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कावेरी पर कर्नाटक ने फिर खड़े किए हाथ, सुप्रीम कोर्ट से कहा- पानी नहीं है, बदला जाए आदेश

कैच ब्यूरो | Updated on: 26 September 2016, 13:31 IST
(फाइल फोटो)

कावेरी जल विवाद को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु आमने-सामने हैं. नदी के पानी के बंटवारे को लेकर संवैधानिक संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है, क्योंकि कर्नाटक ने कहा है कि वो सुप्रीम कोर्ट का आदेश मानने को तैयार नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक को 21 से 27 सितंबर तक तमिलनाडु के लिए रोजाना 6,000 क्यूसेक पानी छोड़ने का आदेश दिया था. लेकिन कर्नाटक सरकार ने पानी देने पर हाथ खड़े करते हुए सुप्रीम कोर्ट से इस फैसले में बदलाव करने की गुजारिश की है.

कर्नाटक सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा कि उसके जलाशयों में पर्याप्त पानी नहीं है इसलिए वह अदालत के आदेश के मुताबिक तमिलनाडु को पानी छोड़ने में असमर्थ है.

सीएम ने भी बताया था असंभव

कावेरी जल विवाद पर तीन दिन पहले कर्नाटक विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया था. इस दौरान एक प्रस्ताव पारित करते हुए कहा गया कि पानी का उपयोग सिर्फ पेयजल की जरूरतों के लिए होगा और इसे किसी दूसरे मकसद के लिए नहीं दिया जाएगा.

सदन में कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने अपने जवाब में कहा था, "यह असंभव परिस्थि‍ति पैदा हो गई है, जहां अदालती आदेश का पालन संभव नहीं है."

सुप्रीम कोर्ट ने एक हफ्ते पहले ही कर्नाटक को 27 सितंबर तक रोजाना 6 हजार क्यूसेक पानी छोड़ने का आदेश दिया था. कावेरी निरीक्षण कमेटी ने पहले तीन हजार क्यूसेक पानी छोड़ने का आदेश जारी किया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ाकर दोगुना कर दिया. 

कावेरी प्रबंधन बोर्ड के गठन का आदेश

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस दीपक मिश्र और जस्टिस उदय उमेश ललित की पीठ ने केंद्र सरकार को चार हफ्ते के अंदर कावेरी प्रबंधन बोर्ड का गठन करने और इसके गठित हो जाने की अधिसूचना के साथ अदालत को जानकारी देने का निर्देश दिया था.

कर्नाटक में इसी महीने कावेरी जल विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद बड़े पैमाने पर हिंसक प्रदर्शन हुए थे. इस दौरान सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया. वहीं राजधानी बेंगलुरु में प्रदर्शनकारियों पर काबू पाने के लिए बल प्रयोग के दौरान दो लोगों की मौत हो गई थी.

First published: 26 September 2016, 13:31 IST
 
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