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कावेरी विवादः 7 से 17 तक कर्नाटक को देना होगा हर दिन 2000 क्यूसेक पानी

रामकृष्ण उपध्या | Updated on: 6 October 2016, 6:56 IST
(आर्या शर्मा/कैच न्यूज़)
QUICK PILL
  • पूर्व मुख्यमंत्रियों, भाजपा के जगदीश शेट्टर एवं जेडीएस के एचडी कुमारस्वामी समेत अन्य नेताओं ने ‘राज्य के व्यापक हित’ में सरकार के प्रस्ताव का समर्थन किया है. अब सभी की निगाहें 18 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं जब कावेरी नदी जल प्रबंधन बोर्ड का मुद्दा नई पीठ के सामने आएगा.

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कर्नाटक को 7 से 17 अक्टूबर तक कावेरी नदी का 2000 क्यूसेक्स पानी प्रतिदिन तमिलनाडु को देने का आदेश दिया है. कर्नाटक ने इस विवाद में पड़ोसी के साथ शांति के लिए अदालत में अपील की थी. हालांकि आदेशों की लगातार अवहेलना से शीर्ष अदालत के कोप का शिकार बना कर्नाटक सख्त सजा से बच गया क्योंकि सोमवार को हुई अपनी बैठक में राज्य विधानसभा ने सिद्धरमैया सरकार को ‘सिंचाई कार्यों के लिए कुछ पानी’ छोड़ने का अधिकार दे दिया था.

कृष्णराजा सागर, काबिनि और हेमावती जलाशयों के दरवाजे तो सोमवार रात को ही खोल दिए गए थे और उनसे 6000 क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़ा जा रहा था ताकि मंगलवार को जब अदालत की कार्रवाई शुरू हो, तब उसे ज्यादा कड़ी सजा न मिले.

जब कर्नाटक के वरिष्ठ अधिवक्ता फाली नरीमन ने राज्य की मुश्किलों का हवाला देते हुए अगले 10 दिन तक 1500 क्यूसेक्स पानी छोड़ने की पेशकश की तो न्यायाधीश दीपक मिश्रा और न्यायाधीश उदय ललित की बेंच ने इसे संशोधित करके 2000 क्यूसेक्स कर दिया और मामले की सुनवाई 18 अक्टूबर तक के लिए टाल दी.

अदालत ने केन्द्रीय जल आयोग के सदस्य सैयद मसूद हुसैन को कावेरी सुपरवाइजरी कमेटी का चेयरमैन भी मनोनीत किया है और उनसे सिंचाई विशेषज्ञों की टीम के साथ दोनों राज्यों में नदी क्षेत्र का दौरा कर, अगली सुनवाई के समय जमीनी हकीकत की रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश करने को कहा है.

एचडी देवेगौड़ा ने निभाई कारगर भूमिका

कर्नाटक के लिए यह काफी राहत की बात थी क्योंकि अदालत ने कानून की सर्वोच्चता की रक्षा और अपने आदेशों की पालना सुनश्चित करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 144 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों के उपयोग की चेतावनी दी थी.

इससे पहले, सरकार को पानी केवल  पेयजल उद्देश्यों के लिए बचा कर रखने के लिए बाध्य करने के बाद तीनों प्रमुख राजनीतिक दलों भाजपा, जेडी (एस)  व कांग्रेस ने राजनीतिक बुद्धिमत्ता का परिचय दिया और अपने रवैये में नरमी लाते हुए सिद्धरमैया सरकार का साथ देने का फैसला किया.

पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौडा ने इसमें मुख्य भूमिका निभाई. वे मुख्यमंत्री को लगातार सलाह देते रहे और कर्नाटक के प्रति केन्द्र के अन्यायपूर्ण रवैये के खिलाफ 12 घंटे के अनशन पर बैठ गए. गौडा ने अपना अनशन तभी समाप्त किया जब केन्द्रीय मंत्रियों अनन्त कुमार व सदानन्द गौडा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से बात करने के बाद उनका यह आश्वासन उन तक पहुंचाया कि केन्द्र इस मामले में दखल करेगा.

मोदी सरकार ने दिया दखल

करीब एक महीने तक इस मुद्दे पर चुप्पी साधे रखने के बाद मोदी ने कारगर ढंग से दखल दिया. तीस सितम्बर की सुनवाई के दिन एटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट पीठ के चार दिन में कावेरी जल प्रबंधन बोर्ड के गठन से सहमति जताई थी जबकि कर्नाटक ने इसका पूरी कड़ाई से विरोध किया था क्योंकि यह मामला पहले से तीन सदस्यों की बेंच के सामने था.

चार अक्टूबर को रोहतगी पूरी तरह यू-टर्न कर गए. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि एनडीए सरकार को कावेरी नदी जल प्रबंधन बोर्ड के गठन का आदेश देकर उसने संसद के क्षेत्राधिकार का अतिक्रमण किया है. उन्होंने अदालत से अपना आदेश वापस लेने का  भी आग्रह किया. उन्होंने स्वीकार किया कि पीठ की मांग से सहमति जताकर उन्होंने ‘गलती’ की थी.

उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 262 किसी ट्राइब्यूनल के अंतिम अवार्ड पर आधारित जल बंटवारा स्कीम बनाने का काम संसदीय कानून को सौंपता है.  कावेरी नदी जल प्रबंधन बोर्ड की स्थापना का आदेश देकर अदालत ने अंतर्राज्य नदी जल विवाद कानून के तहत केन्द्र को मिले अधिकार उससे छीन लिए हैं. उन्होंने कहा कि एसे मामलों में अंतिम अधिकार संसद का होता है.

जल संसाधन मंत्रालय ने भी अदालत को सूचित किया कि कावेरी नदी जल प्रबंधन बोर्ड के गठन के बाद भी इसे 80,000 वर्ग किलोमीटर नदी क्षेत्र का दौरा करने और जमीनी हकीकत की वास्तविक तस्वीर का पता लगाने में कम से कम एक महीने का समय लग जाएगा.

ऐसी भागा-दौड़ी के बजाय मंत्रालय ने सुझाव दिया कि कर्नाटक के चार जलाशयों हेमावती, हरांगी, केआरएस व काबिनि तथा तमिलनाडु के मेट्टूर, भवानीसागर और अमरावती बांधों का निरीक्षण करने के लिए उच्चाधिकार प्राप्त तकनीकी समिति भेजी जाए.

बोर्ड का रुख़ बदला

कावेरी नदी जल प्रबंधन बोर्ड के गठन को लेकर केन्द्र के रुख में अचानक आए बदलाव और कावेरी नदी क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों में रुक-रुक कर हुई वर्षा से कर्नाटक को अपने रवैये में संशोधन करने में मदद मिली है. उसे डर था कि कावेरी नदी जल प्रबंधन बोर्ड के गठन से वह जलाशयों पर अपने नियंत्रण से वंचित हो जाएगा.

सिद्धरमैया ने विधानसभा के विशेष सत्र में कहा कि राज्य के  सभी जलाशयों में 23 सितंबर को जो पानी 27.24  टीएमसीफीट था, उसका स्तर बढ़ कर अब 34.13 टीएमसीफीट हो गया है और राज्य अब सिंचाई के लिए भी कुछ पानी छोड़ सकता है.

सिद्धरमैया ने कहा कि इस साल वर्षा में 48 प्रतिशत की कमी के कारण हम अपने किसानों के लिए पिछले माह भी पानी नहीं छोड़ सके हैं. उन्होंने कहा कि कुल 18.85 लाख एकड़ कृषि भूमि में से 6.15 लाख एकड़ में बुवाई हो सकी है किन्तु हेमावती नदी बेसिन में करीब 2 लाख एकड़ में बोई गई  धान की फसल पानी की कमी के कारण सूख रही है.

इंसानों और जानवरों के लिए पानी बचाए रखना था ज़रूरी

मुख्यमंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की अवहेलना करने की उनकी कोई मंशा नहीं थी लेकिन अगले जून तक मनुष्यों व पशुओं के उपभोग के लिए 24 टीएमसीफीट पानी बचा कर रखना जरूरी था. उन्होंने कहा कि वर्ष 2012 में मंजूर की गई राष्ट्रीय जल नीति में जीवन के अधिकार के साथ ही पेयजल को भी मौलिक अधिकार माना गया है. इसलिए बंगलुरू, मैसूर व अन्य शहरों के डेढ़ करोड़ लोगों को पेयजल उपलब्ध कराना मेरी संवैधानिक जिम्मेदारी है, नहीं तो मैं अपना कर्तव्य पूरा करने में विफल माना जाऊंगा.

पूर्व मुख्यमंत्रियों, भाजपा के जगदीश शेट्टर एवं जेडीएस के एचडी कुमारस्वामी समेत अन्य ने ‘राज्य के व्यापक हित’ में सरकार के प्रस्ताव का समर्थन किया है. अतीत में हालांकि विपक्ष कांग्रेस सरकार के साथ कई मुद्दों पर झगड़ता रहा है, लेकिन कावेरी विवाद ने इन सबको एक सुर में बोलने के लिए इकट्ठा कर दिया है.

विधान परिषद में विपक्ष के नेता भाजपा के केएस ईश्वरप्पा ने हालांकि फली नरीमन को कर्नाटक के वकील के पद से हटाने की जोरदार मांग की और सत्तारूढ़ पार्टी में भी यह जिम्मेदारी कपिल सिब्बल या मनु सिंघवी को सौंपने की चर्चा उठी  लेकिन सिद्धरमैया ने फिलहाल नरीमन के साथ ही बने रहने का निश्चय किया है.

अब सभी की निगाहें 18 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं जब कावेरी नदी जल प्रबंधन बोर्ड का मुद्दा नई पीठ के सामने आएगा.

First published: 6 October 2016, 6:56 IST
 
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