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CBI के नए दफ्तर में है भूत का साया ! उद्घाटन के बाद तीन अधिकारियों की जा चुकी है कुर्सी

कैच ब्यूरो | Updated on: 14 January 2019, 12:20 IST

देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी CBI में इन दिनों भूचाल आया हुआ है. सीबीआई के दो बड़े अधिकारियों की लड़ाई से देश के राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मची हुई थी. वहीं अब एक बार फिर आलोक वर्मा को सीबीआई चीफ के पद से हटा दिया गया है. इसके बाद ही सीबीआई अधिकारियों में कानाफूसी चलने लगी है कि सीबीआई के नए दफ्तर में वास्तु दोष है. कुछ अधिकारियों का तो दबी जुबान में यहां तक कहना है कि नए दफ्तर में भूत का साया है.

दरअसल, सीबीआई के दिल्ली के लोधी रोड स्थित नए दफ्तर का उद्घाटन 2011 में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने किया था. साल 2011 के बाद से अब तक तीन सीबीआई निदेशक जांच के घेरे में आ चुके हैं. इनमें एपी सिंह (2010-12), रंजीत सिन्हा (2012-14) और आलोक वर्मा (2017-19) का नाम शामिल हैं. केवल अनिल सिन्हा (2014-2016) ही इससे अछूते रहे.

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सीबीआई के तीन निदेशकों के जांच के घेरे में आने के अन्य अधिकारियों का भविष्य क्या होगा, इसे लेकर भी अधिकारियों में अनिश्चितता का डर बना हुआ है. बता दें कि पूर्व सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के भ्रष्टाचार के आरोप-प्रत्यारोप का मामला आने के बाद से सीबीआई सुर्खियों में बना हुआ है.

केंद्र की मोदी सरकार ने इन दोनों को पिछले साल 23-24 अक्टूबर की देर रात लंबी छुट्टी पर भेज दिया था. सरकार के इस फैसले के खिलाफ आलोक वर्मा सुप्रीम कोर्ट चले गए थे. जिस पर बीती 8 जनवरी को फैसला देते हुए शीर्ष अदालत ने उन्हें फिर से पद पर बहाल कर दिया था. हालांकि इसके बाद पीएम मोदी की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने वर्मा को पद से दोबारा हटाने का फैसला लिया.

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वर्मा को भ्रष्टाचार और कर्तव्य निर्वहन में लापरवाही के आरोप के चलते हटाया गया. वर्मा को पद से हटाने का फैसला लेने वाली चयन समिति में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने फिर सवाल उठाया कि सरकार ने समिति के साथ जस्टिस एके पटनायक की रिपोर्ट साझा नहीं की. जस्टिस एके पटनायक ने सीवीसी द्वारा वर्मा पर लगे आरोपों की जांच की देखरेख की थी.

First published: 14 January 2019, 12:10 IST
 
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