख़लंदाजी?

आदित्य मेनन | Updated on: 1 October 2016, 2:26 IST
QUICK PILL
  • कॉरपोरेट मंत्रालय के पूर्व डीजी बीके बंसल ने अपने सुसाइड नोट में सीबीआई के डीआईजी संजीव गौतम पर उंगली उठाई थी.
  • बंसल ने कथिततौर पर यह भी लिखा था कि डीआईजी संजीव गौतम ने ख़ुद को अमित शाह का आदमी बताया था जिसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता.

बी.के बंसल ने अपने सुसाइड नोट के अंत में लिखा था 'भारत माता की जय.' ये वही शब्द हैं जिनसे बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह अपने भाषणों का अंत करते हैं. अगर बंसल के सुसाइड नोट पर विश्वास किया जाए तो शाह ही उन्हें प्रताड़ित करने वाले सीबीआई के डीआईजी संजीव गौतम के मेंटर रहे हैं.

बंसल और उनके परिजनों की तकलीफ का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता. हाल ही वाणिज्य मंत्रालय के इस अधिकारी ने अपने 31 वर्षीय बेटे योगेश के साथ खुदकुशी कर ली थी. इससे करीब दो माह पहले ही 19 जुलाई को उनकी पत्नी सत्यबाला और  27 साल की बेटी नेहा ने आत्महत्या कर ली थी.

रिपोर्ट के अनुसार, पत्नी और बेटी की मौत के बाद बंसल ने खुद को काफी मजबूत साबित किया और कहा था कि ‘जिंदगी चलती रहती है’ लेकिन पता नहीं किस चीज ने बंसल और उनके बेटे को मानसिक तौर पर इस कदर तोड़ कर रख दिया कि उन्होंने 27 सितम्बर को पूर्वी दिल्ली के एक अपार्टमेंट में खुदकुशी कर ली.

अपने सुसाइड नोट में बंसल ने संजीव गौतम को अपनी और अपने परिवार की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया है. साथ ही उन्होंने गौतम के संबंध देश के प्रभावशाली नेता बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से भी बताए.

बंसल ने दावा किया कि गौतम ने उन्हें धमकी देते हुए कहा था, ‘मैं अमित शाह का आदमी हूं. मुझे कौन पकड़ सकता है? तुम्हारी पत्नी और बेटी के साथ ऐसा सुलूक करुंगा कि सुनने वाले की रुह कांप जाएगी.’

बंसल ने आगे लिखा कि गौतम ने अपनी टीम की दो महिला अधिकारियों को आदेश दिए कि वे उनकी बीवी और बेटी को बुरी तरह प्रताड़ित करें ताकि उनकी हालत ‘मरने जैसी’ हो जाए.

सीबीआई ने 18 जुलाई को दोपहर तीन बजे बंसल के घर पर छापा मारा था, उस वक्त उनकी बीवी और बेटी भी घर पर मौजूद थीं. छापे की कार्यवाही अगले दिन 19 जुलाई की सुबह 5 बजे तक चली. इसी दिन दोपहर बाद डेढ़ बजे उन्होंने खुदकुशी कर ली और अपने सुसाइड नोट में लिखा कि ‘सीबीआई कार्यवाही के बाद उन्हें और जीने की इच्छा नहीं है.’

बी.के बंसल ने लिखा जब मामले में दोषी मैं था तो सीबीआई अधिकारियों ने मेरी बीवी और बेटी को क्यों प्रताड़ित किया. उन्होंने आत्महत्या नहीं की, यह दो महिलाओं की हत्या का मामला है.

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने रिपोर्ट मांगी

बंसल के सुसाइड नोट को सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है. दिल्ली पुलिस को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में गौतम को गिरफ्तार कर लेना चाहिए था लेकिन ऐसा हुआ नहीं. अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सीबीआई को मामले में सुसाइड नोट के तथ्यों पर कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है.

सीबीआई,संजीव गौतम और उनकी टीम पर बुरी तरह की प्रताड़ना करने के आरोप हैं, जिसके कारण चार लोगों ने खुदकुशी कर ली. बंसल पर जीते जी मुंबई की एक फार्मा कम्पनी के खिलाफ जांच रोकने के लिए 9 लाख रूप्ए की रिश्वत लेने का आरोप था. मौत के बाद वे अब व्हिसलब्लोअर बन गए हैं. बंसल ने अपने सुसाइड नोट में लिखा कि गौतम ने उसे धमकी देते हुए कहा था-‘‘तुम्हें और तुम्हारे परिवार को इतना दुखी कर दूंगा कि अगर मौत भी मांगोगे तो वो भी तुम्हें नहीं मिलेगी.’ बंसल और उनका परिवार अब इस दुनिया में नहीं है लेकिन उनकी मौत ने गौतम और अमित शाह के सीबीआई में कथित प्रभाव पर सवाल खड़े कर दिए.

शाह से संजीव गौतम के संबंध

संजीव गौतम और शाह के संबंध के बारे में केवल बंसल के सुसाइड नोट में ही उल्लेख काफी नहीं है. इसी साल 18 अप्रेल को ‘इंडिया संवाद’ की एक खबर थी, ‘इनसाइड सीबीआई, ऑफिशियल डांस टू शाह टृयून, फेल टू एक्ट अगेन्स्ट बिग फिश’(सीबीआई अधिकारी अमित शाह के इशारों पर नाचते हैं, बड़ी मछली कार्यवाही से बची)

खबर में कहा गया था, ‘नरेंद्र मोदी सरकार ने भ्रष्टाचार संबंधी मामलों की जांच सीबीआई डीआईजी संजीव गौतम को सौंप दी है. गौतम शाह के करीबी माने जाते हैं. संजीव गौतम अपने सीनियर जॉइंट डायरेक्टर अनुराग गर्ग की भी परवाह नहीं करते और कई बार सीबीआई निदेशक अनिल सिन्हा को भी क्रॉस कर देते हैं.

वे सीधे अमित शाह से ऑर्डर लेते हैं. खबर में यह भी कहा गया कि ‘अमित शाह को खुश करने के लिए ही दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के प्रधान सचिव राजेंदर कुमार पर भी सीबीआई ने रेड डाली थी.

शादी के दिन वीरभद्र के घर मारे गए छापे में भूमिका?

सीबीआई द्वारा ऐसा ही एक विवादास्पद छापा हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के घर पर मारा गया था. जिस दिन छापे की कार्यवाही की जा रही थी, वीरभद्र  सिंह की बेटी की शादी हो रही थी. कांग्रेस ने बीजपी पर राजनीतिक लाभ कके लिए सीबीआई के इस्तेमाल का आरोप लगाया था.

छापे के तुरंत बाद एक कांग्रेस प्रवक्ता ने कैच से कहा, ‘उस दिन रेड डालने की क्या जरूरत थी, जब उनकी बेटी की शादी थी, वे कोई अपराधी तो हैं नहीं. इससे पता चालता है कि यह सब बीजेपी सरकार के इशारे पर ही हो रहा है.'

एक सत्तासीन मुख्यमंत्री की बेटी की शादी के दिन ऐसा करना उसे राजनीतिक तौर पर निशाना बनाना ही है. यह संभव ही नहीं है कि नरेंद्र मोदी सरकार के समर्थन के बिना सीबीआई ऐसा कर सकती है. माना जाता है वीरभद्र के घर पर मारे गए छापे में गौतम की भूमिका काफी महत्वपूर्ण थी, क्योंकि वे सीबीआई चंडीगढ़ रेंज के प्रमुख हैं, जिसके अधिकार क्षेत्र में हिमाचल आता है.

संजीव गौतम 1995 के बैच के आईआरएस अधिकारी हैं, जो कस्टम एंड सेंट्रल एक्साइज डिपार्टमेंट में काम कर चुके हैं. 27 मई 2014 को उन्हें सीबीआई में एंटी करप्शन ब्रांच का डीआईजी नियुक्त किया गया. इससे पहले वे यूपीए सरकार में मंत्री जितेंद्र सिंह के निजी सचिव रहे हैं. आईपीएस लॉबी गौतम जैसे आईआरएस अधिकारी को सीबीआई में इतने ऊंचे पद पर नियुक्त करने से खुश नहीं हैं.

बंसल के आरोपों से खुलासा होता है कि जिस मनमानी से गौतम का उनके साथ बुरा बर्ताव था, उससे यह कड़ी जुड़ती है कि जब शाह गुजरात में गृह मंत्री थे तो उन पर आरोप था कि वे पुलिस का मनमाना इस्तेमाल करते ही थे, जिसके नतीजे के तौर पर सोहराबुद्दीन, तुलसीराम प्रजापति और इशरत जहां फर्जी मुठभेड़ प्रकरण हमारे सामने है.

भले ही शाह इस केस में बरी हो चुके हों लेकिन सीबीआई की बेरूखी से स्पष्ट है कि उन्होंने डीजी वंजारा और पीपी पांडेय को राज्य में खुली छूट दे रखी थी. अब बंसल के आरोपों से लगता है शाह केंद्र में भी यही सब कर रहे हैं.

First published: 1 October 2016, 2:26 IST
 
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