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नौसेना: पत्नियों की अदला-बदली की जांच अब एसआईटी के हाथ

सुहास मुंशी | Updated on: 10 February 2017, 1:50 IST
QUICK PILL
  • नौसेना अफसर की पत्नी ने 2013 में आरोप लगाया कि उसे बीवियों की अदला-बदली में शामिल होने के लिए मजबूर किया गया. महिला ने कहा पति ने दूसरे अफसरों के संग शारीरिक संबंध बनाने को बाध्य किया.
  • गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि \'बीवियों की अदला-बदली\' मामले की जांच के लिए एसटीएफ का गठन किया जाए.

उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को केरल पुलिस को आदेश दिया कि वह नौसेना के एक अधिकारी की पत्नी द्वारा लगाये गए ‘‘पत्नियों की अदला-बदली’’ (वाइफ स्वैपिंग) के आरोपों की जांच करने के लिये एसटीएफ का गठन करे.

इस महिला ने वर्ष 2013 में एक प्राथमिकी दर्ज करवाकर अपने पति के अलावा नौसेना के चार अधिकारियों और उनमें से एक की पत्नी के खिलाफ ‘‘पत्नियों की अदला-बदली’’ के नाम पर यौन उत्पीड़न करने का मामला दर्ज करवाया था.

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याचिकाकर्ता ने उच्चतम न्यायालय के सामने इस मामले को दिल्ली, जहां वह फिलहाल रह रही है, स्थानांतरित करने की गुजारिश करने के अलावा इस ‘स्कैंडल’ की सीबीआई जांच की भी मांग की थी.

हालांकि मुख्य न्यायाधीश वाली सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने उनकी दोनों ही याचिकाओं को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि जिन तथ्यों और परिस्थितियों में इस अपराध को अंजाम दिए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं उनकी जांच स्थानीय पुलिस ही बेहतर तरीके से कर सकने में सक्षम है.

इसके अलावा न्यायालय ने निर्देश दिया है कि एसआईटी का मुखिया कम से कम डीआईजी स्तर का अधिकारी हो और साथ ही कोर्ट ने उम्मीद जताई है कि 2013 की इस प्राथमिकी की जांच अधिकतम तीन महीनों में निबट जाए.

2013 में एक नौसेना अफसर की पत्नी ने लगाया था 'बीवियों की अदला-बदली' में जबरन शामिल किए जाने का आरोप

महिला ने आरोप लगाया है कि ‘पत्नियों की अदला-बदली’ बलात्कार का ही दूसरा स्वरूप है और यह नौसेना में काफी प्रचलन में है. उसे कहा गया था कि अगर वह ‘सहयोग’ करेगी तो उसके पति को अच्छी नियुक्ति पाने में मदद मिलेगी. उन्होंने अपनी याचिका के समर्थन में जो तथ्य और सबूत पेश किये हैं वे नौसेना अधिकारियों की पत्नियों के व्यापक और संस्थागत शोषण की तरफ साफ इशारा करते हैं.

इनमें नौसेना की मार्कोस ईकाई द्वारा आयोजित होने वाली ‘वाइफ स्वैपिंग’ पार्टियों के लिये मिलने वाले औपचारिक निमंत्रण, नौसेना द्वारा आयोजित किये गए परामर्श सत्रों की रिकार्डिंग की नकल जिसमें काउंसलर यौन और मानसिक उत्पीड़न की पीड़िता को समझा रहा है कि ‘चाहे मामला जो भी हो’ उन्हें अपने पति का सम्मान करना चाहिये.

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इस याचिका में एक ऐसी आईआईटी स्नातक की कहानी है जिसे नौसेना के अधिकारी से प्रेम हो गया, इसके बाद वह ‘पार्टियों’ से रूबरू हुई, जिसे बाद में पति ने छोड़ दिया. इस दौरान उसका यौन उत्पीड़न किया, उसकी नीयत पर शक किया गया, इस बीच वह गर्भवती हुई और गर्भपात की यातना से भी गुजरी. एक समय ऐसा भी आया जब उसने आत्महत्या करने का फैसला भी कर लिया था.

दुर्भाग्य की शुरुआत


याचिका के अनुसार दुर्भाग्य ने अक्टूबर 2008 में महिला का दरवाजा खटखटाया. उसे एक नौसैनिक से प्यार हो गया जिसने उसे शादी का झांसा देकर उसका शारीरिक उत्पीड़न करना शुरू किया और फिर उसे छोड़ दिया. महिला इसकी शिकायत दर्ज करवाई.

