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ब्रेड निर्माता कंपनियों की सफाई, आटे में नहीं है कैंसरकारक तत्व

कैच ब्यूरो | Updated on: 24 May 2016, 16:24 IST

सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायरमेंट (सीएसई) ने सोमवार को एक स्टडी रिपोर्ट जारी की थी. इस रिपोर्ट में दिल्ली के सभी शीर्ष ब्रांड के ब्रेड के नमूनों में कैंसरकारक केमिकल मिलने का दावा किया गया था. जिसके बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने जांच का आदेश दिया है.

सीएसई की रिपोर्ट में कहा गया है कि जांच में ब्रेड और बन सहित ब्रेड के सामान्य रूप से उपलब्ध 38 ब्रांड में से 84 प्रतिशत में पोटैशियम ब्रोमेट और पोटैशियम आयोडेट पाया गया. इन दोनों केमिकल से कैंसर होने का खतरा होता है.

सीएसई की रिपोर्ट को किया खारिज

आज ब्रेड कंपनियों ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की है. ब्रेड कंपनियों ने स्‍टडी रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा कि हम एफएसएसआई के नियामक पर खरा उतरने वाले मैदा का ही प्रयोग करते हैं, जिसे सुरक्षित माना जाता है.

ऑल इंडिया ब्रेड मैन्‍युफैक्‍चरर्स एसोसिएशन के अध्‍यक्ष रमेश मागो ने कहा कि एफएसएसएआई के नियामक ने ब्रेड और बेकरी के लिए उपयोग किए जाने वाले मैदा के लिए पोटैशियम ब्रोमेट और पौटैशियम आयोडेट के उपयोग की अनुमति दी है. हम लोग इसी आधार पर ब्रेड का निर्माण करते हैं.

सीएसई रिपोर्ट के दावे को खारिज करते हुए दिल्‍ली के ब्रेड निर्माताओं ने कहा कि वे भारतीय खाद्य सुरक्षा स्टैंडर्ड अथॉरिटी (एफएसएसएआई) द्वारा बनाए गए नियमों का ही पालन करते हैं. साथ ही ब्रेड संघ का कहना है कि इसी मानक के ब्रेड अमेरिका के शहरों में भी खाने के लिए उपयोग में लाया जाता है.

इससे पहले सीएसई ने बाजार में आम तौर पर मिलने वाले 38 ब्रांड के ब्रेड, पाव और बन के अलावा रेडी-टू-ईट बर्गर ब्रेड और दिल्ली के लोकप्रिय फास्ट फूड आउटलेटों के रेडी-टू-ईट पिज्जा ब्रेड के नमूनों की जांच की थी, जिसमें कैंसरकारक दो रसायन की पुष्टि हुई थी.

सीएसई के उप महानिदेशक चंद्र भूषण ने अपने बयान में कहा, “हमने 84 फीसदी नमूनों में पोटैशियम ब्रोमेट या आयोडेट पाए. कुछ नमूनों में हमने दूसरे प्रयोगशालाओं से भी इनकी मौजूदगी की पुष्टि की."

स्वास्थ्य मंत्रालय ने दिए जांच के आदेश

इस पर प्रतिक्रिया जताते हुए ब्रिटानिया ने पोटैशियम ब्रोमेट या आयोडेट का इस्तेमाल करने से इनकार किया और कहा, "ब्रिटानिया के सभी ब्रेड उत्पाद एफएसएसएआई द्वारा निर्धारित वर्तमान खाद्य सुरक्षा नियमों का 100 फीसदी पालन करते हैं."

वहीं केएफसी ने कहा, "हमारे उपभोक्ताओं की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और हम सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करने और उपभोक्ताओं को सर्वश्रेष्ठ गुणवत्ता के उत्पाद मुहैया कराने को प्रतिबद्ध हैं."

कंपनी ने कहा, "हमारे यहां यह सुनिश्चित करने के लिए कड़ी प्रक्रिया है कि जो खाद्य सामग्री हम मुहैया करा रहे हैं वह एफएसएसएआई की ओर से निर्धारित नियमों का अनुपालन करती है और वह इस्तेमाल के लिए पूरी तरह से सुरक्षित है."

मैकडोनल्ड इंडिया के विक्रम औगाले ने कहा कि हम आटे में पोटैशियम ब्रोमेट या आयोडेट का इस्तेमाल नहीं करते हैं. उन्होंने सीएसई के दावों और आरोपों को खारिज करते हुए इसे पूरी तरह से आधारहीन बताया है.

डोमिनोज के प्रवक्ता ने ई-मेल के जरिए अपने जवाब में कहा, "हम उच्चतम गुणवत्ता मानकों और भारतीय खाद्य कानूनों का पालन करने में विश्वास रखते हैं. हम अपने सभी रेस्त्रां में खाद्य सुरक्षा के उच्चतम स्तर को बनाए रखने के लिए सभी प्रक्रियाओं का पालन करते हैं. हम केवल एफएसएसएआई द्वारा मंजूर सामग्री का ही प्रयोग करते हैं."

वहीं सीएसई रिपोर्ट पर स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा ने कहा, "हमें मामले की जानकारी है. मैंने अपने अधिकारियों से कहा है कि वे तात्कालिक आधार पर मुझे रिपोर्ट दें. घबराने की कोई जरूरत नहीं है. बहुत जल्द जांच रिपोर्ट सामने आ जाएगी."

First published: 24 May 2016, 16:24 IST
 
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