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कांग्रेस में चिंतन का इंतजार

आकाश बिष्ट | Updated on: 23 May 2016, 14:11 IST
QUICK PILL
  • इस निराशाजनक माहौल के बीच पार्टी हालिया चुनाव नतीजों का विश्लेषण करने और इनमें हुई पार्टी की दुर्गति को लेकर विचार-विमर्श करने के लिये कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्लूसी) की बैठक आयोजित करने पर विचार कर रही है.
  • दिग्विजय सिंह के हालिया बयानों में पार्टी के भीतर घमासान मचा दिया जिसके परिणामस्वरूप पीसी चाको को सामने आकर साफ करना पड़ा कि ऐसे मसलों को उठाने के लिये पार्टी के भीतर ही विभिन्न मंच मौजूद हैं. 
  • कांग्रेस के लिये इबारत दीवार पर साफ लिखी हुई है. 2016 के विधानसभा चुनावों में पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन को देखते हुए देश के अन्य राज्यों में वर्ष 2017 में आयोजित होने वाले चुनावों में पार्टी का भविष्य बिल्कुल भी उम्मीद पैदा नहीं करता. उत्तराखंड के अलावा पार्टी 2017 में प्रस्तावित चुनावी राज्यों में भी कांग्रेस की स्थिति अच्छी नहीं है.

    2017 में पंजाब, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और गोवा में चुनाव प्रस्तावित हैं. हालांकि पार्टी का भाग्य बदलने की नीयत से कांग्रेस ने चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर की सेवाएं ली हैं लेकिन इसके बावजूद उसके एक बड़ी ताकत बन पाने की संभावना न के बराबर ही है.

    इस नकारात्मकता भरे माहौल के बीच पार्टी हालिया चुनाव नतीजों का विश्लेषण करने और इनमें हुई पार्टी की दुर्गति को लेकर विचार-विमर्श करने के लिये कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्लूसी) की बैठक आयोजित करने पर विचार कर रही है. ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि इस बैठक के दौरान ही राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने की घोषणा भी कर दी जाएगी.

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    पार्टी में निर्णय लेने वाली सबसे बड़ी इकाई सीडब्लूसी यानी कांग्रेस वर्किंग कमेटी की कमान पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी के हाथों में है और खबरों के अनुसार उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से इसकी बैठक आयोजित करने के लिय एक तारीख तय करने के लिये कहा है.

    एक वरिष्ठ कांगेसी नेता का कहना है कि इस बैठक के इसी माह के अंतिम सप्ताह में आयोजित होने की संभावना है. 

    उन्होंने आगे कहा, ‘‘इस बैठक के दौरान काफी लंबे समय से रुके पड़े संगठनात्मक फेरबदल के लिये मार्ग प्रशस्त होने की पूरी संभावना है. वास्तव में 2014 चुनावों में हुई करारी हार के बाद फेरबदल को लेकर सिर्फ बात ही होती रही है. अब वह समय आ गया है जब हमें दिग्विजय सिंह द्वारा सुझाये गए तरीके से सर्जरी करें.’’

    दिग्विजय ने विवाद को दी हवा

    दिग्विजय सिंह के हालिया बयानों में पार्टी के भीतर घमासान मचा दिया जिसके परिणामस्वरूप पीसी चाको को सामने आकर साफ करना पड़ा कि ऐसे मसलों को उठाने के लिये पार्टी के भीतर ही विभिन्न मंच मौजूद हैं. 

    उन्होंने दूसरों को सार्वजनिक मंचों से ऐसे मामलों को उठाने से दूर रहने की चेतावनी देते हुए कहा, ‘‘पार्टी के कामकाज और कार्यशैली में बदलाव की दिशा में वरिष्ठों द्वारा दिये जाने वाले हर सुझाव का हम स्वागत करते हैं. हममें से हर किसी के पास कांग्रेस वर्किंग कमेटी का हिस्सा बनने का मौका है. अब चुनावों के बाद के परिदृश्य में हम बहुत ही जल्द सीडब्लूसी की बैठक आयोजित करने वाले हैं. दिग्विजय सिंह जी सहित हममें से हर किसी के पास पार्टी के भीतर के इस सबसे बड़े मंच का हिस्सा बनने का अवसर है और वहां पर हर कोई खुलकर अपनी बात कहने के लिये स्वतंत्र है.’’

    हमें इसका सामना करना चाहिये. हमें नए विचारों वाले नए चेहरों को महत्वपूर्ण पदों पर आसीन करने की जरूरत है

    इसके अलावा कहा तो यह भी जा रहा है कि सीडब्लूसी की बैठक के दौरान पिछली बार दिल्ली में 2014 में आयोजित हुए एआईसीसी के अगले सत्र के लिये तारीख और स्थान का चयन भी कर लिया जाएगा.

