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CBI विवाद: सरकार ने जिन्हें बनाया अंतरिम निदेशक उनके खिलाफ भी शुरू होने वाली थी जांच?

कैच ब्यूरो | Updated on: 24 October 2018, 18:58 IST

मंगलवार रात सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना को छुट्टी पर भेज दिया गया है. इसके साथ ही नागेश्वर राव को CBI का अंतरिम डायरेक्टर बनाया गया है. एम नागेश्वर राव सीबीआई में ही ज्वाइंट डायरेक्टर के पद पर हैं. एक सरकारी आदेश में कहा गया कि प्रधानमंत्री की अगुवाई वाली नियुक्ति समिति ने मंगलवार की रात संयुक्त निदेशक एम नागेश्वर राव को तत्काल प्रभाव से सीबीआई निदेशक के पद का प्रभार दिया.

नागेश्वर राव के अंतरिम डायरेक्टर बनते ही उनके नाम पर भी विवाद सामने आने लगा है. सीबीआई  विवाद की लपटें संगठन के अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव तक भी आ पहुंची हैं. द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम के मुखिया एम.के स्टालिन ने कहा कि राव के खिलाफ आलोक वर्मा ने कई शिकायतें भेजी थीं. वह उन पर लगे आरोपों को लेकर जांच-पड़ताल भी शुरू कराने वाले थे.

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स्टालिन ने पूछा कि  क्या यह कदम राफेल घोटाले से जुड़ी जांच को छिपाने के लिए उठाया गया. यह दर्शाता है कि हमारे देश में अघोषित आपात्काल थोपा गया है. राव जैसे विवादित अफसर की नियुक्ति कुछ नहीं बल्कि सिर्फ यह सुनिश्चित करने के लिए की गई है, ताकि सीबीआई को बीजेपी सरकार का तोता बनाकर पिंजड़े में रखा जाए.

बता दें कि सीबीआई में मचे घमासान के बीच मोदी सरकार ने सीबीआई मुखिया आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना दोनों को छुट्टी पर भेज दिया है. जिसे लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर हमला बोला है. राहुल गांधी ने कहा कि कल रात चौकीदार ने सीबीआई डायरेक्टर को हटा दिया क्योंकि सीबीआई राफेल सौदे पर सवाल उठा रही थी.

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वहीं इस घमासान पर केंद्र सरकार ने अपना बचाव किया है. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि केन्द्र सरकार का दायित्व सिर्फ सुपरवीजन का है. अरुण जेटली ने कहा कि सीबीआई में जो भी हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण है. आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना को छुट्टी पर भेजे जाने के फैसले की आलोचना के जवाब में जेटली ने कहा कि सीवीसी की सिफारिश के आधार पर ही उन्हें छुट्टी पर भेजा गया है. सीवीसी के पास मामले की जांच करने का अधिकार है और उसके पास सारे कागजात हैं.

First published: 24 October 2018, 18:55 IST
 
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