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आज भी मायावती को डराती है 'गेस्ट हाउस कांड' की वो भयानक रात, इज्जत लूटने पर उतारू थे सपाई गुंडे

आदित्य साहू | Updated on: 12 January 2019, 14:10 IST

2019 लोकसभा चुनाव से पहले आज (12 जनवरी) यूपी में सपा-बसपा गठबंधन ने सीटों का ऐलान कर दिया. इसके साथ ही साफ हो गया कि सपा और बसपा दोनों यूपी में 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी. मायावती ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि सपा-बसपा 76 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और कांग्रेस के लिए रायबरेली और अमेठी की सीट छोड़ी जाएगी. इसके अलावा दो सीटें गठबंधन के अन्य दलों के लिए छोड़ी जाएंगी.

इस दौरान मायावती ने उस घटनाक्रम को भी याद किया जो बीएसपी सुप्रीमो के लिए किसी दु:स्वप्न की तरह है. उन्होंने कहा कि जनता के हित में गेस्ट हाउस कांड भुलाकर सपा के साथ गठबंधन किया है. हालांकि कहीं न कहीं मायावती के जेहन में उस भयानक रात की याद जरूर थी तभी उन्होंने इसे याद किया. आइए आपको भी बताते हैं क्या हुआ था उस रात-

2 जून 1995 को लखनऊ के वीआईपी गेस्ट हाउस में शाम के करीब चार से पांच बजे करीब दो सौ समाजवादी पार्टी के गुंडों और विधायकों के उत्तेजित हुजूम ने वीआईपी गेस्ट हाउस पर धावा बोल दिया. वे चिल्ला रहे थे- ‘चमार पागल हो गए हैं. हमें उन्हें सबक सिखाना होगा’

 

 

इस जैसे जातिवादी नारों के साथ-साथ और भी नारे लग रहे थे, जिनमें बीएसपी विधायकों और उनके परिवारों को घायल करने या खत्म करने के बारे में खुल्लम-खुल्ला धमकियां थीं. गंदी भाषा और गाली-गलौज का इस्तेमाल करते हुए समाजवादी पार्टी के गुंडे उस दिन कुछ भी करने को उतारू थे. कॉमन हॉल में बैठे विधायकों ने जल्दी से मुख्य द्वार बंद कर दिया लेकिन उत्पाती झुंड ने उसे तोड़कर खोल दिया. फिर वे असहाय बीएसपी विधायकों पर टूट पड़े और उन्हें थप्पड़ मारने लगे और लतियाने लगे.

कम से कम पांच बीएसपी विधायकों को घसीटते हुए जबरदस्ती वीआईपी गेस्ट हाउस से बाहर ले जाकर गाड़ियों में डाला गया और उन्हें मुख्यमंत्री आवास ले जाया गया. उन्हें राजबहादुर के नेतृत्व में बीएसपी विद्रोही गुट में शामिल होने के लिए और मुलायम सरकार को समर्थऩ देने वाले पत्र पर दस्तखत करने को कहा गया. कुछ विधायक तो इतने डरे हुए थे कि कोरे कागज पर ही उन्होंने दस्तखत कर दिए.

इधर विधायकों को घेरा जा रहा था और उधर मायावती की तलाश हो रही थी. तभी कुछ विधायक दौड़ते हुए मायावती के रुम में आए और नीचे चल रहे उत्पात की जानकारी दी. बाहर के भागकर आए विधायक आरके चौधरी और उनके गार्ड के कहने पर भीतर से दरवाजा बंद कर लिया गया. इसी बीच समाजवादी पार्टी के उत्पाती दस्ते का एक झुंड धड़धड़ाता हुआ गलियारे में घुसा और मायावती के कमरे का दरवाजा पीटने लगा.

‘चमार औरत को उसकी मांद से घसीट कर निकालो' जैसी आवाजें बाहर से भीतर आ रही थी. दरवाजा पीटने वाली भीड़ लगातार मायावती के लिए बेहद अपमानजनक शब्दों का प्रयोग कर रही थी. गालियां दे रही थी. कमरे के भीतर सभी सहमे हुए थे कि पता नहीं क्या होने वाला है.

बीएसपी ने एक दिन पहले ही मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में बनी सपा-बसपा सरकार के समर्थन वापस ले लिया था. अब तैयारी मायावती को यूपी की सत्ता पर बैठाने की थी. बीमारी से जूझ रहे बीएसपी सुप्रीमो कांशीराम दिल्ली में थे. मायावती लखनऊ में. दोनों पल -पल बदलती राजनीति और दांव-पेच पर एक दूसरे से लगातार बात कर रहे थे. यूपी के राज्यपाल मोतीलाल वोरा से मिलकर मायावती बीजेपी, कांग्रेस और जनता दल के समर्थन से सरकार बनाने का दावा पेश कर चुकी थीं.

 

हर खेमे में मीटिंगों का दौर चल रहा था. कांशीराम और मायावती की इस चाल से आग बबूला हुए मुलायम सिंह किसी भी हाल में अपने हाथों से सत्ता की डोर फिसलने नहीं देना चाहते थे और इधर वीआईपी गेस्ट हाउस में मायावती तख्तापलट की फुल प्रूफ योजना पर अपने सिपहसालारों के साथ बैठक कर रही थीं. वीआईपी गेस्ट हाउस के कॉमन हॉल में बीएसपी विधायकों और नेताओं की बैठक खत्म करने के बाद कुछ चुनिंदा विधायकों को लेकर मायावती अपने रुम नंबर एक में चली गई. बाकी विधायक कॉमन हॉल में ही बैठे थे. तभी उपरोक्त बातें घटी थीं।

इसके बाद हजरतगंज के एसएचओ विजय भूषण और दूसरे एसएचओ सुभाष सिंह बघेल कुछ सिपाहियों के साथ वहां पहुंचे. इस बीच गेस्ट हाउस की बिजली और पानी की सप्लाई भी काट दी गई थी. दोनों पुलिस अधिकारियों ने किसी तरह से भीड़ को काबू में करने की कोशिश की लेकिन नारेबाजी और गालियां नहीं थम रही थी. थोड़ी देर बाद जब जिला मजिस्ट्रेट वहां पहुंचे तो उन्होंने पुलिस को किसी भी तरह से हंगामे को रोकने और मायावती को सुरक्षा प्रदान करने के निर्देश दिए.

इस बीच केन्द्र सरकार, राज्यपाल और बीजेपी नेता सक्रिय हो चुके थे. इसका ही असर था कि भारी तादाद में पुलिस बल को वहां भेजा गया. डीएम ने मोर्चा संभाला और मायावती के खिलाफ नारे लगा रही भीड़ को वहां से बाहर किया. समाजवादी पार्टी के विधायकों पर लाठी चार्ज तक का आदेश दिया, तब जाकर वहां स्थिति नियंत्रण में आ सकी. मायावती के कमरे के बाहर वो खुद डटे रहे, जब तक खतरा टल नहीं गया.

वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम की पोस्ट से इनपुट

First published: 12 January 2019, 14:09 IST
 
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