Home » इंडिया » BSP supported Samajwadi Party candidates for loksabha seat at phulpur gorakhpur mayawati will go to rajyasabha
 

गठबंधन नहीं 'एक हाथ दे एक हाथ ले' का फार्मूला': मायावती

आकांक्षा अवस्थी | Updated on: 9 March 2018, 15:24 IST

बदलते चुनावी समीकरणों को ध्यान में रखते हुए सपा और बसपा ने एक दूसरे से हाथ मिला लिया है. उत्तरप्रदेश की दो लोकसभा सीट के उपचुनाव में भाजपा को टक्कर देने के लिए 25 साल बाद इन दोनों पार्टियों ने फिर से एक साथ आने की घोषणा की है.  गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीटों पर 11 मार्च को उपचुनाव होने हैं. जिसके मद्देनज़र सपा और बसपा एक साथ आये हैं.

गोरखपुर सीट से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सांसद थे और फूलपुर से उप मुख्यमंत्री कैशवप्रसाद मौर्य. दोनों ने विधान परिषद के लिए चुने जाने के बाद इस्तीफा दे दिया था. ऐसा माना जा रहा है कि यह 2019 चुनावों के लिए दोनों पार्टियों की मिली जुली रणनीति का हिस्सा है. इसे 2019 के लिए एक प्रयोग के तौर पर देखा जाए.

 

 

राजनितिक सूझ बूझ दिखते हुए दोनों पार्टियों की तरफ से इस गठबंधन का ऐलान नहीं किया गया, बल्कि स्थानीय स्तर पर ऐसा कराया गया, ताकि अगर कुछ-ऊंच नीच हो तो हाईकमान उसे संभाल सके. इसी के मद्देनजर इस ऐलान के बाद बसपा प्रमुख मायावती स्वयं मीडिया के सामने आई और कहा कि ये वोट ट्रांसफर का मामला है, इसे गठबंधन नहीं समझा जाए. यह भी सिर्फ गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा चुनाव के लिए है. इसके अलावा राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों में दोनों पार्टियां एक दूसरे की मदद करेंगी.

मायावती ने पार्टी की स्थिति साफ करते हुए कहा, ‘मैं कहना चाहूंगी कि सपा-बसपा का कोई गठबंधन होगा तो गुपचुप तरीके से नहीं होगा, बल्कि खुलकर होगा. किसी पार्टी से भी गठबंधन होगा तो मीडिया को सबसे पहले बताया जाएगा. फूलपुर और गोरखपुर में जो चुनाव हैं, उनमें बसपा ने अपने उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारे हैं. इसका ये मतलब नहीं है कि हम वोट डालने नहीं जाएंगे और हम वोट डालने जरूर जाएंगे. ऐसा मैंने पार्टी के लोगों को दिशा निर्देश दिए हैं.’

ये भी पढ़ें- मायावती, अखिलेश साथ-साथ, BSP ने फूलपुर और गोरखपुर उपचुनाव में सपा का किया समर्थन!

 

‘बसपा सुप्रीमों मायावती ने फूलपुर और गोरखपुर लोकसभा उपचुनाव में सपा प्रत्याशी के समर्थन की घोषणा कर दी है। बसपा का समर्थन मिल जाने से दोनों सीट पर सपा की भारी मतों के अंतर से जीत सुनिश्चित हो गई है। इस उपचुनाव के नतीजे के दूरगामी संकेत होंगे। यह 2019 के चुनाव को भी प्रभावित करेगा।’
किरणमय नंदा, सपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य

25 साल बाद साथ आयी दोनों पार्टियां
दोनों पार्टियों ने भाजपा के खिलाफ 1993 में गठबंधन कर चुनाव लड़ा था और मिलीजुली सरकार बनाई थी. तब मुलायम सिंह मुख्यमंत्री बने थे. आपसी खींचतान के चलते 2 जून, 1995 को बसपा ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया था. अब मौजूदा हालात को देखते हुए एक बार फिर दोनों पार्टियों ने हाथ मिलाया है.

इससे पहले बसपा के गोरखपुर प्रभारी घनश्याम चंद्र खरवार ने सपा प्रत्याशी प्रवीण कुमार निषाद को समर्थन की घोषणा की. वहीं, इलाहाबाद के जोनल को ऑर्डिनेटर अशोक गौतम ने फूलपुर से सपा प्रत्याशी नागेंद्र सिंह पटेल को समर्थन की घोषणा की. गौरतलब है कि पिछले विधानसभा चुनाव में सपा को 28 और बसपा को 22 फीसदी वोट मिले थे. दोनों को जोड़ ले तो ये 50% वोट हो जाता है. ऐसी स्थिति में बीजेपी के लिए उपचुनाव में सपा के प्रत्याशियों को हराना बेहद मुश्किल हो होगा.

First published: 5 March 2018, 9:00 IST
 
अगली कहानी