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बीएसपी कार्यकर्ताओं की गाली निंदनीय है पर क्या भाजपा को निंदा करने का हक है?

चारू कार्तिकेय | Updated on: 10 February 2017, 1:48 IST
QUICK PILL
  • बसपा के विरोध प्रदर्शन के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं ने दयाशंकर सिंह की बहन और बेटी को पेश करो जैसे नारे लगाए. सिंह की पत्नी का कहना है कि उनकी बेटी सदमे में हैं.
  • स्वाती सिंह और दयाशंकर सिंह की मां ने मायावती और तीन अन्य बसपा नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है.
  • बीजेपी अब इस पूरे मामले को बढ़ाना चाहती है ताकि इसकी आड़ में दयाशंकर सिंह की तरफ से की गई टिप्पणी पर लोग बात नहीं करें.

देश के विभिन्न हिस्सों में भारतीय जनता पार्टी को दलितों के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है. पार्टी अब बहुजन समाज पार्टी के कार्यकर्ताओं को निशाना बनाते हुए मामले को दूसरी तरफ मोड़ने की कोशिश में जुट गई है. बीजेपी कार्यकर्ता बीएसपी कार्यकर्ताओं के आपत्तिजनक बयान का जिक्र कर रहे हैं. बसपा कार्यकर्ताओं ने बीजेपी से निकाले गए नेता दयाशंकर सिंह की बेटी और पत्नी को लेकर आपत्तिजनक नारेबाजी की थी.

बीएसपी कार्यकर्ताओं ने सिंह के बयान के खिलाफ 21 जुलाई को लखनऊ में बड़ा विरोध प्रदर्शन किया था. बीजेपी नेता दयाशंकर सिंह ने अपने बयान में बसपा सुप्रीमो मायावती को वेश्या से भी बदतर करार दिया था. 

बसपा के विरोध प्रदर्शन के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं ने सिंह की बहन और बेटी को पेश करो जैसे नारे लगाए. सिंह की पत्नी का कहना है कि उनकी बेटी सदमे में हैं. बाद में उन्होंने मायावती समेत चार बसपा नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई.

वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश ने इस प्रदर्शन के बाद तुरंत अपनी फेसबुक पोस्ट पर लिखा कि अगर गाली दी गई है तो वह निश्चित तौर पर निंदनीय है. हालांकि बाद में उन्होंने अपनी पोस्ट डिलीट कर दी.

बसपा के विरोध प्रदर्शन के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं ने सिंह की बहन और बेटी को पेश करो जैसे नारे लगाए

कांग्रेसी सांसद और प्रवक्ता सुष्मिता देव ने कैच से कहा कि प्रदर्शन करना बीएसपी कार्यकर्ताओं का लोकतांत्रिक अधिकार है. हर अधिकार एक तरह की जिम्मेदारी के साथ आता है. 

जेडीयू सांसद केसी त्यागी ने कहा वह बसपा कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन को जायज करार देते हैं लेकिन वह उन्हें अश्लील भाषा के इस्तेमाल से परहेज करने की सलाह देंगे. हमने जिस भाषा की निंदा की, वह उसी भाषा का इस्तेमाल नहीं कर सकते.

भाजपा अब इस पूरे मामले को बढ़ाना चाहती है ताकि इसकी आड़ में दयाशंकर सिंह की तरफ से की गई टिप्पणी पर लोग बात नहीं करें. 

अब सवाल यह उठता है कि पार्टी कैसे गाली देने वालों और नफरत फैलाने वालों को आश्रय दे सकती है. क्या वह बीएसपी कार्यकर्ताओं की तरफ से मिली गाली की निंदा करने की हैसियत रखती है?

क्या बीजेपी अपनी ही सरकार में मंत्री वीके सिंह के उस बयान को भूल गई जिसमें उन्होंने पत्रकारों को प्रेस्टीट्यूट करार दिया था? क्या वह यह भी भूल गई कि वीके सिंह ने हरियाणा में दो दलित बच्चों के लिए कुत्ते के बच्चे जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था? उन्होंने कहा था, 'अगर कोई कुत्ते को पत्थर मार दे तो क्या उसके लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है.'

या फिर साध्वी निरंजन ज्योति का बयान जिसमें उन्होंने रामजादे और हरामजादे का जिक्र किया था. वह अभी भी कैबिनेट में बनी हुई है. जैसे कि गिरिजराज सिंह बने हुए हैं. गिरिराज सिंह ने कांग्रेस प्रेसिडेंट सोनिया गांधी को नाइजीरियन करार दिया था.

क्या बीजेपी मंत्री वी के सिंह के उस बयान को भूल गई जिसमें उन्होंने पत्रकारों को प्रेस्टीट्यूट कहा था

अभी तक बीजेपी के सांसद साक्षी महाराज के खिलाफ अभी तक कोई मामला दर्ज नहीं किया गया हैै. महाराज ने खुले तौर पर हिंदू महिलाओं को बच्चे पैदा करने की मशीन कहा था.

इसके बाद बीजेपी के गोरखपुर से सांसद योगी आदित्यनाथ ने खुलेआम गाय का मांस खाने वाले संदिग्धों की हत्या को जायज करार दिया था. आगरा से बीजेपी के सांसद रामशंकर कठेरिया कहते हैं कि हिंदुओं को एकजुट होकर जवाब देना चाहिए. कम से कम बीजेपी के चार सदस्य मुजफ्फरनगर दंगों के मामले में आरोपी हैं. इसमें पार्टी के वाइस प्रेसिडेंट, सांसद और विधायक शामिल हैं. 

First published: 23 July 2016, 2:06 IST
 
चारू कार्तिकेय @charukeya

असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़, राजनीतिक पत्रकारिता में एक दशक लंबा अनुभव. इस दौरान छह साल तक लोकसभा टीवी के लिए संसद और सांसदों को कवर किया. दूरदर्शन में तीन साल तक बतौर एंकर काम किया.

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