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हाजी अली में मिला महिलाआें को प्रवेश का अधिकार, लेकिन खत्म नहीं हुइ लड़ाई

सौरव दत्ता | Updated on: 27 August 2016, 13:46 IST
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QUICK PILL
  • बंबई हाई कोर्ट ने महिलाओं को हाजी अली दरगाह में मजार के भीतर तक जाने की अनुमति दे दी है.
  • अभी तक महिलाआें को केवल परिसर में जाने की अनुमति थी लेकिन मजार पर उन्हें जाने से मनाही थी.
  • भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन की संस्थापक नूरजहां साफिया नियाज ने हाजी अली दरगाह में महिलाआें के प्रवेश को लेकर अदालत में जनहित याचिका दायर की थी.

मुंबइ के हाजी अली दरगाह में महिलाआें के प्रवेश को अनुमति दिए जाने का मामला हाल के दिनों में सबसे बडा संवैधानिक फैसला है. मामले की वजह से कइ बुनियादी अधिकार दांव पर थे आैर यह एक दूसरे सेे टकराते नजर आ रहे थे.

हालांकि शुक्रवार को बंबई हाई कोर्ट ने अल्पसंख्यकों के सामूहिक अधिकार पर व्यक्तियों के निजी अधिकारोें को तरजीह देते हुए महिलाआें के प्रवेश की अनुमति दे दी.

कोर्ट ने कहा कि हाजी अली दरगाह पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट है आैर इसका प्रबंधन संविधान के अनुच्छेद 26 के तहत होता है. इसलिए ट्रस्टी को महिलाआें के बुनियादी अधिकारों के हनन की अनुमति नहीं दी जा सकती.

200 पन्नों के जजमेंट में जस्टिस रेवती देरे ने कहा कि समानता का बुनियादी अधिकार आैर लिंग एवं जाति के आधार पर भेदभाव की इजाजत संविधान नहीं देता आैर इसका जिक्र संविधान के अनुच्छेद 14 आैर 15 में किया गया है. इसलिए महिलाआें को इन अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता.

उन्होंने महाराष्ट्र सरकार को यह निर्देश दिया कि महिलाआें को दरगाह में प्रवेश दिलाने के लिए पर्याप्त सुरक्षा के इंतजाम किए जाए.

जिन्होंने लड़ी लड़ाई

भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन की संस्थापक नूरजहां साफिया नियाज ने हाजी अली दरगाह में महिलाआें के प्रवेश को लेकर अदालत में जनहित याचिका दायर की थी. नवंबर 2014 में उन्होंने यह पीआईएल दायर की थी.

इसके बाद नियाज आैर हाजी अली प्रबंधन के बीच जबरदस्त बहस हुई. प्रबंधन का कहना था कि धर्म के मामलों में राज्य या न्यायिक व्यवस्था को दखल देने का हक नहीं है लेकिन नियाज ने इसका यह कहते हुए विरोध किया कि महिलाआें के अधिकार का मामला धर्म से जुड़ा नहीं है.

कई मौकों पर अदालत ने दोेनों पक्षों के बीच एक बेहतर समाधान निकालने की कोशिश की लेकिन एेसा नहीं हो सका.

महिलाआें को दरगाह में प्रवेश नहीं दिए जाने का नियम 2012 में बनाया गया था लेकिन दरगाह के प्रबंधन का कहना था कि इस्लाम की सैंकडों साल की विरासत महिलाआें को दरगाह में जाने की अनुमति नहीं देती.

फिलहाल एेसा लगता है कि महिलाआें ने मौलवियों के खिलाफ एक जंग जीत ली है लेकिन अभी इसे आखिरी जीत नहीं कह सकते. एेसा इसलिए क्योंकि दरगाह प्रबंधन ने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का फैसला लिया है.

इस वजह से हाईकोर्ट ने इस फैसले पर छह सप्ताह के लिए रोक लगा दी है. सुप्रीम कोर्ट में चाहे जो भी फैसला आए, जाहिर तौर पर यह एक लंबे संघर्ष की जीत होगी.

First published: 27 August 2016, 13:46 IST
 
सौरव दत्ता @SauravDatta29

Saurav Datta works in the fields of media law and criminal justice reform in Mumbai and Delhi.

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