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राकेश अस्थाना की जांच कर रहे CBI अफसर ने मांगी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति

कैच ब्यूरो | Updated on: 26 September 2019, 10:10 IST

CBI के पूर्व विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार मामले में जांच अधिकारी (IO) ने सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति मांगी है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार 19 अगस्त को लिखे गए एक पत्र में पुलिस अधीक्षक (CBI) सतीश डागर ने 1 दिसंबर, 2019 से केंद्रीय सिविल सेवा पेंशन नियम 1972 के नियम 48 के तहत स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए अनुरोध किया है. नियम के तहत स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए अधिकारियों को तीन महीने का न्यूनतम नोटिस पीरियड पूरा करना होगा. रिपोर्ट के अनुसार डागर ने इस सवाल पर कोई जवाब नहीं दिया कि उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति क्यों मांगी है.

31 मई को दिल्ली उच्च न्यायालय ने सीबीआई को अस्थाना मामले में अपनी जांच पूरी करने के लिए चार महीने की अनुमति दी. रिपोर्ट के अनुसार सीबीआई के प्रवक्ता ने डागर के अनुरोध की स्थिति के बारे में कोई टिप्पणी नहीं की लेकिन पुष्टि की कि अधिकारी ने व्यक्तिगत आधार पर वीआरएस के लिए आवेदन किया है." अक्टूबर 2018 में अस्थाना और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार के मामले में डागर जांच अधिकारी बने रहेंगे, यह स्पष्ट नहीं है.

 

हैदराबाद के व्यवसायी सतीश बाबू सना की शिकायत पर अस्थाना और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी. आरोप लगाया था कि उन्होंने मीट निर्यातक मोइन कुरैशी और अन्य के खिलाफ सीबीआई द्वारा दर्ज एक मामले में राहत पाने के लिए अस्थाना और अन्य को रिश्वत दी थी.

तत्कालीन सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और उनके डिप्टी अस्थाना ने एक दूसरे पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा थे. दोनों को अक्टूबर 2018 में सरकार द्वारा जबरन छुट्टी पर भेज दिया गया. 10 जनवरी 2019 को वर्मा को सीबीआई निदेशक के पद से हटा दिया गया और एक हफ्ते बाद अस्थाना को नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो में स्थानांतरित कर दिया गया.

डागर को पिछले साल 24 अक्टूबर को अस्थाना के खिलाफ एम नागेश्वर राव के खिलाफ आरोपों की जांच टीम का नेता बनाया गया था, जिन्होंने वर्मा को छुट्टी पर भेजे जाने के बाद सीबीआई निदेशक के रूप में कार्यभार संभाला था.

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First published: 26 September 2019, 9:35 IST
 
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