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यूपी: खुर्जा में 51 पॉटरी फैक्ट्रियों पर एनजीटी ने जड़ा ताला

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 May 2016, 16:41 IST

मंहगाई और चीन के माल से त्रस्त  खुर्जा के पॉटरी उद्योग को भारी नुकसान हुआ है. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी के आदेश पर बुलंदशहर जिले के खुर्जा में स्थित 51 पॉटरी फैक्ट्रियों को बंद करा दिया गया है.

एनजीटी के आदेश पर एसडीएम और प्रदूषण विभाग के अफसरों ने प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड का एयर और वॉटर एनओसी न होने पर ये कार्रवाई की.

108 फैक्ट्रियों पर भी जल्द कार्रवाई

दिल्ली के जयहिंद एनजीओ ने 2015 में पॉटरी उद्योग पर प्रदूषण फैलाने के आरोपों के साथ एनजीटी में याचिका दायर की थी.

याचिका पर सुनवाई करते हुए एनजीटी ने 7 अप्रैल को खुर्जा पॉटरी उद्योग की 51 इकाइयों को बंद करने के आदेश दिए थे. खुर्जा की 108 पॉटरी फैक्ट्रियों पर अब भी एनजीटी की कार्रवाई की तलवार लटक रही है.

पॉटरी फैक्ट्रियों से निकलने वाले प्रदूषण की जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया गया था. जांच में पाया गया कि नगर की 51 पॉटरी फैक्ट्रियां मानक से ज्यादा प्रदूषण के लिए जिम्मेदार हैं.

इसके बाद कार्रवाई करते हुए एनजीटी ने 51 फैक्ट्री संचालकों को फैक्ट्री बंद करने के निर्देश दिए थे. एनजीटी की ओर से विद्युत निगम  को भी बिजली सप्लाई काटने के निर्देश दिए गए थे. इसके बावजूद फैक्ट्री संचालकों द्वारा आदेशों का पालन नहीं किया गया

ऐसे में एनजीटी ने प्रदूषण विभाग को दोषी 51 फैक्ट्रियों को सीज करने के निर्देश दिए थे. शुक्रवार को एसडीएम इंदुप्रकाश सिंह, सीओ आरपी सिंह, कोतवाली प्रभारी और प्रदूषण विभाग के अधिकारियों ने पहुंचकर 51 फैक्ट्रियां सीज कर दी.

देश में यह इकलौती इंडस्ट्री है, जो ऑरेंज कैटेगरी में आती है. यहां मिट्टी के इन बर्तनों को भट्टी के बजाय डीजल से चलने वाले बर्नरों से पकाया जाता है.

एनजीटी ने बाकी बची पॉटरियों की मॉनिटरिंग रिपोर्ट प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मांगी है. माना जा रहा है कि इन 108 फैक्ट्रियों पर भी जल्द ताला डाल दिया जाएगा.

पॉटरी उद्योग का पुराना इतिहास

बुलंदशहर की विश्वप्रसिद्ध पॉटरी उद्योग का चार सौ साल पुराना इतिहास है. अभिलेखों से पता चलता है कि तैमूर लंग के भारत आगमन के दौरान मिस्र, तुर्की, सीरिया, अफगानिस्तान से कारीगर खुर्जा में आकर बस गए.

ये लोग स्थानीय पोखर, तालाबों की लाल मिट्टी के बर्तनों को चाक पर बनाकर पर्सियन-मुगल शैली मे उन्हें ढालते थे. बाद में बारीक कलात्मक नक्काशी और हस्तशिल्प का कार्य कर सजावटी सामान मस्जिद, मंदिर और बड़े-बड़े किलों हवेलियों पर लगने वाली मीनारें बनाकर बेचते थे.

पॉटरी में बनाए गए सजावटी फूलदान और गमले फ्रांस, अमेरिका, इंग्लैंड और कनाडा के राष्ट्रपति भवनों की शोभा को चार चांद लगा रहे हैं. पॉटरी के सामान की डिमांड विदेशों में ज्यादा है.

खुर्जा की कई तरह की पॉटरी अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी समेत दुनिया के 42 से ज्यादा देशों में निर्यात की जाती हैं.

इसके अलावा भारत के परमाणु उपकेन्द्रों, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं इलेक्ट्रिकल के क्षेत्र में प्रयोग होने वाले सामान हाईटेंशन तथा लो टेंशन इंसुलेटर्स की मांग भी देश-विदेश में है. खुर्जा के चीनी मिट्टी बर्तनों में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल गुजरात, राजस्थान, बंगाल और बिहार जैसे राज्यों से आता है.

First published: 6 May 2016, 16:41 IST
 
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