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मोइन कुरैशी: एक मांस कारोबारी जिसने CBI के तीन-तीन डायरेक्टर्स की छीन ली कुर्सी

कैच ब्यूरो | Updated on: 25 October 2018, 12:41 IST

CBI डायरेक्टर आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के बीच विवाद के बाद दोनों को छुट्टी पर भेज दिया गया. आपको जानकर आश्चर्य होगा कि इस विवाद का मुख्य मास्टरमाइंड एक मीट कारोबारी है. आप यह जानकर चौंक जाएंगे कि इसी मीट कारोबारी ने इससे पहले दो और सीबीआई डायरेक्टरों की कुर्सी लील ली थी.

इस मीट कारोबारी का नाम है मोइन कुरैशी. इसने पिछले चार साल से सीबीआई के चार अफसरों की नींद हराम कर दी है. मोइन कुरैशी दो अन्य सीबीआई चीफ एपी सिंह और रंजीत सिन्हा के डाउनफॉल के लिए भी जिम्मेदार है.

जानिए कौन है मोइन कुरैशी

पूरा नाम मोइन अख्तर कुरैशी. उत्तर प्रदेश के कानपुर से ताल्लुक रखने वाले कुरैशी ने साल 1993 में रामपुर में एक छोटा सा बूचड़खाना खोला. जल्द ही वह देश का सबसे बड़ा मांस कारोबारी बन बैठा. मांस का इतना बड़ा व्यापारी कि अकूत पैसा कमाया और पिछले 25 सालों में उसने निर्माण और फैशन समेत कई सेक्टरों में 25 से ज्यादा कंपनियां खड़ी कर लीं.

उसने अपनी पढ़ाई प्रतिष्ठित दून स्कूल और सेंट स्टीफेंस से की थी. कुरैशी के खिलाफ कर चोरी, मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार में शामिल होने के कई आरोप लगे और जांच हुई. साथ-साथ उसने हवाला के जरिए बड़ा लेनदेन किया. उस पर सीबीआई अफसरों, राजनेताओं समेत कई अधिकारियों को रिश्वत देने के आरोप लगे.

हालांकि कुरैशी दिल्ली में सालों से सक्रिय था, लेकिन उसका नाम तब सुर्खियों में आया जब साल 2014 में आयकर विभाग ने उनके छतरपुर निवास, रामपुर और दूसरी प्रॉपर्टीज़ पर छापे मारे. इन जगहों पर उन्हें न सिर्फ करोड़ों रुपये कैश मिले बल्कि कुरैशी और दूसरे अहम लोगों की बातचीत के टेप भी हासिल हुए. यह मीट-निर्यात और कथित हवाला ऑपरेटर कुरैशी ने स्वयं ही रिकॉर्ड किए थे.

साल 2014 में सामने आया था कि 15 महीने में कुरैशी कम से कम 70 बार तत्कालीन सीबीआई चीफ रंजीत सिन्हा के घर पर गया था. साल 2017 में प्रवर्तन निदेशालय ने मोइन क़ुरैशी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की तो उसमें सीबीआई के पूर्व डायरेक्टर ए पी सिंह का नाम भी शामिल था.

बता दें कि तब सुप्रीम कोर्ट ने सिन्हा को आरोपी या संदिग्ध के साथ मीटिंग करने को लेकर कड़ी फटकार लगाई थी. इसके बाद वह सीबीआई के रेडार पर आ गए. रंजीत सिन्हा पर आरोप लगे तो सीबीआई में सुधार और उसके कामकाज में ज्यादा सावधानी की बात होने लगी. सिन्हा 2012 से 2014 तक एजेंसी के चीफ रहे हालांकि वह लगातार सभी आरोपों से इनकार करते रहे. 

 

रंजीत सिन्हा के बाद एपी सिंह भी आए घेरे में

साल 2014 में ही पता चला कि कुरैशी और एक अन्य सीबीआई डायरेक्टर एपी सिंह के बीच मेसेज का आदान-प्रदान हुआ है. सिंह 2010 से 2012 तक एजेंसी के चीफ रहे थे. आयकर विभाग और ED ने मामले की जांच की और पिछले साल फरवरी में सीबीआई ने भी सिंह के खिलाफ केस दर्ज किया, जिससे कुरैशी के साथ उनके संबंधों की जांच हो सके. यहां तक कि आरोपों के चलते सिंह को संघ लोक सेवा आयोग में सदस्यता की अपनी पोस्ट छोड़नी पड़ी. एपी सिंह भी लगातार आरोपों से इनकार करते रहे. वह भी यह कहते रहे कि सीबीआई ने अब तक उनसे संपर्क नहीं किया है.

आलोक वर्मा और अस्थाना तक आंच

सीबीआई चीफ आलोक वर्मा और नंबर टू स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना में जो रस्साकशी जारी थी और मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है वो भी मोइन कुरैशी से जुड़ा है. आलोक वर्मा और अस्थाना के बीच मौजूदा विवाद में हैदराबाद के बिजनसमैन सतीश बाबू सना का नाम भी सामने आया है. सना ने पिछले साल ED को कथित तौर पर बताया था कि उसने सिन्हा के जरिए एक सीबीआई केस में फंसे अपने दोस्त को जमानत दिलाने के लिए 1 करोड़ रुपये कुरैशी को दिए थे.

 

साल 2014 के चुनावी सभा में नरेंद्र मोदी ने लिया था कुरैशी का नाम

साल 2014 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने एक चुनावी सभा में '10 जनपथ के एक करीबी नेता', इस मीट-निर्यातक कंपनी और हवाला को जोड़ दिया. अकबरपुर की उसी चुनावी सभा में नरेंद्र मोदी ने कहा था, "टीवी चैनल ने कहा कि केंद्र सरकार के चार मंत्री इस मीट एक्सपोर्ट करने वाली कंपनी के साथ जुड़े हुए थे इस हवाला कांड के कारोबार में."

फिलहाल, मोदी सरकार ने सीबीआई मुखिया आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना दोनों को छुट्टी पर भेज दिया है. सरकार ने सीबीआई में मचे हंगामे के बीच एम नागेश्वर को सीबीआई का नया अंतरिम निदेशक बनाया है. आलोक वर्मा सरकार के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चले गए हैं.

First published: 25 October 2018, 12:10 IST
 
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