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क्या स्मृति ईरानी के डिमोशन को यूपी चुनाव के चश्मे से देखना सही तरीका है?

निखिल कुमार वर्मा | Updated on: 6 July 2016, 14:45 IST

दो साल पहले जब लोकसभा चुनाव में मिली हार के बावजूद स्मृति ईरानी को सीधे कैबिनेट मंत्री का ओहदा दिया गया तब सभी आश्चर्यचकित थे. अब मंगलवार को मोदी कैबिनेट विस्तार में जब ईरानी को मानव संसाधन विकास मंत्री के पद से हटाया तब भी लोग चकित हुए.

स्मृति ईरानी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का करीबी माना जाता है. वो संघ की पृष्ठभूमि से नहीं रही हैं, लेकिन मॉडलिंग से अपना करियर शुरू करने वाली स्मृति का कद पिछले 12 सालों में भाजपा में बहुत तेजी से बढ़ा है.

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गुजरात से राज्यसभा सांसद स्मृति ईरानी को अब कपड़ा मंत्रालय का प्रभार दिया गया है. पिछले दो सालों से स्मृति और एचआरडी मंत्रालय का नाता कई विवादों से रहा है. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार स्मृति को उत्तर प्रदेश में बड़ी जिम्मेदारी देने के लिए उन्हें छोटा मंत्रालय दिया गया है. दूसरी ओर कुछ राजनीति जानकारों का मानना है कि स्मृति की वजह से नरेंद्र मोदी सरकार को अक्सर आलोचनाओं का सामना करना पड़ता था और इसी वजह से उनका डिमोशन हुआ है.

उत्तर प्रदेश चुनाव और स्मृति ईरानी

अगले साल उत्तर प्रदेश में विधानसभा होने वाला है. लोकसभा चुनाव 2014 में ईरानी ने गांधी परिवार के गढ़ अमेठी में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को चुनौती दी थी. चुनाव में उन्हें भले ही हार का सामना करना पड़ा, लेकिन स्मृति तीन लाख वोट पाकर दूसरे स्थान पर रही थीं. इस चुनाव में राहुल गांधी का जीत का अंतर कम हो गया और वे केवल एक लाख वोट से जीत पाए थे.

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इसके बाद से अक्सर राजनीतिक हलकों में स्मृति को उत्तर प्रदेश में बड़ी जिम्मेदारी देने की चर्चा होती रही है. लेकिन इस तर्क को मानना जरा मुश्किल होगा कि सिर्फ यूपी के लिए ईरानी का विभाग बदल दिया गया. यूपी चुनाव केवल आठ महीने बचे हैं. अगर उन्हें पार्टी कोई बड़ी जिम्मेदारी देने का मन बना चुकी है तब इतने थोड़े से समय के लिए उनका विभाग बदलने की कोई जरूरत नहीं थी. लिहाजा यह तर्क गले से नहीं उतरता कि उन्हें यूपी में बड़ी जिम्मेदारी देने के मकसद से मंत्रालय बदला गया है.

हाल में ही मुख्यमंत्री चुने गए सर्बानंद सोनोवाल को जब असम में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया था तब न तो उन्होंने इस्तीफा दिया था, न ही उनका विभाग बदला गया. सोनोवाल मुख्यमंत्री बनने तक केंद्र में खेल मंत्री रहे.

संघ-सरकार से मतभेद की खबरें

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक कुछ मुद्दों पर पीएमओ इंडिया और एचआरडी मंत्रालय के बीच लेकर मतभेद चल रहा था. पीएमओ और एचआरडी में आईआईएम बिल को लेकर भी मतभेद रहा. इस मामले में दो प्रोविजन ऐसे हैं जिनपर पीएमओ राजी नहीं है और स्मृति ईरानी भी नरम पड़ने को तैयार नहीं थीं.

कुछ मुद्दों को सुलझाने के लिए पीएम मोदी के प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा ने उच्च शिक्षा सचिव से मीटिंग भी की थी, पर कोई समाधान नहीं निकला.

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कुछ महीने पहले खबर आईं थी कि राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ईरानी के अब तक के बतौर मंत्री प्रदर्शन और उनके व्यक्तित्व से प्रभावित नहीं थे. संघ के एक ताकतवर गुट के अलावा बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी ईरानी से नाराज थे.

फेरबदल से पहले उन्हें संघ के नेताओं ने बुलाया था. ईरानी से शिक्षा में संघ के दृष्टिकोण के हिसाब से परिवर्तन करने पर उनकी राय पूछी गर्इ.  स्मृति ईरानी ने संघ मुख्यालय में पहुंचकर अपने काम के प्रति अपनी सफाई भी पेश कर दी थी, लेकिन संघ उनके जवाब से बहुत संतुष्ट नहीं था. संघ को लगातार लग रहा था कि ईरानी अपने काम को सही ढंग से अंजाम नहीं दे रही हैं.

विवादों से नाता

मंत्री पद संभालने के बाद ही स्मृति ईरानी से जुड़ा डिग्री विवाद शुरू हो गया. उन पर चुनाव के समय दाखिल शपथपत्र में अपनी डिग्री की गलत जानकारी देने का आरोप लगा. इसके अलावा दिल्ली विश्वविद्यालय के चार साल के डिग्री कोर्स को वापस तीन साल में बदलने को लेकर भी वो विवादों में रही. उन पर आरोप लगा कि यूजीसी के सहारे वे विश्वविद्यालयों और आईआईटी के पाठ्यक्रम में बदलाव करने की कोशिश कर रही हैं.

हैदराबाद विश्वविद्यालय में दलित पीएचडी छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या के मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री बंडारू दत्तात्रेय और उनकी भूमिका पर सवाल उठे. दत्तात्रेय ने रोहित समेत पांच लड़कों के खिलाफ ईरानी को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की थी. एचआरडी मंत्रालय ने हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के कुलपति को पत्र लिखकर इस मामले में अतिरिक्त सक्रियता दिखाई थी. इस मुद्दे पर स्मृति को संसद में भी बयान देना पड़ा था.

हाल ही में उनकी कांग्रेस की प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी और बिहार के शिक्षामंत्री अशोक चौधरी के साथ ट्विटर पर कहासुनी भी काफी चर्चा में रही.

First published: 6 July 2016, 14:45 IST
 
निखिल कुमार वर्मा @nikhilbhusan

निखिल बिहार के कटिहार जिले के रहने वाले हैं. राजनीति और खेल पत्रकारिता की गहरी समझ रखते हैं. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से हिंदी में ग्रेजुएट और आईआईएमसी दिल्ली से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा हैं. हिंदी पट्टी के जनआंदोलनों से भी जुड़े रहे हैं. मनमौजी और घुमक्कड़ स्वभाव के निखिल बेहतरीन खाना बनाने के भी शौकीन हैं.

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