Home » इंडिया » Busted: A child trafficking racket run by nursing homes & NGOs in Bengal
 

पश्चिम बंगाल: नर्सिंग होम, मेडिकल कॉलेज, एनजीओ और वकीलों के मकड़जाल वाला तस्करी रैकेट

सुलग्ना सेनगुप्ता | Updated on: 27 November 2016, 8:05 IST
(आर्या शर्मा/कैच न्यूज़)
QUICK PILL
  • पश्चिम बंगाल में नवजातों की ख़रीद-फ़रोख़्त करने वाले एक सनसनीख़ेज़ रैकेट का खुलासा हुआ है. इस रैकेट में सरकारी मेडिकल कॉलेज, निजी नर्सिंग होम, एनजीओ और वकील शामिल थे. 
  • पुलिस की छापेमारी में एक वृद्धा आश्रम के भीतर दो बच्चे बिस्कुट के डब्बे में मिले. अभी तक 13 बच्चों को रेस्क्यू किया गया है और 15 गिरफ़्तारियां हुई हैं. 

पश्चिम बंगाल पुलिस ने बच्चों की तस्करी का एक बड़ा रैकेट पकड़ा है. यह रैकेट डॉक्टरों, वकीलों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और कारोबारियों के आपसी गठजोड़ से चल रहा था. डॉक्टरों की मदद से नवजात अस्पतालों से गायब किए जाते थे, फ़िर बच्चों के नाम पर एनजीओ चलाने वाले कथित सामाजिक कार्यकर्ता उनकी बिक्री करते थे. कोलकाता सीआईडी इस रैकेट से जुड़े 15 मुलज़िमों को अभी तक गिरफ़्तार कर चुकी है. पुलिस की अलग-अलग टीमों की छापेमारी अभी भी जारी है. बड़े खुलासों के साथ कुछ नई गिरफ़्तारियां भी हो सकती हैं. 

इस रैकेट का केंद्र राजधानी कोलकाता के अलावा पश्चिम बंगाल के दो ज़िले साउथ 24 परगना और नॉर्थ 24 परगना हैं. सीआईडी ने साउथ 24 परगना के एक वृद्धा आश्रम 'पुरबाशा' में छापेमारी कर 10 नवजातों को छुड़ाया है. वहीं नॉर्थ 24 परगना के एक एनजीओ सुजित मेमोरियल ट्रस्ट के कैंपस से दो बच्चों की लाशें कब्र खोदकर निकाली गई हैं. तीन नवजातों के कंकाल और दो खोपड़ियां भी बरामद हुई हैं.

कई ज़िलों में नेटवर्क

अभी तक की तफ़्तीश के बाद सीआईडी ने यह आशंका ज़ाहिर की है कि रैकेट का नेटवर्क हुगली, नादिया, बर्धमान आदि ज़िलों तक फैला हो सकता है. अभी तक कुल 13 बच्चों रेस्क्यू किया जा चुका है. सभी बच्चे अस्पताल में भर्ती हैं और डॉक्टरों की निगरानी में हैं.  

नॉर्थ 24 परगना स्थित एनजीओ सुजित मेमोरियल 13 साल से संचालित है. हाल ही में पंचायत विभाग ने इसके लाइसेंस का नवीनीकरण किया है. हैरत इस बात की है कि लाइसेंस रिन्यू करने से पहले किसी अधिकारी ने एनजीओ के कैंपस में जाकर पड़ताल करने की कोशिश नहीं की. पंचायत समिति की सदस्य मौसमी चटर्जी कहती हैं, 'हम नहीं जानते कि इस एनजीओ के कैंपस में क्या चल रहा था. हमें बताया गया था कि वंचित समाज के बच्चों को यहां पढ़ाया जाता है.'

सीआईडी का दावा है कि इस रैकेट में पश्चिम बंगाल सरकार के मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टर और निजी नर्सिंग होम के संचालक शामिल हैं. मेडिकल कॉलेजों और नर्सिंग होम से नवजातों को उठाकर एनजीओ तक पहुंचाया जाता था. सीआईडी की आशंका है कि रैकेट का नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तक फैला हो सकता है. 

सीआईडी ने उत्तरी कोलकाता में चल रहे एक नर्सिंग होम के मालिक पार्थ चटर्जी को गिरफ़्तार किया है. इनके पास से 50,000 की विदेशी मुद्रा और सोने की जूलरी बरामद हुई है.  

