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बजट 2018: 2019 का लोकसभा चुनाव और मोदी सरकार के सामने बजट की चुनौतियां

आदित्य साहू | Updated on: 1 February 2018, 9:29 IST

मोदी सरकार आज (1 फरवरी) साल 2018-19 के सत्र का अपना बजट पेश करेगी. यह बजट ऐसे समय में पेश किया जा रहा है जबकि आने वाले महीनों में आठ राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं. इनमें से तीन प्रमुख राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की सरकारें हैं. वहीं अगले साल आम चुनाव भी होने हैं. देखने वाली बात ये होगी वित्त अरुण जेटली के पिटारे से क्या निकलता है.

साल 2018-19 में देश की विकास दर यानी जीडीपी 7-7.5 फीसदी तक होने का अनुमान लगाया गया है. लेकिन कच्चे तेल की बढ़ची कीमत सरकार के लिए परेशानी की वजह बन सकती है. इस साल पेश होने वाला बजट भाजपा सरकार का चौथा बजट है और आख़िरी पूर्ण बजट है. मौजूदा लोकसभा का कार्यकाल अगले साल मई तक है और इससे पहले नई लोकसभा के लिए चुनाव होंगे.

 

ऐसे में भाजपा के लिए ये बजट सत्र और बजट काफी अहमियत रखते हैं क्योंकि सरकारी आंकड़ों को मानें तो इस समय अर्थव्यवस्था ख़राब स्थिति में है. बीते तीन साल के जीडीपी आंकड़े देखें तो 2015-16 में ये 7.9 फीसदी था, 2016-17 में ये 7.1 फीसदी हो गया और 2017-18 में 6.5 फीसद तक नीचे आ गया. आइए आपको भी बताते हैं इस बजट में मोदी सरकार के सामने क्या हैं चुनौतियां और आम जनता को क्या हैं उम्मीदें-

- साल 2014 के आम चुनाव के समय पीएम मोदी ने सरकार में आने के साथ ही हर साल 2 करोड़ रोजगार की बात की थी लेकिन सरकार आने के बाद साल दर साल नौकरियां घटती चली गईं. ऊपर से मोदी सरकार द्वारा की गई नोटबंदी और आर्थिक सुधारों के लिए लाई गई जीएसटी ने उद्योगों की स्थिति खराब कर दी. जिसके बाद लोगों का रोजगार छिन गया. सरकार के सामने इस बजट के माध्यम से इसे ठीक करने का प्रयास करने का एक आखिरी मौका होगा.

- सरकार के सामने बढ़ते वित्तीय घाटे की चुनौती भी है. जीएसटी को बड़ा आर्थिक सुधार बताया जा रहा था, लेकिन इस कारण सरकार की आमदनी कम होती दिख रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को जीएसटी को ठीक से लागू नहीं कर पाने के कारण एक लाख करोड़ रुपये का घाटा होगा.

- विकास दर पांच साल के न्यूनतम स्तर पर हैं. कृषि क्षेत्र और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की हालत भी खस्ता है. माना जा रहा है कि मोदी सरकार इस बार के बजट में किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए कई ऐलान कर सकती है. किसानों की उपज की कीमत दिलाने के लिए सरकार मंडी योजना के तहत कोई योजना ला सकती है. जिसमें केंद्र और राज्य सरकारों का सहयोग शामिल हो सकता है. बजट के बारे में चर्चा करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली कह चुके हैं कि इस बार के बजट में कृषि क्षेत्र पहली प्राथमिकता में होगा.

- जानकार मानते हैं कि 2018-19 में जीडीपी के आंकड़ों में थोड़ा सुधार आएगा. लेकिन ये देखना अभी बाकी है. 2017 में दुनिया की ज़्यादातर अर्थव्यवस्थाओं में ग्रोथ बढ़ी है, लेकिन भारत में जीडीपी ग्रोथ गिरती दिख रही है.

 

- इस बार बजट में रेलवे की पूरी सिग्नल प्रणाली को हाइटेक करने की मंजूरी मिल सकती है. रेलवे को इस बार सकल बजट सहयोग (जीबीएस) का 65,000 करोड़ रुपए मिलने की उम्मीद है. इसमें पिछले साल ही 10,000 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई थी. इस बार बजट में सुरक्षा व रेल यात्री सुविधाओं को प्रमुखता दिए जाने की संभावना है. रेलवे अपने अवसंरचना विकास व सुरक्षा उपायों को बढ़ाने के लिए अपने आंतरिक संसाधनों व बाजार से धन जुटाने के लिए आगे बढ़ रहा है.

- माना जा रहा है कि सरकार इस बार टैक्स स्लैब में छूट बढ़ा सकती है. जिसका फायदा नौकरीपेशा लोगों को मिलेगा.इसके अलावा महिलाओं के लिए भी बजट में कई ऐलान होने की संभावना है. युवाओं पर मोदी सरकार का खास ध्यान है. इसलिए ये भी माना जा रहा है कि युवाओं के लिए भी कुछ बड़े ऐलान हो सकते हैं.

 

हालांकि इस बजट को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही बड़ी अपेक्षाएं नहीं पालने की नसीहत दे चुके हैं. उन्होंने संकेत दिया था कि बजट में लोकलुभावन कदमों पर जोर नहीं होगा. उन्होंने कहा था, यह एक भ्रम है कि आम आदमी छूट चाहता है.

गौरतलब है कि 1 फरवरी 2018 को संसद में आम बजट पेश किया जाएगा. आम बजट 11 बजे पेश किया जाएगा. आम बजट को संसद में वित्त मंत्री अरुण जेटली पेश करेंगे. बजट का पहला सत्र 9 फरवरी तक चलेगा. 2017 में मोदी सरकार ने रेल बजट और आम बजट को अलग-अलग पेश करने की परंपरा को खत्म कर दिया था और अब रेल बजट और आम बजट एक साथ पेश होता है.

First published: 1 February 2018, 9:25 IST
 
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