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बुलंदशहर गैंगरेप आपबीती: 'इतनी रात को क्यों निकले थे, तुम्हें तमीज नहीं है'

पत्रिका स्टाफ़ | Updated on: 11 February 2017, 5:47 IST
(पत्रिका)

बुलंदशहर गैंगरेप की खौफनाक घटना के चार दिन बाद पीड़ित परिवार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कई अहम खुलासे किए. नोएडा में पीड़ित पिता ने बताया कि घटना के बाद 15 मिनट तक वो 100 नंबर पर फोन करते रहे, लेकिन फोन नहीं उठाया गया.

यही नहीं अस्पताल में पहुंचने पर महिला डॉक्टर ने भी उनके साथ बुरा व्यवहार किया. पीड़ित का कहना है कि पुलिस ने हालांकि घटना के बाद पूरी मदद की और एसएसपी को सस्पेंड करना गलत है.

उन्होंने कहा कि घटना के बाद शर्मिंदगी की वजह से अब तक हम घर नहीं गए हैं. अब बेटी का स्कूल छुड़वाना पड़ेगा और घर भी बदलना पड़ेगा.

दो बार किया कार पर हमला

घटना के बारे में सिलसिलेवार तरीके से बताते हुए पीड़ित पिता ने कहा, "हम छह लोग (तीन पु​रुष और तीन महिलाएं) कार से अपने गांव जा रहे थे. रास्ते में कार सवार आरोपियों ने पहले हमारी कार पर लोहे के धारदार रॉड जैसी कुछ चीज फेंकी पर हम नहीं रुके.

इसके बाद कार की स्पीड तेज कर दी. दोबारा हमला किया गया तो भी हमने कार नहीं रोकी और स्पीड बढ़ा दी. इसके बाद जब हमें लगा कि अब कोई पीछे नहीं तो कार की स्पीड कुछ कम की."

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पीड़ित पिता ने बताया, "इसके तुरंत बाद बदमाशों ने हमें ओवरटेक करके अपनी गाड़ी आगे लगा दी और हमें रोक लिया. इस वक्त रात के करीब डेढ बजे थे."

खेत में ले गए बदमाश

पीड़ित ने बताया, "दो बदमाश हमारी कार में घुसे और हमें बंधक बना लिया. कुछ दूर आगे ले जाकर हमारी कार को नीचे खेत में उतार लिया. दूसरी कार से उतरे पांच बदमाशों ने हम तीनों पुरुषों को बंधक बना लिया.

पहले उन्होंने हमारे साथ लूटपाट की. इसके बाद तीन बदमाश मेरी बेटी और पत्नी को उठाकर खेत के दूसरी तरफ ले गए. हमारे साथ मेरी भाभी भी थीं. लेकिन उनकी उम्र ज्यादा होने के कारण बदमाशों ने उन्हें बुढ़िया कहते हुए हमारे पास ही बंधा छोड़ दिया."

आंखों के सामने होता रहा सब

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पीड़ित परिवार ने बताया, "हमारे हाथ और मुंह बंधे थे. पांच बदमाश हथियार के बल पर हमें बंधक बनाए हुए थे और खेत के दूसरी तरफ से मेरी बेटी और पत्नी के चीखने-चिल्लाने की आवाजें आ रही थीं.

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हमारी आंखों के सामने वह इतना सब करते रहे लेकिन हम कुछ नहीं कर पाए. पीड़ित ने बताया कि तीन में से एक बदमाश ने गैंगरेप करने से इनकार कर दिया था. इसके बाद तीनों वापस चलने लगे, लेकिन फिर उनमें कुछ बात हुई और वह दोबारा बेटी और पत्नी कर तरफ चले गए और गैंगरेप को अंजाम दिया."

चार बजे तक बनाए रखा बंधक

पीड़ित परिवार का कहना है, "गैंगरेप के बाद करीब चार बजे तक उन्होंने हमें बंधक बनाए रखा. जब हमने बदमाशों से पानी मांगा तो उन्होंने हमारी और भी ज्यादा पिटाई की. इसके बाद बदमाश हमारी कार को लूट कर ले जाने लगे लेकिन कार खेत में ही फंस गई.

वह सात से आठ बदमाश थे. उन्होंने अपने एक साथी को कार के पास छोड़ा और कार को खींचने के लिए ट्रैक्टर लेने के​ लिए चले गए. कुछ देर बाद वह बदमाश भी वहां से चला गया. उसके बाद मेरे भतीजे ने खुद को खोला और फिर हम सब को खोला."

चप्पल में पहुंचे एसएसपी

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पीड़ित पिता ने बताया, "हमने खेत के दूसरी तरफ जाकर बेटी और पत्नी को देखा और उन्हें उठाकर कपड़े दिए. पुलिस को 100 नंबर पर कॉल किया, लेकिन चार-पांच बार कॉल करने पर भी कॉल नहीं उठी.

हमने नोएडा में अपने एक रिश्तेदार को कॉल किया. उस रिश्तेदार ने पुलिस के एक आला अधिकारी को कॉल किया​, जिसके 15 मिनट के बाद पुलिस मौके पर पहुंची.

पुलिस हमें थाने ले गई जहां पर एसएसपी चप्पल में ही पहुंचे. हमें मेडिकल के लिए अस्पताल लाया गया. एसएसपी को सस्पेंड करना गलत है पुलिस ने अपनी तरफ से पूरी मदद की है."

महिला डॉक्टर ने किया गलत व्यवहार

पीड़ित ने बताया कि अस्पताल में महिला डॉक्टर ने उनके साथ अभद्रता की. पी​ड़ित के अनुसार डॉक्टर ने कहा, "तुम लोगों को पता नहीं है आज-कल क्या चल रहा है, इतनी रात को क्यों निकले थे...तुम्हें तमीज नहीं है...आ जाते हैं यहां पर..." 

पीड़ित पिता ने बताया, "बीते 18 साल से नोएडा के खोड़ा में रह रहे हैं. लेकिन घटना के बाद से शर्मिंदगी के कारण वह घर नहीं गए हैं. अब बेटी का स्कूल भी छुड़वाना पड़ेगा और घर भी बदलना पड़ेगा. इस तरह की घटनाओं में कानून को कड़ा किया जाए."

First published: 2 August 2016, 11:49 IST
 
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