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भाजपा ने ‘पिंजरे के तोते’ को बनाया शिकारी कुत्ता

चारू कार्तिकेय | Updated on: 21 January 2017, 3:32 IST
(आर्या शर्मा/कैच न्यूज़)

सीबीआई ने दिल्ली के उपमुख्यमंत्री के खिलाफ एक प्रारंभिक जांच (पीई) दर्ज की है. इस जांच के पीछे राजनीतिक मकसद है, जिसे समझना मुश्किल नहीं है. घटना जुलाई 2016 की है, पर प्रारंभिक जांच उस समय दर्ज की गई है जब 5 राज्यों में होने वाले चुनावों में से 2 में आप की भाजपा के साथ कांटे की टक्कर है. लगता है, यह कोशिश आप को कमजोर करने के लिए है, जो पंजाब में भाजपा और शिरोमणि अकाली दल (सद) जैसी ही अच्छी स्थिति में है.

सीबीआई ने 18 जनवरी को सिसोदिया और ‘अज्ञात दिल्ली अधिकारियों’ के खिलाफ पीई दर्ज की. उन पर पिछली जुलाई में ‘टॉक टू एके’ सोशल मीडिया कैंपेन में अनियमितता का आरोप था. लगता है दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग जाते-जाते उन्हें यह तोहफा दे गए हैं, जिनके आप सरकार, सिसोदिया और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथ संबंध ठीक नहीं थे. जंग के कार्यकाल में यह मामला सीबीआई को दिया गया था, जिसकी रिपोर्ट उनके द्वारा नियुक्त शुंगलु-पैनल ने दी थी.

इस पीई के साथ ही सीबीआई ने उसी दिन सौम्या जैन के खिलाफ भी पीई दर्ज की, जो स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन की बेटी हैं. एजेंसी मोहल्ला क्लिनिक प्रोजेक्ट के लिए दिल्ली सरकार की सलाहकार के रूप में सौम्या की नियुक्ति की जांच करेगी. दोनों मामले दिल्ली में एक दर्जन से ऊपर आप विधायकों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के बाद आए हैं. इसमें दर्ज एफआईआर, यहां तक कि गिरप्तारी भी शामिल है. यह साफ संकेत है कि भाजपा दिल्ली में आप सरकार को उखाड़ने के लिए संवैधानिक तंत्र का गलत उपयोग कर रही है.

गिरफ्तार नौकरशाह की गवाही

पिछले साल सीबीआई ने दिल्ली सरकार के शीर्ष नौकरशाह राजेन्दर कुमार को भी कथित भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार किया था. सीएम के पूर्व मुख्य सचिव कुमार पर अब यह आरोप है कि उन्हें सीबीआई अधिकारियों ने केजरीवाल को फंसाने का आग्रह किया था. कुमार ने दिल्ली सरकार को वीआरएस का अनुरोध करते हुए चिट्ठी लिखी थी, ‘पूछताछ के दौरान मुझे बार-बार कहा गया कि अगर मैं दिल्ली के मुख्यमंत्री को फंसा दूं, तो मुझे छोड़ दिया जाएगा. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सीबीआई ने दर्जनों लोगों को मुझे और केजरीवाल को फंसाने को विवश करने के लिए पीटा.’

केंद्र सरकार ने इन आरोपों पर कोई ध्यान नहीं दिया. सीबीआई ने भी उनका साफ खंडन किया. कुमार ने कहा कि भाजपा अपने राजनीतिक विरोधियों को डराने के लिए सीबीआई का गलत इस्तेमाल कर रही है. चार साल पहले सर्वोच्च न्यायालय ने सीबीआई को ‘पिंजरे का तोता’  कहा था. लगता है, यह अब तोते से सत्तासीन पार्टी का शिकारी कुत्ता बन गया है, जो विरोधियों को डराने या आहत करने के लिए खुला छोड़ दिया गया है. 

कब आएगा सीबीआई निदेशक?

एजेंसी पर सरकार के राजनीतिक नियंत्रण का इससे बड़ा प्रमाण क्या होगा कि उसके प्रमुख की नियुक्ति काफी समय से लंबित है. सीबीआई के पूर्व निदेशक अनिल सिन्हा एक महीने पहले सेवानिवृत्त हो गए थे और सरकार को एजेंसी के प्रमुख के तौर पर अब भी पूर्णकालिक निदेशक की नियुक्ति करनी है. 

जब सिन्हा को सेवानिवृत्त होना था, तो पार्ट टाइम निदेशक के तौर पर राकेश अस्थाना को नियुक्त करने की क्या आवश्यकता थी? एक महीने बाद पूर्णकालिक निदेशक की घोषणा क्यों नहीं की गई? और अब जब फुल टाइम निदेशक नियुक्त होना है, तो सरकार ऐसा अधिकारी क्यों नियुक्त करने को उत्सुक है, जिससे विपक्ष संतुष्ट नहीं है?

आप नेताओं के खिलाफ हाल की पीई से इन सभी सवालों का जवाब मिलता है. भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार चाहती है कि एजेंसी प्रमुख एक दब्बू पुलिस अधिकारी बने, जो विपक्ष के नेताओं के खिलाफ केस फाइल करने और चलाने में मदद करेगा और सरकार और उसके सहयोगियों को निरापद छोड़ देगा. आप ने आफत मोल ले ली है. सिसोदिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने घर और कार्यालय पर सीबीआई भेजने के मामले में निडरता से कहा कि वे उनका इंतजार कर रहे हैं.

केजरीवाल अपनी प्रतिक्रिया में ज्यादा आक्रामक थे. उन्होंने आप नेताओं के खिलाफ झूठे मामले दर्ज करने के लिए मोदी पर प्रहार किया, जबकि वे खुद भ्रष्टाचार में लिप्त हैं. उनका इशारा सहारा-बिरला रिश्वत मामले की तरफ था, जिसे केजरीवाल ने नवंबर 2016 में दिल्ली विधानसभा में उठाया था. सिसोदिया पर सीबीआई का छापा 19 जनवरी को पडऩे की आशंका थी, पर ऐसा नहीं हुआ. इससे केजरीवाल को सीबीआई का मजाक उड़ाने का मौका मिल गया कि वह डर गई. कइयों ने पीई को षडयंत्र बताया है.  

ये सीबीआई और भाजपा दोनों के लिए निराशाजनक है. विपक्ष को परेशान करने की भाजपा की चालें चलती रहेंगी, पर अगर सीबीआई तुरंत और निष्पक्ष जांच करके मुद्दे का जल्द निपटान करेगी, तो यह सीबीआई के हित में रहेगा.

First published: 21 January 2017, 3:32 IST
 
चारू कार्तिकेय @CharuKeya

Assistant Editor at Catch, Charu enjoys covering politics and uncovering politicians. Of nine years in journalism, he spent six happily covering Parliament and parliamentarians at Lok Sabha TV and the other three as news anchor at Doordarshan News. A Royal Enfield enthusiast, he dreams of having enough time to roar away towards Ladakh, but for the moment the only miles he's covering are the 20-km stretch between home and work.

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