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कार-चलित IED से निपटना कश्मीर में सेना से लेकर सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती

कैच ब्यूरो | Updated on: 18 February 2019, 11:09 IST

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में बीते गुरुवार को हुए आतंकी हमले में दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले में सीआरपीएफ की बस पर एक आत्मघाती हमलावर ने विस्फोटकों से लदे अपने वाहन से टक्कर मार दी थी. इस हमले में 40 जवान शहीद हो गए थे. इस हमले के बाद सीआरपीएफ, सेना और जम्मू- कश्मीर पुलिस राज्य में वाहनों पर लगे IEDs की नई चुनौती से निपटने के लिए रास्ते खोज रहा है.

सीआरपीएफ के महानिदेशक आर आर भटनागर ने कहा है कि “हमने जम्मू -कश्मीर पुलिस, सेना और अन्य एजेंसियों के साथ नई चुनौती पर चर्चा की है. उन्होंने बताया कि हम खुद को सुरक्षित बनाए रखने के लिए हर संभव उपाय कर रहे हैं और हम वाहन-चालित आईईडी की नई चुनौती का प्रभावी ढंग से मुकाबला कर रहे हैं.

शुक्रवार को गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने घोषणा की कि सुरक्षा बलों के काफिले के दौरान राज्य में राजमार्गों और प्रमुख सड़कों पर नागरिक यातायात पर प्रतिबंध रहेगा. 1990 के दशक के अंत और 2000 के दशक के प्रारंभ में इस प्रथा का पालन किया गया था, लेकिन पिछले दशक में इस नियम में ढील दी गई थी.

भटनागर ने कहा कि इसे बेहतर तरीके से लागू करने के लिए एक मॉडल पर काम किया जा रहा है. उन्होंने कहा "हम (अन्य हितधारकों के साथ) बैठेंगे और समाधान ढूंढेंगे, ताकि लोगों को कम से कम असुविधा हो, जबकि काफिले की सुरक्षा भी बेहतर हो." काफिले की लंबाई और बख्तरबंद वाहनों की अनुपस्थिति के बारे में उठाए जा रहे सवालों पर भटनागर ने कहा कि हमले के प्रभाव ने इन दोनों को अप्रासंगिक बना दिया.

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, घाटी में बर्फबारी के दिन और एक बंद ने सीआरपीएफ को दो काफिले के साथ एक साथ वाहन चलाने के लिए मजबूर किया था, जिससे 2,547 सैनिक 78 वाहनों के साथ चल रहे थे. काफिले के केवल एक हिस्से को बख्तरबंद वाहन मिले, जबकि बाकी बसों में चल रहे थे.

First published: 18 February 2019, 10:59 IST
 
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