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हाई कोर्ट ने दिया आदर्श सोसाइटी बिल्डिंग गिराने का आदेश

कैच ब्यूरो | Updated on: 29 April 2016, 21:12 IST

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई की आदर्श सोसाइटी की बिल्डिंग गिराने का आदेश दिया है. हालांकि अदालत ने राज्य सरकार को फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के लिए 12 हफ्ते की मोहलत दे दी है.

साथ ही अदालत ने सीबीआई को निर्देश दिया है कि मामले में शामिल राजनेताओं, मंत्रियों और अफसरों के खिलाफ भी जांच की जाए. वहीं फैसले पर महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने कोई भी टिप्पणी करने से इनकार किया है.

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अशोक चव्हाण उन 13 लोगों में शामिल हैं, जिन्हें सीबीआई ने आदर्श घोटाले में चार्जशीट किया था. पूर्व कांग्रेसी मुख्यमंत्री मौजूदा समय में पार्टी के सांसद हैं, और महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष भी हैं.

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पूर्व सीएम चव्हाण समेत 13 आरोपी


इससे पहले कांग्रेस की सरकार के समय तत्कालीन गवर्नर के शंकरनारायणन ने इस मामले में सीबीआई को इजाजत देने से इनकार कर दिया था.

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महाराष्ट्र के चर्चित आदर्श सोसाइटी घोटाले के मामले में इस साल जनवरी में नया मोड़ आ गया था, जब राज्यपाल ने सीबीआई को पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण के खिलाफ केस चलाने की मंजूरी दे दी थी.

जनवरी के अंतिम हफ्ते में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने दूसरी बार महाराष्ट्र के राज्यपाल को खत लिखकर आदर्श घोटाले में चव्हाण के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी थी.

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क्या है आदर्श मामला ?


दक्षिण मुंबई के कोलाबा में सैनिकों और पूर्व सैनिकों को फ्लैट देने के नाम पर 31 मंजिला आदर्श बिल्डिंग बनाई गई थी. इसमें करगिल युद्ध में शहीद हुए जवानों के परिवारों को भी फ्लैट दिए जाने थे.

बाद में सामने आया कि मुंबई की सहकारी गृह निर्माण संस्था आदर्श हाउसिंग सोसाइटी में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ. आरोप है कि राजनेताओं, नौकरशाह और सेना के अधिकारियों ने नियमों को तोड़-मरोड़कर कौड़ियों के दाम अपने नाम फ्लैट ले लिए.

सोसाइटी को प्लॉट आवंटित करने के 11 साल बाद पर्यावरण मंत्रालय ने तटवर्ती नियमों का उल्लंघन करने के लिए इमारत को गिराने के निर्देश दिए. नौसेना ने इस बात की पुष्टि की कि उसने सुरक्षा कारणों से बिल्डिंग पर विरोध जताया है.

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जनवरी 2011 में आदर्श घोटाले की जांच के लिए आयोग बनाया गया था. जांच का उद्देश्य जमीन के मालिकाना हक समेत कई पहलुओं को देखना था. आयोग की अंतरिम रिपोर्ट में कहा गया कि जमीन रक्षा मंत्रालय के बजाए राज्य सरकार की थी.

रिपोर्ट में महाराष्ट्र के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों विलासराव देशमुख, सुशील कुमार शिंदे और अशोक चव्हाण पर सवाल उठाए गए. सीबीआई ने घोटाले में अशोक चव्हाण को आरोपी बनाया और उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की.

First published: 29 April 2016, 21:12 IST
 
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