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उपचुनाव: बीजेपी बढ़ी, कांग्रेस पिछड़ी, टीएमसी, डीएमके अपनी सीटों पर काबिज़

चारू कार्तिकेय | Updated on: 23 November 2016, 7:50 IST
(आर्या शर्मा/कैच न्यूज़)
QUICK PILL
  • नोटबंदी पर जारी घमासान का असर उपचुनाव के नतीजों पर क्या हुआ है, अभी इस बारे में क़यास लगाना मुश्किल है.
  • हालांकि उपचुनाव के नतीजे भाजपा को गदगद और कांग्रेस को मायूस करने वाले ज़रूर हैं. कांग्रेस की ढलान लगातार जारी है.

तमाम राज्यों में हुए उपचुनाव के नतीजों से सिर्फ़ एक निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है. वह यह कि भाजपा ख़ुश है. नोटबंदी के बाद पहली बार हुए मतदान में 14 सीटें दांव पर थीं. सात राज्यों में चार संसदीय और 10 विधानसभा की सीटें थीं. इस चुनाव के नतीजों में ना सिर्फ़ भाजपा ने अपनी सभी चार सीटें जीतकर अपने पास रखी बल्कि कांग्रेस के हिस्से की भी एक सीट झटक ली. वहीं उत्तर पूर्व में भाजपा ने यह भी पाया कि उसकी पकड़ ज़मीन पर मज़बूत होती जा रही है.  

नतीजों में सबसे बड़ा घाटा कांग्रेस का हुआ है. तीन में से वह महज़ एक सीट बरक़रार रख पाई जबकि एक भाजपा ने झटक ली और दूसरी सीपीएम ने. वहीं डीएमके ने तमिलनाडु और तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में अपना दबदबा क़ायम रखा है. इन नतीजों से यह भी पता चलता है कि जो पार्टी जिस राज्य में शासन कर रही है, वहां उसकी पकड़ ढीली नहीं पड़ी है. 

उपचुनाव के नतीजों से संसद के सदस्यों में कोई फेरबदल नहीं होगा क्योंकि भाजपा और तृणमूल की झोली में दो-दो सीटें आई हैं. भाजपा ने जहां मध्यप्रदेश के शहडोल और पश्चिम बंगाल के लखीमपुर में जीत दर्ज की, वहीं तृणमूल ने राज्य की कूच बिहार और तमलुक सीट पर अपनी पताका फहराया.

जीत का लेखा-जोखा

आर्या शर्मा/कैच न्यूज़

अभी यह कहना बेहद मुश्किल है कि नोटबंदी की वजह से उपचुनाव के नतीजों पर कोई असर पड़ा है. वजह यह है कि आंकड़े जस के तस हैं और समीकरण बिल्कुल भी नहीं बदला. भाजपा के लिए कोई संदेश तभी हो सकता था, जब पार्टी अपनी मौजूदा सीटों से ज़्यादा पर जीत दर्ज करती या फिर हार जाती. मगर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ. 

बहरहाल, इन नतीजों का असर संसद में देखा जा सकता है जहां विपक्ष सरकार की घेराबंदी में जुटा है. इस विरोध की अगुवाई तृणमूल कांग्रेस कर रही है जिसका उपचुनाव के नतीजों से हौसला बढ़ा हुआ है.  

जहां तक विधानसभा की सीटों पर आए नतीजों का सवाल है तो यहां भाजपा के लिए जश्न मनाने का भरपूर मौक़ा है. भाजपा ने असम और अरुणाचल में कांग्रेस की दो सीटें झटक ली हैं. इन दोनों राज्यों में मिली जीत के बाद पार्टी उत्तर पूर्व में अपनी मौजूदगी बढ़ाएगी जिससे वह लंबे समय से वंचित है.

हालांकि इसके राजनीतिक और वैचारिक कारण भी हैं. बहरहाल, भाजपा इस जीत को लेकर किस कदर उत्साहित है, यह हिमंता बिसवा सरमा के ट्वीट से समझा जा सकता है. हिमंता उत्तर पूर्व में भाजपा के मुख्य रणनीतिकार हैं. 

कांग्रेस के लिए मन बहलाने की सिर्फ एक वजह पुडुचेरी में है जहां 'चुने गए' मुख्यमंत्री वी नारायणसामी ने नेल्लीथोपे असेंबली सीट पर जीत दर्ज की. सीपीएम भी थोड़ा बहुत अपने दिल को तसल्ली दे सकती है क्योंकि इसने अपने अंतिम दुर्ग त्रिपुरा में अपनी सीट बरक़रार रखी है. 

First published: 23 November 2016, 7:50 IST
 
चारू कार्तिकेय @CharuKeya

Assistant Editor at Catch, Charu enjoys covering politics and uncovering politicians. Of nine years in journalism, he spent six happily covering Parliament and parliamentarians at Lok Sabha TV and the other three as news anchor at Doordarshan News. A Royal Enfield enthusiast, he dreams of having enough time to roar away towards Ladakh, but for the moment the only miles he's covering are the 20-km stretch between home and work.

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