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राफेल डील : CAG की रिपोर्ट में सॉवरेन गारंटी को लेकर मोदी सरकार पर उठे कई गंभीर सवाल

कैच ब्यूरो | Updated on: 13 February 2019, 16:31 IST

नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) ने फ्रांस के साथ राफेल फाइटर जेट सौदे पर अपनी रिपोर्ट में फ्रांस सरकार द्वारा एक संप्रभु गारंटी (sovereign guarantee) के बजाय 'लेटर ऑफ कम्फर्ट' का जिक्र किया है. बुधवार को संसद में पेश की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि 2007 के यूपीए के सौदे में अग्रिम भुगतान के बदले 15 प्रतिशत बैंक गारंटी शामिल थी. चिंताओं पर प्रकाश डालते हुए कैग ने पाया कि समझौते के उल्लंघन के मामले में भारत को अब फ्रांसीसी विक्रेताओं के साथ मध्यस्थता के माध्यम से मामले को निपटाना होगा.

अगर मध्यस्थता का फैसला भारत और डसॉल्ट एविएशन के पक्ष में जाता है, भारत को सभी उपलब्ध कानूनी उपायों को समाप्त करना. इसके बाद ही फ्रांसीसी सरकार डसॉल्ट एविएशन की ओर से भुगतान करेगी. भारत ने पहली बार 36 राफेल लड़ाकू जेट विमानों की खरीद के लिए फ्रांस के साथ एक इंटर गवर्मेन्टल समझौते (IGA) पर हस्ताक्षर किए. इससे पहले भारत ने ऐसे समझौते अमेरिका, रूस और ब्रिटेन के साथ भी किये हैं.

36 राफेल के लिए आईजीए के मामले में 2007 में मैसर्स डीए (डसॉल्ट एविएशन) की पेशकश में अग्रिम भुगतानों के बदले 15 प्रतिशत बैंक गारंटी, प्रदर्शन गारंटी और वारंटी के लिए 5 प्रतिशत प्रत्येक बैंक गारंटी शामिल थी. लेकिन वर्तमान सरकार ने 2015 की डील में फ्रांसीसी विक्रेता ने कोई वित्तीय और प्रदर्शन बैंक गारंटी प्रस्तुत नहीं की थी. चूंकि, 60% अग्रिम भुगतान फ्रांसीसी विक्रेताओं को किया जाना था, कानून और न्याय मंत्रालय ने सलाह दी कि प्रस्तावित खरीद के मूल्य को देखते हुए एक सरकारी / संप्रभु गारंटी का अनुरोध किया जाना चाहिए.

हालांकि, फ्रांसीसी सरकार और डसॉल्ट एविएशन ने न तो बैंक गारंटी देने की सहमति दी और न ही सरकारी / सरकारी गारंटी की अनुमति दी. रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके बजाय बैंक गारंटी के बदले फ्रांसीसी प्रधानमंत्री द्वारा हस्ताक्षरित एक 'लेटर ऑफ कम्फर्ट' प्रदान किया गया. सितंबर 2016 में संप्रभु गारंटी और 'लेटर ऑफ कम्फर्ट' के मुद्दे को सीसीएस को विचार के लिए प्रस्तुत किया गया था.

क्या होती है सॉवरेन गारंटी

भारत फ्रांस की विमान निर्माता डिसॉल्ट एविएशन से 36 राफेल खरीद रहा है. ऐसे में फ्रांस की सरकार को एक गारंटी देनी होती है जिसे सॉवरेन गारंटी कहते हैं. अगर डिसॉल्ट एविएशन किसी दिवालिया होने या अन्य स्थिति में विमान देने में विफल रहता है तो इसकी गारंटी वहां की सरकार को लेनी होगी लेकिन राफेल के मामले में फ्रांस से भारत को सॉवरेन गारंटी के बजाय 'लेटर ऑफ़ कम्फर्ट' दिया गया है. यह लेटर कानूनी रूप से मजबूत नहीं माना जाता है. 

इससे पहले मोदी सरकार ने राज्यसभा में CAG रिपोर्ट पेश की. केंद्रीय मंत्री पी. राधाकृष्णन ने इसे पेश किया है. राज्यसभा में पेश CAG रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र की मोदी सरकार ने जो राफेल डील की है, वह पूर्व की यूपीए सरकार से सस्ती है. यह डील यूपीए सरकार से 2.86 फीसदी सस्ती है.

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First published: 13 February 2019, 16:11 IST
 
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