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गुजरात: दलितों के इस प्रदर्शन में लंबे समय की कुंठा और निराशा छिपी है

सुधाकर सिंह | Updated on: 20 July 2016, 7:49 IST
QUICK PILL
  • गुजरात के उना में पिछले हफ्ते हिंदू शिव सेना कार्यकर्ताओं द्वारा दलितों को सार्वजनिक तौर पर पीटे जाने का मामला दो साल के आनंदीबेन के कार्यकाल की सबसे बड़ी चुनौती बनता नजर आ रहा है. 
  • दलितों ने इस घटना का जमकर विरोध किया है. सोमवार की रात को गुस्से में आकर लोगों ने सौराष्ट्र में राज्य परिवहन निगम की बसों को आग के हवाले कर दिया.
  • उना की घटना से गुस्साए सात दलित युवाओं ने दो अलग-अलग जगहों पर आत्महत्या करने की कोशिश की.
  • संसद में उना घटना की गूंज सुनाई दी. बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने राज्यसभा में उना घटनाक्रम को उठाया.

गुजरात के उना में पिछले हफ्ते हिंदू शिव सेना कार्यकर्ताओं द्वारा दलितों को सार्वजनिक तौर पर पीटे जाने का मामला दो साल के आनंदीबेन के कार्यकाल की सबसे बड़ी चुनौती बनता नजर आ रहा है. 

निचली जातियों के लोगों ने इस घटना का जमकर विरोध किया है. दलितों ने सोमवार की रात को गुस्से में आकर सौराष्ट्र में राज्य परिवहन निगम की बसों को आग के हवाले कर दिया. साथ ही घटना से गुस्साए सात दलित युवाओं ने दो अलग-अलग जगहों पर आत्महत्या करने की कोशिश की. गुजरात में हिंदू समूह की तरफ से दलितों को सार्वजनिक तौर पर पीटे जाने की घटना के बाद पूरे राज्य में प्रदर्शन हो रहे हैं.

करीब नौ दशक पहले मुंशी प्रेमचंद ने सदगति में एक नगर में दलितों के मृत अवशेषों को नहीं हटाने की चेतावनी का जिक्र किया था, जिसे वो गुरबत की मजबूरी में करने के लिए बाध्य होते हैं.

दलितों ने गुजरात में इस कहानी को एक तरह से सच कर दिखाया है. उन्होंने सौराष्ट्र के दो नगरों के सरकारी कार्यालयों में मृत गाय और जानवरों के अवशेषों फेंक दिया. अन्य नगरों में भी दलितों के विरोध प्रदर्शन की खबर आ रही है.

प्रदर्शनकारियों ने करीब 25 मृत जानवर विशेषकर मरी हुई गायों से भरी ट्रक को सुरेंद्रनगर के जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर खड़ा कर दिया है. उनका कहना है कि वह इस ट्रक को तब तक नहीं हटाएंगे जब तक कि अधिकारी दलितों को न्याय के बारे में आश्वासन नहीं देते हैं.

राजकोट के गोंडल नगर में सोमवार को पांच दलित युवाओं ने आत्महत्या करने की कोशिश की. गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने सरकार के राजस्व विभाग के कार्यालय में कई मृत जानवरों के अवशेषों को फेंक दिया. साथ ही दलितों ने सभी गांवों और शहरों से भविष्य में मृत जानवरों के अवशेषों को नहीं हटाने की चेतावनी दी है.  बारिश का समय करीब है और ऐसे में अगर उन्होंने मृत जानवरों के अवशेषों को वाकई में नहीं हटाया तो लोगों के स्वास्थ्य को खतरा पैदा हो जाएगा.

वहीं दूसरी तरफ दलितों ने राजकोट-पोरबंदर राजमार्ग को बंद कर दिया. उन्होंने इस दौरान गुजरात राज्य परिवहन निगम की दो बसों को आग के हवाले कर दिया. हालांकि इस दौरान दलितों ने मानवता की उदात्त भावना का परिचय देते हुए पहले यात्रियों को बस से उतरने के लिए कहा और फिर उन्होंने बस में आग लगाई. यही वजह है कि सौराष्ट्र इलाके में दलितों के आंदोलन में अभी तक किसी तरह के जान के नुकसान की खबर नहीं है.

गोंडल और जामकानदोरना नगर के राजस्व कार्यालय में दलितों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए मरे हुए जानवरों की हड्डिया बिखेर दीं. राजकोट के टेलीफोन एक्सचेंज में तोड़फोड़ की गई और धोराजी एवं जोतपुर में राज्य परिवहन निगम और पुलिस वाहन पर पथराव किया गया.

डॉ. आंबेडकर की तर्ज पर ही कुछ दलित नेताओं ने धर्म परिवतर्न किए जाने की चेतावनी दी है.

डॉ. आंबेडकर की तर्ज पर ही कुछ दलित नेताओं ने धर्म परिवतर्न किए जाने की चेतावनी दी है. मोरबी जिले के करीब 200 दलितों ने हिंदू उन्मादी समूहों से अपनी रक्षा के लिए हथियार के लिए आवेदन दिया है.

सोमवार को दलितों ने आंबेडकर की प्रतिमा के आगे विरोध प्रदर्शन किया. भीड़ में शामिल पांच युवकों ने फेनाइल पी ली. पुलिस ने तत्काल मामले में हस्तक्षेप किया और उन्हें अस्पताल लेकर गई.

उना की घटना का असर संसद में भी सुनवाई दिया. बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती ने इस मुद्दे को राज्यसभा में उठाया. फिलहाल गुजरात सरकार नुकसान की भरपाई करने में जुट गई है. मंत्रियों और बीजेपी के अन्य बड़े नेताओं से बातचीत करने के बाद गुजरात सरकार ने मामले को सीआईडी को सौंप दिया. सरकार ने मामले की स्पीडी ट्रायल के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाने का फैसला लिया है.

हालांकि यह देखना होगा कि स्पीडी ट्रायल के आश्वासन से दलितों का गुस्सा कितना शांत होता है. 

First published: 20 July 2016, 7:49 IST
 
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