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हाईकोर्ट: 'उड़ता पंजाब' से देश की संप्रभुता को खतरा नहीं

कैच ब्यूरो | Updated on: 13 June 2016, 16:07 IST
(फिल्म-उड़ता पंजाब )

निर्माता विकास बहल और अनुराग कश्यप की फिल्म 'उड़ता पंजाब' के मामले में आज सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की. हाई कोर्ट ने कहा कि फिल्म की स्क्रिप्ट और उसके टाइटल नाम में ऐसा कुछ भी नहीं है, जिसे देश की एकता या संप्रभुता को खतरा पहुंचता हो.

कोर्ट ने कहा, "इस फिल्म में युवाओं के बीच ड्रग्स की बढ़ती लत को दिखाया गया है. जितनी आसानी से ड्रग उपलब्ध है और इसे रोकने के लिए तैनात किए गए लोग अपना काम सही से नहीं कर पा रहे, वह चिंता का विषय है."

अदालत ने टिप्पणी की, "फिल्म में सभी किरदार ने अपने अभिनय से इस समस्या को हमारे समाने बखूबी पेश किया है." 

'सेंसर बोर्ड का मकसद बैन नहीं'

वहीं इस पूरे घटनाक्रम में सेंसर बोर्ड की भूमिका पर टिप्पणी करके हुए कोर्ट ने कहा, "बोर्ड का मकसद इस फिल्म को बैन करना कतई नहीं है और फिल्म में कुछ सीन हटाने के पीछे बोर्ड का मकसद फिल्म मेकिंग पर पाबंदी लगाना नहीं है.

बोर्ड का उद्देश्य समाज को ध्यान में रखकर फिल्मों को प्रमाणित करना है. बोर्ड को यह आश्वस्त करना होगा कि ड्रग को ग्लैमर में तब्दील करने वाले दृश्य न दिखाए जाएं. संवेदनशील और ज्वलंत मुद्दों को भड़काया न गया हो और न ही द्विअर्थी बातों को बढ़ावा दिया गया हो." 

'ड्रग्स की समस्या को दिखाना सही'

कोर्ट ने कहा कि याचिकर्ताओं ने ड्रग का मुद्दा चुना है और पंजाब में यह समस्या ज्यादा है तो इसमें कुछ गलत नहीं है. हमारे युवाओं को देखते हुए निर्देशक ने रॉकस्टार का कैरेक्टर बनाया है.

हाईकोर्ट ने कहा, "अगर फिल्म निर्माता किसी समस्या को उठाना चाहते हैं, तो उस पर दखल देने का अधिकार किसी को नहीं है, जब तक रचनात्मकता की आजादी का दुरुपयोग नहीं होता." गौरतलब है कि सेंसर बोर्ड ने कथित तौर पर पहले फिल्म में कुल 89 कट लगाए थे और फिल्म के केवल 73 फीसदी हिस्से को दिखाने की मंजूरी दी थी. 

17 जून को फिल्म की रिलीज

हालांकि ज्यादा आलोचना होने के बाद रविवार को सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष पहलाज निहलानी ने कहा कि बोर्ड ने फिल्म 'उड़ता पंजाब' में 13 कट के बाद उसे 'ए' सर्टिफिकेट दिया है.

निर्देशक अभिषेक चौबे की फिल्म 'उड़ता पंजाब' में शाहिद कपूर, आलिया भट्ट, करीना कपूर और दिलजीत दोसांज ने अभिनय किया है. यह फिल्म पंजाब में युवाओं के बीच बढ़ रहे ड्रग्स के चलन की समस्या पर बनी है

सिनेमा घरों में यह फिल्म 17 जून को रिलीज होने वाली है. हालांकि हाईकोर्ट ने ये भी कहा कि सेंसर बोर्ड ने कट नंबर पांच की जो सलाह दी है, वो सही है, क्योंकि इसमें अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया है.

अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा, "कट नंबर छह की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि यहां सामान्य शब्दों (एमपी, एमएलए, संसद आदि) का जिक्र किया गया है. जो किसी संगठन या संस्था के संदर्भ में नहीं है. ये सामान्य राजनीतिक क्रिया-कलाप है."

हाईकोर्ट ने मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि सेंसर बोर्ड की कट नंबर 8 की सलाह गैर जरूरी है. ड्रग्स के इंजेक्शन का केवल एक क्लोज अप सीन दिशा-निर्देशों का उल्लंघन नहीं है.

बॉम्बे हाईकोर्ट ने टिप्पणी की, "पंजाब हरित क्रांति और बहादुर सैनिकों की धरती है. एक वाक्य (जमीन बंजर ते औलाद कंजर) इस छवि को प्रभावित नहीं कर सकता."

First published: 13 June 2016, 16:07 IST
 
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