    अतीत में भी विभिन्न अवसरों पर पार्टी के नेता अच्छा प्रदर्शन न करने वाले पार्टी पदाधिकारियों के खिलाफ अपनी हताशा का प्रदर्शन करते हुए उन्हें पार्टी से निकाल बाहर करने की मांग उठाते आए हैं. 

    एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता कहते हैं, ‘‘हमें इसका सामना करना चाहिये. हमें नए विचारों वाले नए चेहरों को महत्वपूर्ण पदों पर आसीन करने की जरूरत है. किसी न किसी को तो इन चुनावी नतीजों के लिये जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए. इसके अलावा उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और दूसरे राज्यों में भी काफी समय से उठ रही असंतोष की आवाजों पर ध्यान न देने के चलते जो कुछ भी हुआ उसके लिये भी किसी न किसी की जवाबदेही तो तय होनी ही चाहिये. हम हर बार संकट के समय शर्तुमुर्ग की तरह रेत में सिर दबाकर नहीं बैठ सकते.’’

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    तमाम आलोचनाओं के बीच पार्टी के कई वरिष्ठ नेता केंद्रीय नेतृत्व के समर्थन में सामने आए हैं और उन्होंने पार्टी के सामने अस्तित्व का संकट होने जैसी किसी भी बात को नकारा है. वे हालिया चुनाव नतीजों का हवाला देते हुए कह रहे हैं कि कैसे इनमें कांग्रेस को पांच राज्यों में 139 सीट मिली हैं जबकि बीजेपी को सिर्फ 65 सीट. इसी तरह वोट प्रतिशत के मामले में भी पार्टी का प्रदर्शन अपने प्रतिद्वंद्वी के मुकाबले काफी बेहतर रहा है.

    राहुल की कार्यशैली पर सवाल

    वर्तमान में देश की सबसे पुरानी पार्टी जिस भी हालत में है उसके लिये राहुल गांधी को जिम्मेदार ठहराते हुए उनके खिलाफ खंजर निकाल लिये गए है. कांग्रेस के कई नेताओं ने राहुल गांधी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि चापलूसों की मंडली से घिरा होने के कारण उनतक पहुंचना कठिन हो गया है.

    पूर्व में कांग्रेस का हिस्सा रहे बीजेपी नेता हेमंत बिस्वसर्मा तो इस हद चले गए हैं कि उन्होंने राहुल को ‘‘अत्यधिक घमंडी’’कहते हुए उन्हें ऐसा व्यक्ति कह दिया जो ‘‘मालिक और नौकर वाले बेहद घृणापूर्ण रिश्ते’’ में भरोसा करते हैं. उन्होंने एनडीटीवी से कहा, ‘‘या तो उन्हें खुद को बदलना होगा या फिर वह समय आएगा जब कांग्रेस उन्हें बदल देगी.‘‘ असम में पार्टी की दुर्गति के लिये मुख्य रूप से सर्मा का पार्टी से बाहर जाना माना जा रहा है.

    हाल ही में बीजेपी का हाथ थामने वाले एक और असंतुष्ट विजय बहुगुणा ने दावा किया कि वे दो वर्ष तक कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात के प्रयास करते रहे लेकिन उन्हें अपनी बात सामने रखने का मौका ही नहीं मिला. 

    उन्हें सिर्फ उनके विद्रोह कर देने के बाद ही मौका मिला लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी

    उन्होंने यह भी दावा किया कि इसके बाद ही उन्होंने 8 साथियों के साथ मिलकर यह कद उठाया जिसकी परिणतिस्वरूप दो महीने तक राजनीतिक उठापठक चली जिसका अंत अदालती हस्तक्षेप के बाद ही हो पाया.

    यहां तक कि अरुणाचल के मुख्यमंत्री कलिखो पुल का भी कहना था कि उन्हें प्रदेश के स्थानीय नेताओं के बीच पनप रहे असंतोष के बारे में राहुल गांधी को अवगत करवाने के लिये 13 महीने का इंतजार करने के बाद मिलने का मौका मिला. उन्हें सिर्फ उनके विद्रोह कर देने के बाद ही मौका मिला लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. इस दौरान पुल ने बीजेपी के सहयोग से राज्य में सरकार बना ली.

    इस बीच सभी की निगाहें अगली सीडब्लूसी की बैठक पर लगी हुई हैं जिसमें पार्टी के नेता इकट्ठा होंगे और पार्टी को पुर्नजीवित करने की दिशा में कुछ कठोर कदम उठाये जाने की अनुशंसा भी करेंगे. उन्हें इस बात की भी उम्मीद है कि 2014 की दुर्दशा के लिये किसी को भी जिम्मेदार न ठहराने वाली एंटनी कमेटी की रिपोर्ट की तरह यह कोशिश और मौका व्यर्थ नहीं जाएगा.

    First published: 23 May 2016, 14:11 IST
     
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