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बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसलाः नाना पाटेकर के एनजीओ को दान दें

अश्विन अघोर | Updated on: 9 March 2016, 8:28 IST

क्या यह संभव है कि अदालत में लंबित किसी आपराधिक मुकदमे को निपटाने के लिए समाधान के रूप में एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) को दान देने का आदेश दे दिया जाए. हालांकि जल्द ही यह अनोखा फैसला मुंबई में एक हकीकत के रूप में दिखेगा. 

मुंबई की एक एजुकेशन सोसाइटी के खिलाफ दायर धोखाधड़ी के मुकदमे को समाप्त करने की शर्त में आदेश दिया गया है कि वो महाराष्ट्र में किसानों के लिए काम करने वाले एक एनजीओ को बड़ी रकम दान स्वरूप दे दे. 'नाम' फाउंडेशन नामक एनजीओ को बॉलीवुड अभिनेता नाना पाटेकर और मार्कंड अनासपुरे ने शुरू किया था.

बॉम्बे हाईकोर्ट ने धोखाधड़ी के एक मामले को निपटाने के लिए एक शैक्षिक संस्थान के प्रबंधन को आदेश दिया है कि वो नाम फाउंडेशन को 10 लाख रुपये का दान दे. यह आदेश बॉम्बे हाईकोर्ट में जस्टिस रंजीत मोरे और जस्टिस वीएल अचालिया की खंडपीठ ने दिया.

छात्रों ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराने के साथ ही उपभोक्ता फोरम में भी फीस वापसी के लिए केस किया

यह मामला मुंबई के कांदीवली स्थित सुमन एजुकेशन सोसाइटी द्वारा कथित रूप से की गई धोखाधड़ी से जुड़ा हुआ है. यह सोसाइटी एलएन कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट नाम से एक संस्थान चलाती हैं जिसे इग्नू से संबंद्ध होने का दावा किया गया था. 2010 में इस कॉलेज में 47 छात्रों ने मैनेजमेंट कोर्स में प्रवेश लिया. 

बाद में जब छात्रों को इस बात का पता चला कि कॉलेज इग्नू से संबंद्ध नहीं है और उनके साथ धोखा किया गया है तो 10 छात्रों ने एजुकेशन सोसाइटी के ट्रस्टी महेश कांबले के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया. वहीं, बाकी के 37 छात्रों ने अपनी पढ़ाई पूरी की. 

एजुकेशन सोसाइटी द्वारा हर छात्र से फीस के रूप में 1 लाख 50 हजार रुपये वसूले गए. जब छात्रों को पता चला कि सोसाइटी के संबंद्धता के दावे फर्जी हैं तो उन्होंने एलएन कॉलेज छोड़कर अन्य कॉलेजों में प्रवेश ले लिया. साथ ही उन्होंने इस सोसाइटी के खिलाफ धोखाधड़ी का केस भी दर्ज करा दिया. छात्रों ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराने के साथ ही उपभोक्ता फोरम में भी फीस वापसी के लिए केस किया.

इस बीच एजुकेशन सोसाइटी और पीड़ित छात्रों ने अदालत के बाहर आपसी समझौता कर लिया. अदालत के बाहर पीड़ित छात्रों से मामला निपटाने के बाद कांबले ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर उसके खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमे को खत्म करने की याचिका डाली. 

बीते एक माह में यह दूसरा मौका है जब बॉम्बे हाईकोर्ट ने नाम फाउंडेशन के नाम पर दान के आदेश दिए हैं

अदालत के बाहर मामला निपटाने के बाद 10 पीड़ित छात्रों द्वारा इस संबंध में अनापत्ति का शपथनामा भी भर दिया था. इसके जरिये छात्रों ने कांबले के खिलाफ दर्ज आपराधिक आरोप वापस लेने की बात कही थी. 

याचिका पर सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने कांबले को आदेश दिया कि वो नाम फाउंडेशन को 10 लाख रुपये का दान दे और इसकी रसीद चार्कोप पुलिस स्टेशन में जमा करे, जहां छात्रों ने रिपोर्ट दर्ज करवाई थी.

अपने आदेश में जस्टिस रंजीत मोरे और जस्टिस वीएल अचालिया ने कहा, "कांबले को महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त क्षेत्रों में किसानों के कल्याण के लिए काम करने वाली नाम फाउंडेशन को 10 लाख रुपये देने चाहिए." हाईकोर्ट को दिए अपने जवाब में कांबले ने कहा था कि वो पश्चाताप के रूप में नाम फाउंडेशन को दान स्वरूप रकम देने देने को तैयार थे. 

बीते एक माह में यह दूसरा मौका है जब बॉम्बे हाईकोर्ट ने नाम फाउंडेशन के नाम पर दान के आदेश दिए हैं. इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट ने अवैध होर्डिंग लगाए जाने के मामले में भी राजनीतिक दलों को नाम फाउंडेशन को दान देने के आदेश दिए थे. अदालत ने तमाम राजनीतिक दलों पर अवैध होर्डिंग लगाकर शहर को बदसूरत करने के नाम पर यह जुर्माना लगाया था. उच्च न्यायालय ने राजनीतिक दलों को आदेश दिया था कि वे जुर्माने की रकम सरकार के खाते में जमा करने के बजाए फाउंडेशन को दान स्वरूप दें.

गौरतलब है कि किसानों की दुर्दशा और बढ़ती आत्महत्या से दुखी अभिनेता नाना पाटेकर और मार्कंड अनासपुरे ने बीते साल नाम फाउंडेशन की स्थापना की थी. फाउंडेशन द्वारा किसानों के कल्याण की दिशा में जल एवं मृदा संरक्षण, किसानों के बच्चों की शिक्षा, मॉडल गांव निर्माण आदि से जुड़े तमाम कार्य किए गए. इस पहल का राज्य के लोगों द्वारा जमकर समर्थन किया गया था.

First published: 9 March 2016, 8:28 IST
 
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