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बीवियों की अदला-बदली के लिए हुए कथित पार्टी का निमंत्रण पत्र

अधिकारी के परिजनों द्वारा शिकायत वापस लेने की विनती करने और अधिकारी द्वारा प्रेम का इजहार करने के बाद उसने उस नौसैनिक के साथ मार्च 2012 में विवाह कर लिया. हालांकि जल्द ही उनके रिश्तों में बेरुखी दिखने लगी. पति ने बेशर्मी से महिला को ‘वाइफ स्वैपिंग’ पार्टियों का हिस्सा बनने को कहा जिसे उसने तुरंत ही ठुकरा दिया.

जनवरी 2013 में महिला ने अपने पति को एक दूसरे वरिष्ठ अधिकारी की पत्नी के साथ बिस्तर में रंगे हाथ पकड़ा. इसका विरोध करने पर उस महिला ने मारपीट की, उनका एक दांत तोड़ दिया और मुंह खोलने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी.

इस महिला ने नौसेना की दक्षिणी कमान के प्रमुख से इसकी शिकायत की लेकिन उन्हें वहां भी अपमान और पीड़ा ही झेलनी पड़ी. जब उन्होंने इस मामले में पुलिस से शिकायत करने का प्रयास किया तो उनके पति ओर उनके सहयोगियों ने पुलिस अधिकारी से कहा कि वह मानसिक रूप से विक्षिप्त हैं.

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हालांकि उन्हें सबसे बड़ा झटका फरवरी 2013 में लगा जब उनके पति ने उन्हें एक ऐसे में कमरे में ले जाकर बंद कर दिया जहां पहले से ही उनके तीन अन्य सहयोगी उनका इंतजार कर रहे थे.

उन्होंने अपनी याचिका में कहा, ‘‘इसके बाद मेरे पति ने कहा कि मुझे इनके साथ शारीरिक संबंध बनाने होंगे नही तो ये लोग मेरे साथ बलात्कार करेंगे. मेरे पति ने मुझे मेज से बांध दिया ताकि मैं हिलडुल न सकूं. उसके दोस्तों ने. मुझे बालों से पकड़ते हुए कहा कि अबनौसेना: पत्नियों की अदला-बदली की जांच अब एसआईटी के हाथ

उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को केरल पुलिस को आदेश दिया कि वह नौसेना के एक अधिकारी की पत्नी द्वारा लगाये गए ‘‘पत्नियों की अदला-बदली’’ (वाइफ स्वैपिंग) के आरोपों की जांच करने के लिये एसटीएफ का गठन करे.

इस महिला ने वर्ष 2013 में एक प्राथमिकी दर्ज करवाकर अपने पति के अलावा नौसेना के चार अधिकारियों और उनमें से एक की पत्नी के खिलाफ ‘‘पत्नियों की अदला-बदली’’ के नाम पर यौन उत्पीड़न करने का मामला दर्ज करवाया था.

याचिकाकर्ता ने उच्चतम न्यायालय के सामने इस मामले को दिल्ली, जहां वह फिलहाल रह रही है, स्थानांतरित करने की गुजारिश करने के अलावा इस ‘स्कैंडल’ की सीबीआई जांच की भी मांग की थी. हालांकि मुख्य न्यायाधीश वाली सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने उनकी दोनों ही याचिकाओं को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि जिन तथ्यों और परिस्थितियों में इस अपराध को अंजाम दिए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं उनकी जांच स्थानीय पुलिस ही बेहतर तरीके से कर सकने में सक्षम है.

इसके अलावा न्यायालय ने निर्देश दिया है कि एसआईटी का मुखिया कम से कम डीआईजी स्तर का अधिकारी हो और साथ ही कोर्ट ने उम्मीद जताई है कि 2013 की इस प्राथमिकी की जांच अधिकतम तीन महीनों में निबट जाए.

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महिला ने आरोप लगाया है कि ‘पत्नियों की अदला-बदली’ बलात्कार का ही दूसरा स्वरूप है और यह नौसेना में काफी प्रचलन में है. उसे कहा गया था कि अगर वह ‘सहयोग’ करेगी तो उसके पति को अच्छी नियुक्ति पाने में मदद मिलेगी. उन्होंने अपनी याचिका के समर्थन में जो तथ्य और सबूत पेश किये हैं वे नौसेना अधिकारियों की पत्नियों के व्यापक और संस्थागत शोषण की तरफ साफ इशारा करते हैं.

इनमें नौसेना की मार्कोस ईकाई द्वारा आयोजित होने वाली ‘वाइफ स्वैपिंग’ पार्टियों के लिये मिलने वाले औपचारिक निमंत्रण, नौसेना द्वारा आयोजित किये गए परामर्श सत्रों की रिकार्डिंग की नकल जिसमें काउंसलर यौन और मानसिक उत्पीड़न की पीड़िता को समझा रहा है कि ‘चाहे मामला जो भी हो’ उन्हें अपने पति का सम्मान करना चाहिये.

इस याचिका में एक ऐसी आईआईटी स्नातक की कहानी है जिसे नौसेना के अधिकारी से प्रेम हो गया, इसके बाद वह ‘पार्टियों’ से रूबरू हुई, जिसे बाद में पति ने छोड़ दिया. इस दौरान उसका यौन उत्पीड़न किया, उसकी नीयत पर शक किया गया, इस बीच वह गर्भवती हुई और गर्भपात की यातना से भी गुजरी. एक समय ऐसा भी आया जब उसने आत्महत्या करने का फैसला भी कर लिया था.

दुर्भाग्य की शुरुआत


याचिका के अनुसार दुर्भाग्य ने अक्टूबर 2008 में महिला का दरवाजा खटखटाया. उसे एक नौसैनिक से प्यार हो गया जिसने उसे शादी का झांसा देकर उसका शारीरिक उत्पीड़न करना शुरू किया और फिर उसे छोड़ दिया. महिला इसकी शिकायत दर्ज करवाई.

अधिकारी के परिजनों द्वारा शिकायत वापस लेने की विनती करने और अधिकारी द्वारा प्रेम का इजहार करने के बाद उसने उस नौसैनिक के साथ मार्च 2012 में विवाह कर लिया. हालांकि जल्द ही उनके रिश्तों में बेरुखी दिखने लगी. पति ने बेशर्मी से महिला को ‘वाइफ स्वैपिंग’ पार्टियों का हिस्सा बनने को कहा जिसे उसने तुरंत ही ठुकरा दिया.

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बीवियों की अदला-बदली के लिए हुई एक अन्य कथित पार्टी का निमंत्रण पत्र

जनवरी 2013 में महिला ने अपने पति को एक दूसरे वरिष्ठ अधिकारी की पत्नी के साथ बिस्तर में रंगे हाथ पकड़ा. इसका विरोध करने पर उस महिला ने मारपीट की, उनका एक दांत तोड़ दिया और मुंह खोलने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी.

इस महिला ने नौसेना की दक्षिणी कमान के प्रमुख से इसकी शिकायत की लेकिन उन्हें वहां भी अपमान और पीड़ा ही झेलनी पड़ी. जब उन्होंने इस मामले में पुलिस से शिकायत करने का प्रयास किया तो उनके पति ओर उनके सहयोगियों ने पुलिस अधिकारी से कहा कि वह मानसिक रूप से विक्षिप्त हैं.

हालांकि उन्हें सबसे बड़ा झटका फरवरी 2013 में लगा जब उनके पति ने उन्हें एक ऐसे में कमरे में ले जाकर बंद कर दिया जहां पहले से ही उनके तीन अन्य सहयोगी उनका इंतजार कर रहे थे.

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उन्होंने अपनी याचिका में कहा, ‘‘इसके बाद मेरे पति ने कहा कि मुझे इनके साथ शारीरिक संबंध बनाने होंगे नही तो ये लोग मेरे साथ बलात्कार करेंगे. मेरे पति ने मुझे मेज से बांध दिया ताकि मैं हिलडुल न सकूं. उसके दोस्तों ने. मुझे बालों से पकड़ते हुए कहा कि अब मैं सही मायनों में कुतिया लग रही हूं. मैं बिल्कुल असहाय होकर अपने पति से रहम की भीख मांग रही थी. उनकी वासना की संतुष्टि के बाद मेरे पति ने मुझे जानवरों की तरह बेरहमी से मारना शुरू कर दिया.’’

इसके बाद इस अभागी महिला ने ‘आश्रय के लिये’ हिसार में अपने ससुराल का रुख किया. मेरे ससुर ने मुझे वेश्या कहते हुए गालियां देनी शुरू कर दी कि मुझे कहीं जाकर मर जाना चाहिये ताकि वे अपने बेटे की शादी अपनी पसंद की लड़की से कर सकें. मेरे साथ गाली गलौज और मारपीट करने के बाद मेरे सास-ससुर ने मुझे रात के 12 बजे घर से बाहर निकाल दिया.

मानसिक व्यथा


उनके पति, दोस्तों, सहयोगियों और माता-पिता ने उनकी ‘मानसिक स्थिति’ को लेकर इतने सवाल उठाए कि उन्होंने अपने लिये मानसिक फिटनेस प्रमाणपत्र भी लिया जिसकी प्रतिलिपि उन्होंने याचिका के साथ संलग्न की है.

अपने चारों तरफ मौजूद हर किसी के द्वारा अस्वीकार करने के बाद वे अपनी याचिका में सवाल उठाती हैं, ‘‘अगर यही नौसेना की संस्कृति है तो क्यों नहीं मुझे शादी से पहले इसके बारे में बताया गया? महिलाओं को ‘वाइफ स्वैपिंग’ के बारे में जानकारी देने वाली एक वेबसाइट क्यों नहीं तैयार करवा दी जाती है ताकि उन्हें विवाह से पहले ही ऐसी पार्टियों के बारे में जानकारी मिल जाए और हम नौसेना के अधिकारी से शादी करने जैसा गलत कदम न उठाएं.’’

नौसेना ने उनके आरोपों को ‘वैवाहिक विवाद’ कहते हुए सिरे से खारिज कर दिया. आरोपियों ने पीडिता द्वारा लगाए गए आरोपों को न केवल ‘घरेलू मुद्दों’ की परिणति साबित करने का प्रयास किया बल्कि उन्हें झूठी शिकयतें दर्ज करने का भी आरोपी बताया.

इसके बवजूद नौसेना की दक्षिणी कमान के वरिष्ठ अधिकारियों ने महिला और उसके पति की काउंसलिंग कर मामले को ‘सुलझाने’ का प्रयास किया. याचिका के अनुसार कोच्चि नौसेना बेस के स्नेहा फैमली काउंसलिंग सेंटर के काउंसलर ने महिला को समझाया कि ‘जाहे जो भी  हो’ यह महिला का कर्तव्य है कि उसे अपने पति और उसके हर मित्र का सम्मान करना चाहिये. इसके अलावा उसने अपने रिर्पोट में यह भी लिखा कि, ‘‘पीड़िता को विशेष काउंसलिंग के अलावा एक विशेषज्ञ मनोचिकित्सक के इलाज की आवश्यकता है.’’

ऐसा नहीं है कि यह महिला ऐसी पहली याचिकाकर्ता है जिसने सेवारत नौसेना अधिकारियों के यौन शोषण की शिकायत की है. अभी कुछ दिन पहले ही नौसेना के करवर कैंप पर तैनात एक लेफ्टिनेंट कमांडर की पत्नी ने भी अपने पति पर अपने सहयोगियों के साथ ‘यौन संबंध बनाने और जबरन शराब पिलाने’ के आरोप लगाए थे. उसने दावा किया था कि उसके पति ने शिकायत करने पर उसकी नग्न तस्वीरों को ऑनलाइन करने की धमकी भी दी थी.

नौसेना अफसर की बीवी ने आरोप लगाया कि दूसरे अफसरों से संबंध बनाने को किया मजबूर

छोनों ही पीड़िताओं ने साफ किया है कि नौसेना में अधिकारियों की पत्नियों की अदला-बदली संस्थागत रूप ले चुका है लेकिन प्रतिशोध का डर और किसी का समर्थन न मिलने की मजबूरी में वे अपना मुंह बंद रखने को मजबूर हैं. अब इस मामले की सच्चाई को सामने लाने की जिम्मेदारी केरल पुलिस पर है. मैं सही मायनों में कुतिया लग रही हूं. मैं बिल्कुल असहाय होकर अपने पति से रहम की भीख मांग रही थी. उनकी वासना की संतुष्टि के बाद मेरे पति ने मुझे जानवरों की तरह बेरहमी से मारना शुरू कर दिया.’’

इसके बाद इस अभागी महिला ने ‘आश्रय के लिये’ हिसार में अपने ससुराल का रुख किया. मेरे ससुर ने मुझे वेश्या कहते हुए गालियां देनी शुरू कर दी कि मुझे कहीं जाकर मर जाना चाहिये ताकि वे अपने बेटे की शादी अपनी पसंद की लड़की से कर सकें. मेरे साथ गाली गलौज और मारपीट करने के बाद मेरे सास-ससुर ने मुझे रात के 12 बजे घर से बाहर निकाल दिया.

मानसिक व्यथा


उनके पति, दोस्तों, सहयोगियों और माता-पिता ने उनकी ‘मानसिक स्थिति’ को लेकर इतने सवाल उठाए कि उन्होंने अपने लिये मानसिक फिटनेस प्रमाणपत्र भी लिया जिसकी प्रतिलिपि उन्होंने याचिका के साथ संलग्न की है.

अपने चारों तरफ मौजूद हर किसी के द्वारा अस्वीकार करने के बाद वे अपनी याचिका में सवाल उठाती हैं, ‘‘अगर यही नौसेना की संस्कृति है तो क्यों नहीं मुझे शादी से पहले इसके बारे में बताया गया? महिलाओं को ‘वाइफ स्वैपिंग’ के बारे में जानकारी देने वाली एक वेबसाइट क्यों नहीं तैयार करवा दी जाती है ताकि उन्हें विवाह से पहले ही ऐसी पार्टियों के बारे में जानकारी मिल जाए और हम नौसेना के अधिकारी से शादी करने जैसा गलत कदम न उठाएं.’’

नौसेना ने उनके आरोपों को ‘वैवाहिक विवाद’ कहते हुए सिरे से खारिज कर दिया. आरोपियों ने पीडिता द्वारा लगाए गए आरोपों को न केवल ‘घरेलू मुद्दों’ की परिणति साबित करने का प्रयास किया बल्कि उन्हें झूठी शिकयतें दर्ज करने का भी आरोपी बताया.

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इसके बवजूद नौसेना की दक्षिणी कमान के वरिष्ठ अधिकारियों ने महिला और उसके पति की काउंसलिंग कर मामले को ‘सुलझाने’ का प्रयास किया. याचिका के अनुसार कोच्चि नौसेना बेस के स्नेहा फैमली काउंसलिंग सेंटर के काउंसलर ने महिला को समझाया कि ‘जाहे जो भी  हो’ यह महिला का कर्तव्य है कि उसे अपने पति और उसके हर मित्र का सम्मान करना चाहिये. इसके अलावा उसने अपने रिर्पोट में यह भी लिखा कि, ‘‘पीड़िता को विशेष काउंसलिंग के अलावा एक विशेषज्ञ मनोचिकित्सक के इलाज की आवश्यकता है.’’

ऐसा नहीं है कि यह महिला ऐसी पहली याचिकाकर्ता है जिसने सेवारत नौसेना अधिकारियों के यौन शोषण की शिकायत की है. अभी कुछ दिन पहले ही नौसेना के करवर कैंप पर तैनात एक लेफ्टिनेंट कमांडर की पत्नी ने भी अपने पति पर अपने सहयोगियों के साथ ‘यौन संबंध बनाने और जबरन शराब पिलाने’ के आरोप लगाए थे. उसने दावा किया था कि उसके पति ने शिकायत करने पर उसकी नग्न तस्वीरों को ऑनलाइन करने की धमकी भी दी थी.

छोनों ही पीड़िताओं ने साफ किया है कि नौसेना में अधिकारियों की पत्नियों की अदला-बदली संस्थागत रूप ले चुका है लेकिन प्रतिशोध का डर और किसी का समर्थन न मिलने की मजबूरी में वे अपना मुंह बंद रखने को मजबूर हैं. अब इस मामले की सच्चाई को सामने लाने की जिम्मेदारी केरल पुलिस पर है.

First published: 14 May 2016, 8:02 IST
 
सुहास मुंशी @suhasmunshi

प्रिंसिपल कॉरेसपॉडेंट, कैच न्यूज़. पत्रकारिता में आने से पहले इंजीनियर के रूप में कम्प्यूटर कोड लिखा करते थे. शुरुआत साल 2010 में मिंट में इंटर्न के रूप में की. उसके बाद मिंट, हिंदुस्तान टाइम्स, टाइम्स ऑफ़ इंडिया और मेल टुडे में बाइलाइन मिली.

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