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बॉम्‍बे हाईकोर्ट: क्या 'हनुमान चालीसा' से दूर होगा एड्स!

कैच ब्यूरो | Updated on: 7 April 2016, 20:40 IST

बॉम्‍बे हाईकोर्ट ने एड्स के खिलाफ जागरुकता फैलाने से जुड़े कार्यक्रम में ‘हनुमान चालीसा’ के पाठ करवाने के नागपुर नगर निगम के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है.

कोर्ट ने नगर निगम से पूछा है कि क्‍या यह देश सिर्फ हिंदुओं के लिए है? एक पीआईएल पर सुनवाई करते हुए बॉम्‍बे हाईकोर्ट के नागपुर बेंच ने यह टिप्‍पणी की है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक एड्स जागरुकता कार्यक्रम में हनुमान चालीसा के पाठ की योजना नागपुर नगर निगम और पोद्दरेश्‍वर राम मंदिर ट्रस्‍ट की थी. यह कार्यक्रम गुरुवार को कस्‍तूरचंद पार्क में होने वाला था.

इस मामले में जस्‍टिस भूषण गवई और जस्‍टिस स्‍वप्निल जोशी ने कहा, 'सिर्फ हनुमान चालीसा का पाठ क्‍यों? कुरान, बाइबल या अन्‍य धार्मिक साहित्‍य का क्‍यों नहीं? एड्स जागरुकता और हनुमान चालीसा के पाठ में क्‍या संबंध है? क्‍या सिर्फ हिंदू एड्स से संक्रमित होते हैं? क्‍या इस खतरनाक बीमारी का खात्‍मा हनुमान चालीसा के पाठ से हो सकता है? अगर लोग इस कार्यक्रम में आ सकते हैं तो वे कुरान और बाइबल भी पढ़ सकते हैं.'

कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद नागपुर नग‍र निगम और कार्यक्रम के आयोजक दयाशंकर तिवारी ने एड्स अवेयरनेस कार्यक्रम और हनुमान चालीसा का पाठ एक साथ नहीं कराने का फैसला दिया.

इसके बाद कोर्ट ने आदेश दिया कि निगम दोनों कार्यक्रम कराये, लेकिन दोनों कार्यक्रमों के बीच कम से कम एक घंटे का फर्क रहे. दोनों कार्यक्रमों का अलग अलग बैनर हो, जिस पर उसके आयोजकों का नाम लिखा हो.

कोर्ट ने यह भी कहा कि एड्स जागरुकता से जुड़े कार्यक्रम का व्‍यापक तौर पर प्रचार किया जाए, लेकिन उसमें हनुमान चालीसा वाले कार्यक्रम का कहीं भी जिक्र न हो.

इसके साथ ही कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि वह किसी भी धार्मिक कार्यक्रम के खिलाफ नहीं है, लेकिन सरकारी एजेंसियों का इस तरह के कार्यक्रम को कराना या इनसे जुड़ना एकदम गलत है.

First published: 7 April 2016, 20:40 IST
 
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