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संजीव चतुर्वेदी बन सकते हैं केजरीवाल के ओएसडी, कैट से मिली राहत

कैच ब्यूरो | Updated on: 17 December 2015, 13:44 IST
QUICK PILL

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के मुख्य सतर्कता अधिकारी (सीवीओ) पद से हटाए गए आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी के बारे में चर्चा है कि उन्हें जल्द ही दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अपना ओएसडी बना सकते हैं. 

केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) ने इस बाबत केंद्र सरकार को अगले वर्ष पांच जनवरी तक संजीव की नियुक्ति का वक्त दिया है. संजीव वर्तमान में एम्स के उप सचिव पद पर हैं.

कैट ने भारतीय वन सेवा के अधिकारी संजीव चतुर्वेदी की नियुक्ति प्रक्रिया को पूरा करने के लिए कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) और प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली मंत्रिमंडल समिति की नियुक्ति विभाग को निर्देश जारी कर दिए हैं.

मालूम हो कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इसी वर्ष 16 फरवरी को केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से संजीव को उनका ओएसडी बनाने की मांग रखी थी. मैग्सेसे अवॉर्ड विजेता संजीव अपने कार्यकाल के दौरान 2 सौ से ज्यादा घोटाले उजागर कर चुके हैं. इसी अवॉर्ड को पाने वाले केजरीवाल भी भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी मुहिम की तारीफ कर उन्हें अपने साथ जोड़ना चाहते हैं. 

संजीव ने अक्तूबर 2012 में अपना कैडर हरियाणा से बदलकर उत्तराखंड किए जाने की मांग रखी थी. हरियाणा में तैनाती के दौरान संजीव को 12 बार तबादले का सामना करना पड़ा था. 

घटनाक्रम

हरियाणा कैडर के आईएफएस अधिकारी संजीव (40) का जन्म 21 दिसंबर 1974 को हुआ था. मोतीलाल नेहरू रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज (मौजूदा एनआईटी) से उन्होंने वर्ष 1995 में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की. 

इसके बाद 2002 में वे आईएफएस में दूसरी रैंक प्राप्त करके प्रशासनिक सेवा से जुड़ गए. आईएफएस प्रशिक्षण के दौरान उन्हें सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षु का सम्मान भी मिला.

2009 में संजीव पर एक वन अधिकारी की मौत के मामले में भी आरोप लगा कि वे उस अधिकारी को प्रताड़ित करते थे. लेकिन बाद में उन्हें क्लीन चिट मिल गई. इसके बाद 2010 में उन्होंने केंद्र में प्रतिनियुक्ति की अर्जी दी. 

एम्स, दिल्ली में सीवीओ पद पर रहते हुए संजीव ने भ्रष्टाचार के तमाम मामले उजागर किए. यहां उनका स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और एम्स प्रशासन से टकराव लगातार बना रहा. तमाम घोटाले सामने लाने के बाद 2014 में उन्हें सीवीओ पद से हटा दिया गया.

इसके बाद से ही वे अपनी प्रतिनियुक्ति दिल्ली सरकार में करवाना चाहते थे. अब कैट के फैसले से शायद उनकी राह आसान हो जाएगी.
First published: 17 December 2015, 13:44 IST
 
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