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14 साल पहले रेप करने वाले इस शख्स को मिली थी फांसी की सज़ा, ये था पूरा मामला

कैच ब्यूरो | Updated on: 21 April 2018, 15:54 IST

देश में नाबालिग बच्चियों के साथ बढ़ रहे रेप के मामलों को देखते हुए सरकार ने शनिवार को अहम फैसला लिया. सरकार ने नाबालिगों से रेप मामले में लगाए जाने वाले पोक्सो एक्ट में बदलाव कर दिया. अब नाबालिग बच्चियों से रेप के आरोपी को फांसी की सजा दी जाएगी. संशोधित कानून के तहत 12 साल से कम उम्र की बच्‍चियों के साथ दुष्‍कर्म मामले में दोषियों को मौत की सजा दी जाएगी. अब कानून में संशोधन के लिए सरकार अध्‍यादेश लाएगी.

रेप के मामलों में भले ही अब फांसी की सजा का प्रावधान होगा. लेकिन इससे पहले देश में आखिरी बार साल 2004 में रेप के मामले में एक शख्स को फांसी लगाई गई थी. इस शख्स का नाम था धनंजय चटर्जी. धनंजय चटर्जी पर हेतल पारेख नाम की एक छात्रा के साथ रेप और हत्या करने का आरोप था. धनंजय की फांसी का कई संगठनों ने विरोध भी किया था.

 

क्या था पूरा मामला

5मार्च 1990 में मध्य कलकत्ता (वर्तमान कोलकाता) के भवानीपुर के अपार्टमेंट में हेतल पारेख नाम की एक छात्रा की रेप के बाद हत्या कर दी गई. कई साल की कानूनी लड़ाई के बाद मामले के आरोपी धनंजय चटर्जी को अदालत ने दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुना दी. धनंजय चटर्जी के परिवार ने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी अपील की.

मगर उसकी फांसी की सजा को बरकरार रखा गया. उसके बाद आखिरी रास्ता था राष्ट्रपति से दया याचिका की अपील करने का. धनंजय ने राष्ट्रपति के सामने भी दया याचिका भेजकर फांसी को उम्रकैद में बदलने की गुहार लगाई. लेकिन राष्ट्रपति की ओर से भी उसे कोई राहत नहीं मिली.

उसके बाद धनंजय को कोलकाता के अलीपुर सेंट्रल जेल में 14 अगस्त, 2004 को धनंजय को फांसी के फंदे पर लटका दिया गया. धनंजय को फांसी के फंदे पर करीब आधे घंटे तक लटकाए रखा गया.

 

 

धनंजय के परिवार ने शव लेने से कर दिया था इंकार

कई मानवाधिका संगठनों ने धनंजय चटर्जी की फांसी का विरोध किया. कोलकाता की गलियों में मानवाधिकार कार्यकर्ताओंं ने मोमबत्ती जलाकर प्रदर्शन किया. धनंजय के परिजनों ने फाँसी का विरोध किया और इसी विरोध में उन्होंने धनंजय का शव लेने से इनकार कर दिया. बता दें कि एक मानवाधिकार संगठन ने कोर्ट में याचिका दायर की थी. जिसमें कहा गया था कि अब सभ्य समाजों से सजा--मौत खत्म हो गई है और भारत को भी इसे खत्म कर देना चाहिए.

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First published: 21 April 2018, 15:54 IST
 
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