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Statue Of Unity के लिए सरकारी कंपनियों के पैसै पर CAG ने उठाए ये सवाल

कैच ब्यूरो | Updated on: 1 November 2018, 10:37 IST

गुजरात में सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा (स्टेच्यू ऑफ यूनिटी) स्थापित करने के लिए सरकारी कंपनियों (पीएसयू) से मिली रकम पर नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने सवाल उठाया है. राजस्थान पत्रिका की खबर के मुताबिक सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पांच पीएसयू ने साल 2016-17 में अपने कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) बजट से इसके लिए 147 करोड़ रुपए दिए थे. जबकि मूर्ति के लिए फंड जारी करना सीएसआर(CSR) के तहत नहीं आता है. प्राइस डेटाबेस के मुताबिक भी दर्जनभर पीएसयू ने इस मूर्ति के लिए बीते पांच सालों में 293 करोड़ रुपए दिए हैं. यह आंकड़ा इससे भी अधिक हो सकता है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरदार पटेल की 143वीं जयंती पर उनकी एक प्रतिमा का अनावरण किया. स्टैच्यू और यूनिटी के नाम से बनी ये प्रतिमा तकरीबन 3 हजार करोड़ की लागत से बनाई गई है. इस प्रतिमा के निर्माण को लेकर नियंत्रक एवं महालकहा परीक्षक(कैग) ने सवाल उठाये हैं.


रिपोर्ट में सार्वजनिक कंपनियों(पीएसयू) के लगे पैसों पर सवाल उठाते हुए कहा है कि ये रकम इन कंपनियों के कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व यानी सीएसआर बजट से जारी की गई थी. जबकि इस मूर्ती के लिए फण्ड जारी करना सीएसआर के अंतर्गत नहीं आता.

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कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि पांच सार्वजानिक कंपनियों ने साल 2016-17 में इस प्रतिमा के लिए अपने सीएसआर से 147 करोड़ रुपये दिए थे. हालांकि प्राइम डेटाबेस की एक स्टडी से पता दर्जन भर सरकारी कंपनियों ने बीते पांच सालों में इस प्रतिमा के लिए तकरीबन 293 करोड़ रुपये दिए है.

कंपनियों के ब्योरे में इस राशि का स्पष्ट रूप से जिक्र न होने के कारण ऐसी भी एक संभावना बनती है कि वास्तविक दी गई राशि इससे कहीं अधिक हो. इस संभावना को किसी तरह से नकारा नहीं जा सकता. इस रिपोर्ट में ONGC, HPCL, BPCL, IOC और ऑयल इंडिया के नाम सामने आये थे जिन्होंने इस मूर्ती के लिए आर्थिक योगदान दिया. कैग की इस रिपोर्ट पर किसी भी कंपनी ने अभी तक सामने आकर अपना पक्ष नहीं पेश किया है.

First published: 1 November 2018, 10:37 IST
 
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