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बजट 2018: तीन तलाक के अलावा भी हैं महिलाओं की बुनियादी जरूरतें

कैच ब्यूरो | Updated on: 29 January 2018, 15:16 IST

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण से बजट सत्र की शुरुआत हो गई. बजट सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि सरकार ने संसद में तीन तलाक बिल पेश किया, जल्द ही इसे कानून भी बनाया जाएगा. देश में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का दायरा बढ़ रहा है. सरकार गरीबों की पीढ़ा को दूर करने की कोशिश कर रही है, 640 जिलों में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की योजना चल रही है.

बजट 2018 से महिलाओं की भी खासी उम्मीदें हैं. इस बजट सत्र में तीन तलाक के अलावा भी कुछ बेसिक जरूरतें हैं जिन पर महिलाओं का ध्यान हैं.

महिलाओं के खिलाफ बढ़ते हुई आपराधिक गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए महिलाओं की सरकार से ये खासी अपेक्षा होगी कि सरकार महिला सुरक्षा के प्रति अधिक संवेदनशील हो.

पिछले बजट में सरकार ने महिला सुरक्षा के लिए 'निर्भया फण्ड' की घोषणा थी, पर आज भी स्थिति में कोई बदलाव नहीं देखा जा सकता है. स्थिति पहले के जैसे ही है. पैसे की कमी और समायोजित प्लानिंग का न होना इसकी असफलता का एक बड़ा कारण है.

उम्मीद है कि इस बार महिला सुरक्षा से जुड़े फण्ड में बढ़ोत्तरी की जाएगी. साथ ही उसके उपयोग को लेकर एक समायोजित नीति के तहत काम किया जायेगा.
सरकार एक तरफ जहां सफाई और स्वास्थ्य को प्रमोट कर रही है, ऐसे में सेनेटरी नैपकिन्स से जीएसटी को हटाना चाहिए जिसके कि हर महिला तक इसकी पहुंच बनाई जा सके.

महिलाओं को कुछ टैक्स रिबेट भी मिलनी चाहिए. और महिलाओं के लिए नौकरी की संभावनाओं को बढ़ावा देना चाहिए. महिलाएं परिवार के खर्चों के लिए जिम्मेदार हैं अगर सरकार कर लागू करना चाहती है, तो इसे लक्जरी वस्तुओं पर कर सकती है, दैनिक वस्तुओं पर नहीं.

जैसा कि हम इस साल के केंद्रीय बजट का उत्सुकता से इंतजार कर रहे हैं, हम उम्मीद कर सकते हैं कि मानसिक स्वास्थ्य देखभाल और शिक्षा की विशेष आवश्यकताओं के विषय में सरकार की विकास योजनाओं में अहम जगह मिले.

मानसिक स्वास्थ्य हमारे देश का सबसे उपेक्षित क्षेत्र है. अधिकांश पश्चिमी देशों में मानसिक स्वास्थ्य पर बजट का 4 प्रतिशत खर्च होता है जबकि भारत में केवल 0.4 प्रतिशत खर्च किया जाता है. अधिकांश सेवाएं निजी तौर पर संचालित होती हैं और कोई भी सरकारी निगरानी या दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है.

सरकार को एक विस्तृत मानसिक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे के लिए बहुत अधिक धनराशि आवंटित करनी चाहिए.

First published: 29 January 2018, 13:43 IST
 
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