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403 में 28 पर ब्राह्मणों को टिकट, माया ही जाने बसपा की सोशल इंजीनियरिंग

पत्रिका स्टाफ़ | Updated on: 11 February 2017, 5:45 IST

उत्तर प्रदेश के विधान सभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं जातिवाद की राजनीति तेज होती जा रही है. बसपा सुप्रीमो मायावती अपनी सोशल इंजीनियरिंग के लिए भी जानी जाती हैं. इसी के बूते वह एक चुनाव जीत चुकी हैं. लेकिन इस बार के चुनाव में जिस तरह से टिकटों का बंटवारा हुआ है उसे देखकर लगता है मायावती का ब्राह्मणों से मोहभंग हुआ है.

प्रदेश में ब्राह्मणों का लगभग 13 फीसदी मत हैं. उन्हें किंग मेकर के रूप में देखा जाता रहा है. इसीलिए कांग्रेस ने इस बार के चुनाव में ब्राह्मण चेहरे के रूप में शीला दीक्षित को मुख्यमंत्री पद के दावेदार के रूप में मैदान में उतारा है. लेकिन, आश्चर्य है मायावती टिकट बंटवारे में ब्राह्मणों को तरजीह नहीं दे रही हैं.

हाल ही में हाथी से उतर कर भाजपा का दामन थामने वाले बृजेश पाठक ने खुलासा किया है कि बसपा 403 विधानसभा सीटों में से महज 28 सीटों पर ही ब्राह्मण प्रत्याशी उतार रही है. इनमें भी दस उम्मीदवार ऐसे हैं जो पिछला चुनाव हार चुके हैं.

ब्राह्मण शंख बजाएगा, हाथी दिल्ली जाएगा

कभी बसपा का नारा था 'ब्राह्मण शंख बजाएगा, हाथी दिल्ली जाएगा' या फिर 'हाथी नहीं गणेश है, ब्रह्मा, विष्णु, महेश है'. लेकिन इस बार मायावती की सोशल इंजीनियरिंग में मुसलमानों को तरजीह मिल रही है. बताया जाता है कि अब तक करीब सौ से अधिक मुसलमानों को मायावती की पार्टी से टिकट फाइनल किया जा चुका है. अब इस बात को सिर्फ मायावती ही बता सकती हैं कि इस रणनीति के पीछे का गणित क्या है.

जिधर गए ब्राह्मण बन गई सरकार

First published: 30 August 2016, 7:57 IST
 
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