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पशु बिक्री पर बैन: क्या मोदी सरकार का फ़ैसला उल्टा पड़ गया है?

कैच ब्यूरो | Updated on: 30 May 2017, 12:55 IST
प्रतीकात्मक तस्वीर

बूचड़खाने में पशुओं की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का नरेंद्र मोदी सरकार का फ़ैसला लगता है उसी पर उल्टा पड़ गया है. कुछ राज्य सीधे तौर पर इसके विरोध में उठ खड़े हुए हैं. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन इस मामले में सबसे आगे हैं.

सोमवार रात तक ऐसे संकेत मिल रहे थे कि सरकार इस मसले पर एक क़दम पीछे हटते हुए इन पशुओं की सूची में से भैंस का नाम हटा सकती है. अगर ऐसा हो जाता है तो यह एक तरह से उन राज्यों की आंशिक जीत होगी, जो इसके विरोध में केंद्र सरकार के खिलाफ खड़े हैं.

 

राज्य बनाम केंद्र

ममता बनर्जी ने सोमवार को एक संवाददाता सम्मेलन बुलाकर केंद्र सरकार की खूब आलोचना की. उन्होंने सरकार के इस क़दम को असंवैधानिक बताते हुए कहा, "केंद्र-राज्य सरकारों के अधिकारों के हनन की कोशिश कर रहा है."

उन्होंने कहा, "सरकार का यह निर्णय किसानों के लिए घातक है. अब तो ऐसे हालात हैं कि अगर कोई किसान अपनी गाय-भैंस को एक जगह से दूसरी जगह भी लेकर जा रहा है तो कोई भी उसकी हत्या कर देगा."

ममता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, "पश्चिम बंगाल सरकार इस मामले में प्रदेश के महाधिवक्ता की राय लेगी और सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ में अपील करेगी." साथ ही ममता ने कहा, "केंद्र सरकार राज्य सरकारों के अधिकारों को हथियाने की कोशिश कर रही है. यह पूरी तरह अनैतिक और अलोकतांत्रिक है."

ममता बनर्जी के मुताबिक, "केंद्र का यह क़दम संविधान के अनुच्छेद 246 के ख़िलाफ़ है, जो राज्य सरकारों को अधिकार देता है कि वह संविधान की 7वीं अनुसूची में निहित किसी भी मसले को विधायिका में हल कर सकती है. केंद्र सरकार संविधान के अनुच्छेद 246 के तहत अपने ही कानून का उल्लंघन कर रही है, जिसके अनुसार किसी भी राज्य सरकार को अधिकार है कि वह संविधान की अनुसूची 7 में निहित किसी भी विषय पर राज्य विधानसभा में कानून बना सकती है."

 

ममता बनर्जी/ फ़ाइल फोटो

दूसरी ओर इस मसले पर केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ सबसे पहले आवाज़ उठाने वाले केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने विरोध को आगे बढ़ाते हुए इस मसले पर अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखा है.

उन्होंने लिखा, "केंद्र सरकार ऐसा केंद्रीय कानून बनाकर राज्य विधानसभाओं के अधिकरों का हनन करना चाहती है और कुछ नहीं. इस अधिनियम के तहत जो विषय लिए गए हैं, वे संविधान की राज्य सूची में 15वीं और 18वीं प्रविष्टि से संबद्ध हैं. राज्य विधानसभाओं के अधिकार क्षेत्र में बिना इजाज़त इस तरह की दखल-अंदाज़ी संघवाद की भावना के ख़िलाफ़ है, जो कि संविधान के मूल मंत्रों में से एक है."

केरल के सीएम विजयन ने कहा, "वे एक व्यक्ति के अपनी इच्छा का खाना खाने के मूल अधिकार का भी उल्लंघन कर रहे हैं." उन्होंने मुख्यमंत्रियों का आह्वान किया कि वे एकजुट होकर केंद्र सरकार के गैर संघीय, अलोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्षता विरोधी कदम का विरोध करें, वरना देश के संघीय और धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने का ख़ात्मा तय है.

 

केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन/ फ़ाइल फोटो

विजयन और ममता बनर्जी की बात में दम है. राज्य की सूची में 15 वां बिन्दु पशुओं के संरक्षण, रक्षण और उनमें होने वाली बीमारियों की रोकथाम, पशु प्रशिक्षण और अभ्यास से संबंधित है. लगता है पशु क्रूरता के नाम पर यह कानून बनाकर सरकार सीधे-सीधे संविधान का उल्लंघन कर रही है. केरल और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में सरकार का यह कदम काफी सोचा-समझा माना जा रहा है.

विरोध करने वाले राज्यों में अगला नाम तेलंगाना का है. तेलंगाना के कृषि मंत्री तालासानी श्रीनिवास यादव ने केंद्र के इस कदम को कट्टरतापूर्ण बताते हुए कहा कि केंद्र का यह निर्णय राज्य के 85 लाख छोटे और मंझले किसानों के लिए घातक सिद्ध होगा. उन्होंने कहा, "किसान अपने बूढ़े, अनुपयोगी पशुधन का क्या इस्तेमाल करेगा?"

First published: 30 May 2017, 10:21 IST
 
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