साउथ 24 परगना स्थित वृद्धा आश्रम पुरबाशा से 10 बच्चों को रेस्क्यू किया गया है. इनकी उम्र एक से 10 महीने के बीच है. सीआईडी के एडीजी राजेश कुमार के मुताबिक सभी बच्चे आश्रम की इमारत के दूसरे तल पर मिले. अभी तक कम से कम 50 बच्चे इस एनजीओ की मार्फत बेचे जा चुके हैं. तफ़्तीश आगे बढ़ने के साथ यह आंकड़ा बढ़ सकता है. सीआईडी उन लोगों की भी तलाश कर रही है जो इन नवजातों को ख़रीदते थे. 

गिरफ़्तारियां

सीआईडी ने कुल 15 मुलज़िमों को गिरफ़्तार किया है जिनमें तीन महिलाएं भी हैं. तीनों महिलाएं कोलकाता के अलग-अलग इलाक़ों में नर्सिंग होम्स चलाती थीं. पारोमिता चटर्जी का नर्सिंग होम कॉलेज स्ट्रीट एरिया में चल रहा था जबकि परमाणिक और पुतुल बनर्जी इसे बेहाला से चला रहे थे. पूछताछ में इन्होंने रैकेट में शामिल होने का जुर्म कुबूल कर लिया है.  

इन महिलाओं से पहले आठ गिरफ़्तारियां हुई हैं. इनकी शिनाख़्त नजमा बीबी, उत्पला ब्यापारी, अमिरुल बिस्वास, नर्सिंग होम संचालक असदुर जमा, एनजीओ संचालक सत्यजीत सिन्हा, क्लिनिक संचालक बकबुल बैद्य और वकील प्रभात सरकार और उनके सहयोगी झंटु बिस्वास के रूप में हुई है. सीआईडी ने एक प्राइवेट नर्सिंग होम के डॉक्टर संतोष कुमार समंता (60) को भी गिरफ़्तार किया गया है. अफ़सरों ने इस कार्रवाई के बाद कहा, 'हमारे पास सुबूत हैं कि डॉक्टर संतोष इस रैकेट का हिस्सा हैं. उनसे पूछताछ में नए खुलासे हो सकते हैं.'

कोलकाता के कॉलेज स्ट्रीट स्थित श्री कृष्णा नर्सिंग की संचालक पार्थ चटर्जी तीन साल से इस रैकेट का हिस्सा थीं. सामाजिक कार्यकर्ता मारेफ़ा बीबी की गिरफ़्तारी मछलंदपुर से हुई. वह उत्पल ब्यापारी के साथ काम करती थीं. 21 नवंबर को सीआईडी ने बैद्य क्लिनिक और बदुरिया स्थित सोहोन नर्सिंग होम पर छापेमारी कर इनकी गिरफ़्तारी की थी. इस नर्सिंग होम से तीन नवजात बरामद किए गए जिनमें से दो को बिस्कुट के कार्टून में छिपाकर रखा गया था. सीआईडी का दावा है कि नर्सिंग होम और एनजीओ के आपसी गठजोड़ से यह तस्करी तीन साल से की जा रही थी. 

एनजीओ और नर्सिंग होम का गठजोड़

साउथ 24 परगना स्थित वृद्धा आश्रम पुरबाशा की संचालक रीना बनर्जी थीं जबकि इनके पिता पुतुल बनर्जी बहेला में नर्सिंग होम चलाते थे. डिलिवरी के लिए आने वाली महिलाओं को पुतुल कहते थे कि डिलिवरी होते ही बच्चे की मौत हो गई है, लेकिन बाद में वह नवजातों को बेच देते थे. 

पुलिस उन तीन महिलाओं की तलाश में छापेमारी कर रही है जो दुर्बाशा आश्रम के दूसरे तल पर नवजातों को रखती थीं. रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरन सभी नवजात बेहद गंदी हालत में मिले. सीआईडी इन तीनों महिलाओं की तलाश इसलिए भी कर रही है क्योंकि ये ही नर्सिंग होम के डॉक्टरों और एनजीओ संचालक के बीच की एक कड़ी के रूप में काम करती थीं. 

सीआईडी ने सोहन नर्सिंग होम, श्री कृष्णा नर्सिंग होम और साउथ व्यू नर्सिंग होम को सील कर दिया है. तीनों नर्सिंग होम एनजीओ को नवजात सप्लाई करते थे. 

First published: 27 November 2016, 8:05 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी