Home » इंडिया » Catch Hindi interveiw with Sanjiv Chaturvedi who uncovered AIIMS corruption
 

एम्स में भ्रष्टाचार पर संजीव चतुर्वेदी और स्वास्थ्यमंत्री आमने-सामने

निखिल कुमार वर्मा | Updated on: 14 December 2015, 13:54 IST
QUICK PILL
  • हाल ही में मैगसेसे पुरस्कार जीतने वाले एम्स के पूर्व चीफ विजिलेंस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी का स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और एम्स प्रशासन के साथ टकराव सतह पर आ गया है.
  • संजीव का आरोप है कि जब से नड्डा स्वास्थ्य मंत्री बने हैं तब से उन्हें परेशान किया जा रहा है. हाल ही में उन्होंने इस आशय से जुड़ा एक शपथपत्र भी दिल्ली हाईकोर्ट में दिया है.

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के पूर्व मुख्य सतर्कता अधिकारी और वर्तमान में उप सचिव के पद पर तैनात आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी और एम्स प्रशासन के बीच टकराव गहराता जा रहा है. हाईकोर्ट में चल रहे भ्रष्टाचार के कुछ मामलों के कारण संजीव चतुर्वेदी और स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा आमने-सामने आ खड़े हुए हैं.

पिछले हफ्ते संजीव द्वारा हाईकोर्ट को दिए गए एक हलफनामें में नड्डा के ऊपर भ्रष्टाचार के आरोपियों को बचाने और उनके खिलाफ चल रही सीबीआई जांच को दबाने का आरोप लगाया है.

इसी हफ्ते संजीव चतुर्वेदी उस समय चर्चा में आ गए थे जब उन्होंने एम्स प्रशासन के खिलाफ आरोप लगाया था कि उन्हें मैगसेसे अवार्ड से मिली राशि को एम्स के फंड में जमा नहीं करने दिया गया. संजीव के मुताबिक मजबूरन उन्होंने यह राशि (करीब 20 लाख रुपए) प्रधानमंत्री राहतकोश में जमा करवा दी. इसके लिए उन्होंने एक बार फिर से स्वास्थ्य मंत्री को कटघरे में खड़ा किया.

एम्स प्रशासन और स्वास्थ्य मंत्री से संजीव का टकराव करीब डेढ़ साल पुराना हो गया है. अगस्त 2014 में उन्हें एम्स के मुख्य सतर्कता अधिकारी (सीवीओ) के पद से हटा दिया गया था. एक गैर सरकारी संगठन सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (सीपीआईएल) इस मामले को लेकर हाईकोर्ट चला गया था.

इसमें मांग की गई थी कि स्वास्थ्य मंत्री को एम्स के भ्रष्टाचार के मामलों में कोई कार्रवाई करने से रोका जाय. इसी मामले में संजीव ने गुरुवार को कोर्ट की नोटिस के बाद अपना हलफनामा दायर किया है.

स्वास्थ्य मंत्री नड्डा और संजीव चतुर्वेदी के बीच शुरू हुए टकराव की कहानी बड़ी दिलचस्प है. 2012 में एम्स में तैनात हुए संजीव चतुर्वेदी ने आने के कुछ दिन बाद ही भ्रष्टाचार के एक मामले में हिमाचल कैडर के एक आईएएस अधिकारी और एम्स के उपनिदेशक (प्रशासनिक) विनीत चौधरी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश कर दी.

गौरतलब है कि नड्डा भी हिमाचल प्रदेश से आते हैं और वहीं से राज्यसभा सांसद भी हैं

मई 2014 में केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद हर्षवर्धन स्वास्थ्य मंत्री बने. संजीव ने विनीत चौधरी के खिलाफ जिस जांच की संस्तुति की थी उस पर 14 अगस्त 2014को हर्षवर्धन ने जांच के आदेश जारी कर दिए. इसके बाद कथित तौर पर नड्डा ने स्वास्थ्यमंत्री को पत्र लिखकर उनसे विनीत चौधरी के खिलाफ चल रही जांच रोकने की मांग की.

बाद में यह पत्र आरटीआई के माध्यम से सामने आया जो अब कोर्ट के पास है. विनीत चौधरी के खिलाफ जांच अभी भी लटकी हुई है जबकि नड्डा खुद स्वास्थ्यमंत्री हैं. अगस्त 2014 में संजीव को मुख्य सतर्कता अधिकारी के पद से हटा दिया गया.

नड्डा और विनीत चौधरी के बीच भी एक रिश्ता है. 2002 में जब नड्डा हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री थे तब विनीत चौधरी नड्डा के सचिव हुआ करते थे

दिल्ली के मौजूदा मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उस समय इसे बड़ा मुद्दा बनाया था. उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके आरोप लगाया था कि नड्डा के कहने पर ही उन्हें हटाया गया है. साथ ही उन्होंने नड्डा की वह चिट्ठी भी मीडिया के सामने रखी थी जिसे नड्डा ने हर्षवर्धन को लिखा था. केजरीवाल ने उस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि विनीत चौधरी का नड्डा से नजदीकी संबंध है.


हालांकि इस मुद्दे पर स्वास्थ्यमंत्री नड्डा का कोई बयान नहीं आया है. जुलाई 2015 में विवाद को बढ़ता देख उन्होंने इस मामले की समीक्षा करने का वादा किया था. इस संबंध में कैच ने भी जेपी नड्डा का पक्ष जानने की कोशिश की लेकिन न तो उनके मेल का जवाब मिला न ही उन्होंने फोन या एसएमएस का जवाब दिया.

बहरहाल संजीव के सीवीसी पद से हटाने के छह महीने के अंदर ही स्थितियां बदल गई. मोदी सरकार के पहले फेरबदल में हर्षवर्धन को स्वाथ्य मंत्री पद से हटा दिया गया और जेपी नड्डा नए स्वास्थ्यमंत्री बने. अब तक संजीव और नड्डा के बीच जो टकराव परोक्ष रूप से चल रहा था अब वो आमने-सामने आ गए थे.

संजीव का आरोप है कि तब से लगातार उनका उत्पीड़न हो रहा है.

एम्स में आने से पहले 2002 बैच के इंडियन फॉरेस्ट सर्विस के अधिकारी संजीव हरियाणा में नियुक्त थे. वहां अपने छोटे से कार्यकाल में उन्होंने भ्रष्टाचार के कई मामले उजागर किए. इस दौरान उनका रिकॉर्ड 12 बार तबादला हुआ और उनके ऊपर पांच केस भी दर्ज हुए.

हरियाणा की तत्कालीन हुड्डा सरकार से उनका टकराव इतना बढ़ गया है कि 2010 में उन्होंने केंद्र में प्रति नियुक्ति की अर्जी दी. इसके करीब दो साल बाद 2012 में उन्हें एम्स के डिप्टी डायरेक्टर का पद सौंपा गया.

जैसा की ऊपर बताया जा चुका है कि यहां भी उन्होंने एक तरह से अभियान छेड़कर भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई शुरू की. एम्स में सीवीओ पद पर उनका कार्यकाल जून 2016 तक था. एम्स मे उनसे सीवीसी का पद छीन लेने के बाद अरविंद केजरीवाल ने उन्हें दिल्ली सरकार की प्रतिनियुक्ति पर लेने की मंशा जतायी. खुद संजीव भी दिल्ली सरकार में प्रतिनियुक्ति पर जाना चाहते हैं. फिलहाल यह मामला अप्वाइंटमेंट कमेटी ऑफ कैबिनेट (एसीसी) के पास लंबित है.

एम्स बड़े पैमाने पर फैले जिस भ्रष्टाचार का आरोप संजीव लगा रहे हैं उसकी ताकीद हाल ही में स्वास्थ्य मामलों की स्थायी संसदीय समिति ने भी की हैै

सतीश चंद्र मिश्रा की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने हाल ही में अपनी एक रिपोर्ट में स्वास्थ्य मंत्रालय की आलोचना करते हुए कहा है कि एम्स में फैले भ्रष्टाचार से लड़ने में सरकार नाकाम रही है.

और यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एम्स में कोई स्थाई विजिलेंस ऑफिसर तैनात नहीं है. समिति ने अपनी रिपोर्ट में एम्स में एक नियमित मुख्य सतर्कता अधिकारी की जरूरत पर बल दिया है. जाहिर है उसका इशारा संजीव की तरफ था.

(यह रिपोर्ट 14/12/2015 को संपादित की गई है)

First published: 14 December 2015, 13:54 IST
 
निखिल कुमार वर्मा @nikhilbhusan

निखिल बिहार के कटिहार जिले के रहने वाले हैं. राजनीति और खेल पत्रकारिता की गहरी समझ रखते हैं. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से हिंदी में ग्रेजुएट और आईआईएमसी दिल्ली से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा हैं. हिंदी पट्टी के जनआंदोलनों से भी जुड़े रहे हैं. मनमौजी और घुमक्कड़ स्वभाव के निखिल बेहतरीन खाना बनाने के भी शौकीन हैं.

पिछली कहानी
अगली कहानी