Home » इंडिया » Capt Amarinder Singh: one man who stands between Modi & Congress Mukt Bharat
 

कैप्टन अमरिंदर सिंह: मोदी और कांग्रेस मुक्त भारत के बीच खड़ा एक शख्स

आदित्य मेनन | Updated on: 14 March 2017, 8:50 IST

यदि कोई कांग्रेस का कोई नेता नरेंद्र मोदी के कांग्रेस मुक्त भारत के मिशन के आगे झुकने से इनकार कर सकता है, तो वह है कैप्टन अमरिंदर सिंह. 2014 के लोकसभा चुनावों में पटियाला के महाराजा ने ना केवल मोदी लहर का मुकाबला करने का साहस किया था, बल्कि मोदी के प्रमुख सहयोगी अरुण जेटली को शिकस्त भी दी थी. और वह भी सिख समुदाय की आध्यात्मिक राजधानी अमृतसर में.

अब उन्होंने पंजाब में कांग्रेस को करीब दो तिहाई बहुमत से जीत दिलाई है. अकाली-भाजपा के गठबंधन का बुरी तरह सफाया और आम आदमी पार्टी की उत्साहवर्धक चुनौतियों को फुस्स करते हुए. यह जीत कांग्रेस के लिए राष्ट्रीय महत्व की है क्योंकि यह पहला राज्य है, जो 2014 की हार के बाद उसने जीता है.

नेतृत्व का दम

हालांकि कांग्रेस को यह फायदा पंजाब में अकाली-विरोधी लहर की वजह से हुआ, पर अंतत: कैप्टन के नेतृत्व का कमाल ही था, जिसने पार्टी को बहुमत दिलाया. पंजाब में ड्रग्स, भ्रष्टाचार, ऋण और रोजगार जैसी अनेक समस्याएं हैं, जिनके लिए सद-भाजपा की सरकार जिम्मेदार है. कैंपेन के दौरान राजनीतिक सलाहकार प्रशांत किशोर और उनकी टीम ने बड़ी चतुराई से जनता को आश्वासन दिया कि पंजाब की इन समस्याओं का हल कैप्टन कर सकते हैं.

पंजाब के लिए अमरिंदर सिंह के पास एक ब्लूप्रिंट था. रोजगार देने का वादा ही शायद कांग्रेस की सफलता की सबसे बड़ी वजह रही. पंजाब में पुरानी राजनीति के प्रतिनिधि होने के बावजूद उन्होंने बदलाव के एजेंट के रूप में खुद को रिब्रांड किया. इसमें उनके दो फैसलों का महत्वपूर्ण योगदान रहा. पहला, वे एक परिवार एक टिकट की नीति पर दृढ रहे. नतीजतन पंजाब की परिवारवादी राजनीति को लेकर जो नाराजगी थी, वह अकाली के लिए ही बनी रही.

दूसरा, कई अन्य नेताओं को साथ लेकर चलने की उनकी काबिलियत और कांग्रेस के भीतर विद्रोह को रोकना. खुशकिस्मती से वो पंजाब कांग्रेस के वो नेता जो कैप्टन के लिए बराबर की शक्ति थे या चुनौती दे सकते थे, उन्हें आश्चर्यजनक हार मिली. राजिंदर कौर भट्टल लहरगागा में, सुनील जाखड़ अबोहर में और मोहिंदर केपी आदमपुर में चुनाव हार गए.

दूसरी ओर पार्टी में हाल ही में शामिल हुए नवजोत सिंह सिद्धू जैसे लोगों से कांग्रेस को बल मिला. पहले भाजपा और फिर आप के साथ लंबी बातचीत के बाद सिद्धू चुनावों से महज एक महीने पहले कांग्रेस में शामिल हुए थे. वे भीड़ को खींचने में सफल रहे और अमृतसर में पार्टी को जबर्दस्त जीत दिलाने का आश्वासन दिया था. प्रकाश सिंह बादल के भतीजे मनप्रीत बादल भी बटिंडा शहर से जीते और वे कांग्रेस की टीम के प्रमुख हिस्सा बन सकते हैं.

आप का खाता नहीं खुलने दिया

कांग्रेस को वापस जीत की राह पर लाने के अलावा, कैप्टन का पार्टी के लिए एक और अहम योगदान रहा. पंजाब में आप के बढ़ते हुए प्रभाव को वे रोकने में सफल रहे. पंजाब में जीतने से आप को गुजरात, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान जैसे अन्य राज्यों में कांग्रेस की जगह हथियाने का साहस मिल जाता. एक बार तो ऐसा लगा कि आप, अकाली-भाजपा और कांग्रेस को हाशिए पर करते हुए पंजाब पर कब्जा कर लेगी.

आप जिस आक्रामकता से अकाली नेताओं को निशाना बना रही थी, उससे लगा कि उसने लोगों का दिल जीत लिया है और कांग्रेस हार जाएगी. पर कैप्टन का लांबी में सीएम प्रकाश सिंह बादल के विरुद्ध खडे होने से कांग्रेस फिर से अकालियों के विकल्प के रूप में स्थापित हुई. हालांकि उन्हें सीट नहीं मिली, पर यह महत्वपूर्ण प्रतीकात्मक संदेश था.

आप की माझा और दोआब में संरचनात्मक कमजोरी से भी कांग्रेस को मदद मिली और आप का लगभग सफाया हुआ. आप के पास राज्य स्तर पर कोई सशक्त नेता नहीं था. यह भी उनकी हार की वजह बनी. कैप्टन ने आप की कमजोरी को समझा और उसका फायदा उठाया और पार्टी की तकदीर बदल दी. आप ने पिछले दो सालों से अकालियों के खिलाफ जबर्दस्त कैंपेन छेड़ रखा था, उसका भी कांग्रेस को फायदा  हुआ. इस कैंपेन ने पंजाब की राजनीति से अकालियों को जड़ से उखाड़ने में अहम भूमिका निभाई.

इस जीत से जाहिर है, कैप्टन पंजाब के दूसरी बार मुख्यमंत्री बनेंगे. पर आप उनके सामने मजबूत विपक्ष रहेगी.

First published: 14 March 2017, 8:50 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी