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बजट 2018 LIVE: जेटली ने पेश किया अपना पांचवा बजट, बोले- भारत दुनिया की पांचवी बड़ी अर्थव्यवस्था

आदित्य साहू | Updated on: 1 February 2018, 11:12 IST

थोड़ी देर में संसद में आम बजट पेश किया जाएगा. देश के 25वें वित्त मंत्री अरुण जेटली आज देश का 88वां बजट पेश करेंगे. बजट पेश करने से पहले अरुण जेटली वित्त मंत्रालय पहुंच गए हैं. वित्त मंत्री जेटली 11 बजे बजट पेश करेंगे. बजट की कापियां संसद भवन पहुंच चुकी हैं. जीएसटी लागू होने के बाद यह देश का पहला बजट है.

आम जनता को इस बार मोदी सरकार से काफी उम्मीदें हैं. बजट का पहला सत्र 9 फरवरी तक चलेगा. 2017 में मोदी सरकार ने रेल बजट और आम बजट को अलग-अलग पेश करने की परंपरा को खत्म कर दिया था और अब रेल बजट और आम बजट एक साथ पेश होता है.

यह बजट ऐसे समय में पेश किया जा रहा है जबकि आने वाले महीनों में आठ राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं. इनमें से तीन प्रमुख राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की सरकारें हैं. वहीं अगले साल आम चुनाव भी होने हैं. ऐसे में माना जा रहा है कि यह बजट लोकलुभावन हो सकता है.

हालांकि इस बजट को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही बड़ी अपेक्षाएं नहीं पालने की नसीहत दे चुके हैं. उन्होंने संकेत दिया था कि बजट में लोकलुभावन कदमों पर जोर नहीं होगा. उन्होंने कहा था, यह एक भ्रम है कि आम आदमी छूट चाहता है.

आप भी जानिए क्या हो सकता है खास-

आम बजट पर नौकरीपेशा लोगों से लेकर बड़े बिजनेसमैन्स की निगाहें टिकी हुई हैं. सबको बस एक उम्मीद है कि अरुण जेटली के सूटकेस से उनके लिए कुछ न कुछ तो जरूर निकलेगा. बजट सत्र के पहले दिन अपने संबोधन में पीएम मोदी ने संकेत दिया था कि बजट न केवल देश की इकोनॉमी की रफ्तार को सपॉर्ट देने वाला होगा बल्कि इसमें आम लोगों की आशाओं को भी पूरा किया जाएगा. पीएम के इस संकेत के बाद बजट में करदाताओं के लिए राहत मिलने की उम्मीद की जा सकती है.

माना जा रहा है कि सरकार इस बार टैक्स स्लैब में छूट बढ़ा सकती है. जिसका फायदा नौकरीपेशा लोगों को मिलेगा. इसके अलावा महिलाओं के लिए भी बजट में कई ऐलान होने की संभावना है. युवाओं पर मोदी सरकार का खास ध्यान है. इसलिए ये भी माना जा रहा है कि युवाओं के लिए भी कुछ बड़े ऐलान हो सकते हैं. केंद्रीय वित्‍त राज्‍य मंत्री शिव प्रताप शुक्‍ला ने कहा है कि यह ‘एक अच्‍छा बजट होगा. इससे आम जनता को फायदा मिलेगा.’

इस बार बजट में रेलवे की पूरी सिग्नल प्रणाली को हाइटेक करने की मंजूरी मिल सकती है. रेलवे को इस बार सकल बजट सहयोग (जीबीएस) का 65,000 करोड़ रुपए मिलने की उम्मीद है. इसमें पिछले साल ही 10,000 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई थी. इस बार बजट में सुरक्षा व रेल यात्री सुविधाओं को प्रमुखता दिए जाने की संभावना है. रेलवे अपने अवसंरचना विकास व सुरक्षा उपायों को बढ़ाने के लिए अपने आंतरिक संसाधनों व बाजार से धन जुटाने के लिए आगे बढ़ रहा है.

माना जा रहा है कि मोदी सरकार इस बार के बजट में किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए कई ऐलान कर सकती है. किसानों की उपज की कीमत दिलाने के लिए सरकार मंडी योजना के तहत कोई योजना ला सकती है. जिसमें केंद्र और राज्य सरकारों का सहयोग शामिल हो सकता है. बजट के बारे में चर्चा करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली कह चुके हैं कि इस बार के बजट में कृषि क्षेत्र पहली प्राथमिकता में होगा.

साल 2014 के आम चुनाव के समय पीएम मोदी ने सरकार में आने के साथ ही हर साल 2 करोड़ रोजगार की बात की थी लेकिन सरकार आने के बाद साल दर साल नौकरियां घटती चली गईं. ऊपर से मोदी सरकार द्वारा की गई नोटबंदी और आर्थिक सुधारों के लिए लाई गई जीएसटी ने उद्योगों की स्थिति खराब कर दी. जिसके बाद लोगों का रोजगार छिन गया. सरकार के सामने इस बजट के माध्यम से इसे ठीक करने का प्रयास करने का एक आखिरी मौका होगा.

बजट में वित्त मंत्री जेटली युवाओं, महिलाओं, गांव, नौकरीपेशा लोगों, किसान, हेल्थ और शिक्षा पर विशेष जोर दे सकते हैं. इसी के तहत अरुण जेटली अगले वित्त वर्ष में आयकर छूट की सीमा बढ़ाकर तीन लाख कर सकते हैं.

ऐसी चर्चा है कि शेयरों में निवेश से होने वाले पूंजीगत लाभ पर कर छूट समाप्त हो सकती है. यह भी देखना होगा कि क्या वित्त मंत्री कॉरपोरेट कर में कमी लाने के अपने वादे को पूरा करते हैं या नहीं. जानकारों का कहना है कि कुछ क्षेत्रों में निर्यात बढ़ाने के लिए प्रोत्साहनों की घोषणा हो सकती है तो उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए स्टार्टअप यानी नयी कंपनियों के लिए कुछ कदम उठाए जा सकते हैं.

मध्य वर्ग के लोग भी सरकार से टैक्स में राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं. टैक्स के क्षेत्र में राहत के आसार भी हैं क्योंकि सरकार प्रत्यक्ष कर सुधार की ओर कदम बढ़ाने की योजना बना रही है इसमें भी जीएसटी की तरह ही नए स्लैब बनाए जा सकते हैं. इससे माना जा रहा है कि इसमें मध्य वर्ग को कुछ छूट मिल सकती है.

सरकार ने मनरेगा के तहत 2 लाख 36 हज़ार किमी पक्की सड़कें बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जो 2017-18 के 2 लाख 12 हज़ार किलोमीटर से 10% ज़्यादा है. यानि बजट में मनरेगा के लिए अलग से फंड आवंटित किया जा सकता है.

First published: 1 February 2018, 10:25 IST
 
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