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आरएसएस ने संविधान का विरोध किया फिर वो आंबेडकर की बात कैसे कर सकते हैं: के राजू

कुणाल मजूमदार | Updated on: 11 February 2017, 6:43 IST
QUICK PILL
वल्लभभाई पटेल के बाद अब बीआर आंबेडकर की विरासत को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच उठापटक शुरू हो चुकी है. आंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल, 1891 का हुआ था. उनका देहांत 6 दिसंबर, 1956 को हुआ था.बीजेपी आंबेडकर के बहाने दलितों वोटों तक अपनी पहुंच बनाना चाहती थी. ख़ासकर बिहार और यूपी में. पार्टी ने मदर टेरेसा को आंबेडकर से पहले भारत रत्न देनेे के लिए भी कांग्रेस की आलोचना की.कांग्रेस ने आंबेडकर जयंती वर्ष से जुड़े कार्यक्रमों के लिए एक कमिटी बनाई है. के राजू उसके कन्वेनर हैं. उनके अनुसार आरएसएस और बीजेपी आंबेडकर की विरासत पर कब्जा करने की कोशिश क्यों कामयाब नहीं होगी.पढ़िए, कुणाल मजूमदार से के राजू की बातचीत के प्रमुख अंश:

आरएसएस को लगता है कि आंबेडकर की विरासत के सही वारिस वो है, कांग्रेस नहीं?

मुझे लगता है कि देश के दलित इस तरह के दोहरेपन को समझते हैं. आरएसएस ने संविधान का विरोध किया था. पिछली एनडीए सरकार ने संविधान को बदलने की भी कोशिश की थी. ज्यादातर दलित इस बात को समझते हैं कि वो केवल आंबेडकर की विरासत को हड़पने की कोशिश कर रहे हैं. जिसका मकसद दलित वोट हथियाना है.

दलितों को पता है कि आंबेडकर ने ताउम्र आरएसएस की विचारधारा का विरोध किया क्योंकि उसकी बुनियाद जाति व्यवस्था पर टिकी है. आंबेडकर ने कांग्रेस के साथ मिलकर संविधान तैयार किया जिससे दलितों को मानवीय अधिकार मिले.

क्या दलित नेताओं ने दलितों को निराश नहीं किया है, आज दलित महज वोट बैंक बन गए हैं?

देखिए, समाज में बराबरी लाना केवल दलित नेताओं की जिम्मेदारी नहीं है. दलितों को उनके अधिकार दिलाने की जिम्मेदारी लोकतंत्र और लोकतांत्रिक संस्थाओं की है. ये ठीक है कि किसी खास संसदीय सीट से दलित नेता दलितों का प्रतिनिधित्व करते हैं लेकिन उन्हें दूसरी कई चीज़ों का भी ध्यान रखना होता है. ये कहना सही नहीं होगा कि दलित उत्थान और विकास पूरी तरह दलित नेताओं पर निर्भर है.

क्या कांग्रेस ने दलितों के उत्थान के लिए पर्याप्त कदम उठाए हैं?

इस बात से शायद ही कोई इनकार करेगा कि आजादी के बाद से अब तक दलितों की स्थिति में काफी सुधार हुआ है, खासकर शिक्षा के क्षेत्र में.दलितों की दूसरी पीढ़ी की सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी है. इसीलिए कांग्रेस ने सरकारी नौकरियों में आरक्षण का समर्थन दिया. हमने दलित कारोबारियों को व्यवसाय के लिए कर्ज दिलाने की भी शुरुआत की.

आज आप बीजेपी की आलोचना कर रहे हैं लेकिन कई लोगों का मानना है कि कांग्रेस ने भी दलितों को वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया?

दलितों के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए जो भी कार्यक्रम हैं वो कांग्रेस की देन हैं. फिर भी मैं मानता हूं कि आंबेडकर के सपनों के अनुरूप समाज का निर्माण अभी नहीं हो सका है.  लेकिन हमने काफी कुछ किया है.

कांग्रेस ने अनुसूचित जाति और जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम में संसोधन का प्रस्ताव पेश किया था. मौजूदा सरकार ने उसे गिर जाने दिया.

कुछ महीने पहले राजस्थान में दलितों पर ट्रैक्टर चढ़ा दिया गया. एक महिला की मौत हो गई और एक लड़का घायल हो गया. लेकिन वहां की बीजेपी सरकार कुछ नहीं किया. अगर इस अधिनियम में प्रस्तावित संसोधन पारित हुए होते तो सरकार कार्रवाई करने को मजबूर होती.

आंबेडकर से जुड़े आपके क्रार्यक्रमों और बीजेपी का कार्यक्रमों में क्या फर्क है?

हम अपने कार्यक्रमों के माध्यम से तीन मुख्य संदेश देंगे- एक,आंबेडकर ने संविधान निर्माण के लिए कांग्रेस के संग मिलकर काम किया था. दो, आंबेडकर न केवल दलित विचारक थे बल्कि एक स्टेट्समैन(कुशल प्रशासक) भी थे. वो हमेशा लोकतांत्रिक मूल्यों की वकालत करते रहे.

और आखिरी, हम इस बात पर जोर देंगे कि कांग्रेस के उनके विचारों को किस तरह आगे बढ़ाती रही है. हम कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व से लेकर जमीनी स्तर तक दलित नेतृत्व को बढ़ावा भी देना चाहते हैं.

First published: 5 December 2015, 8:10 IST
 
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