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Budget 2019: इन कारणों से सबसे ज्यादा चर्चा में रहे थे देश के ये बजट

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 July 2019, 0:05 IST

Budget 2019- कोई भी सरकार जब अपना बचट पेश करती है को उससे देशवासियों को कई उम्मीदें होती है. बजट में ऐसे सरकार अपने कामों का लेखा जोखा तैयार करती है. कोई भी वित्त मंत्री जब बजट पेश करता है तो उसके सामने कई चुनौतियां होती है जिससे उसे पास पाना होता है, ऐसे में अगर कोई वित्त मंत्री ऐसा बजट पेश करे जिसकी लोेगों को उम्मीद नहीं होती है तो लोग उसके बारे में सबसे ज्यादा चर्चा करते है. हम आपको ऐसे ही बजट के बारे में बताने जा रहे है जिसकी आम लोगों के बीच काफी चर्चा हुई थी.

कृष्णामाचारी-कलडोर बजट

15 मई 1957 को तत्कालीन कांग्रेस सरकार में वित्त मंत्री रहे टी टी कृष्णामाचारी ने अपने बजट में कई फैसले लिए थे, जिसके सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव देखने को मिले थे. कृष्णामाचारी ने अपने बजट में इंपोर्ट करने के लिए लाइंसेस का प्रावधान किया था. साथ ही उन्होंने वेल्थ टैक्स लगाया और एक्साइज ड्यूटी में 400 फीसदी तक की बढ़ोतरी की थी. साथ ही इस बजट में एक्टिव और पेसिव इनकम में अंतर करने की कोशिश हुई थी. कृष्णामाचारी के बजट से हुआ बाहर से कर्ज से लेना मुश्किल हो गया.

द ब्लैक बजट

28 फरवरी 1973 को तत्काली वित्त मंत्री यशवंतराव बी चव्हाण ने जो बजट पेश किया उसे ब्लैक बजट कहा गया. यशवंतराव ने अपने बजट में वित्त वर्ष 1973-74 के लिए अनुमानित घाटा 550 करोड़ रुपये का बताया था. ऐसे में उन्होंने देश की सभी कोयला खदानों का राष्ट्रीयकरण करने का फैसला लिया, जिसका व्यापक असर पड़ा. सरकार के कोयले पर एकाधिकार के कारण बाजार में कॉम्पिटिशन खत्म हो गया. वहीं यशवंतराव ने अपने इस बजट में सामान्य बीमा कंपनियों और भारतीय कॉपर कॉरपोरेशन का भी राष्ट्रीयकरण किया था.

गांधी बजट

28 फरवरी 1987 को देश के तत्तकालीन वित्त मंत्री राजीव गांधी ने बजट पेश किया था. इस बजट में मिनिमम अल्टरनेट टैक्स का प्रावधान किया था. इस टैक्स के जरिए उन कंपनियों को भी टैक्स के दायरे में लाया गया जिनका मुनाफा तो काफी ज्यादा था लेकिन वो सरकार को किसी तरह का कोई टैक्स नहीं देती थी. वहीं राजीव गांधी के इस फैसले का असर आज भी देखने को मिलता है. क्योंकि यही कंपनिया सरकार की आय का मुख्य जरिया है.

मनरेगा बजट

28 फरवरी 2005 को तत्कालीन मनमोहस सरकार में वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने पेश किया था. चिदंबरम ने अपने इस बजट में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना को लॉन्च किया. इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को कम से कम दिनों के रोजगार का प्रावधान किया गया. इससे ग्रामीण क्षेत्र के लोगों की आमदनी बढ़ी वहीं दूसरी तरफ अफरशाही का जाल सा बिछ गया.

 

First published: 5 July 2019, 0:02 IST
 
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