Home » इंडिया » CBI's raid on Kejriwal was a bad idea
 

हेरल्ड मामले में बढ़त को भाजपा ने सचिवालय पर सीबीआई के छापे से गंवा दिया

सुहास मुंशी | Updated on: 16 December 2015, 17:50 IST
QUICK PILL
  • दिल्ली सचिवालय में पड़े सीबीआई के छापे के समय और परिस्थितियों को देखते हुए केंद्र सरकार के लिए यह साबित करना मुश्किल होगा कि सीबीआई का छापा राजनीति से प्रेरित फैसला नहीं था.
  • सीबीआई के इस छापे ने जिस तरह से मोदी सरकार के खिलाफ विपक्षी दलों को एकजुट किया है, उसे देखते हुए केंद्र सरकार को इस सत्र में जीएसटी बिल पारित होने की उम्मीद छोड़ देनी चाहिए.

इसे साबित करने का कोई प्रमाण नहीं है कि अरविंद केजरीवाल के दफ्तर पर पड़ा सीबीआई का छापा राजनीति से प्रेरित नहीं था. लेकिन यह साफ है कि सीबीआई के छापे से से सरकार की जबरदस्त छीछालेदर हुई. सीबीआई के छापे की वजह से दिल्ली के मुख्यमंत्री को पूरा एक दिन अपने ऑफिस से बाहर रहना पड़ा.

अरविंद केजरीवाल की साफ सुथरी छवि और किसी मामले में उनकी जबरदस्त प्रतिक्रिया की आदत को देखते हुए कहा जा सकता है कि सीबीआई का छापा एक बुरा फैसला था.

दिल्ली के मौजूदा प्रिंसपल सेक्रेटरी राजेंद्र कुमार के कथित तौर पर भ्रष्टाचार में लिप्त होने की जांच को लेकर सीबीआई ने छापा मारा जबकि यह मामला केजरीवाल सरकार के पहले का है. यहां तक कि अगर कुमार के खिलाफ भ्रष्टाचार का आरोप साबित भी हो जाता है तो भी सीबीआई के छापे को केजरीवाल के खिलाफ निजी हमले के तौर पर देखा जाएगा.

इस छापे ने एक तरह से मोदी के खिलाफ विपक्ष को नए सिरे से एकजुट कर दिया है. विपक्षी पार्टी के सदस्यों ने छापे की विस्तृत जानकारी सामने आने से पहले ही इस छापे को 'राजनीतिक बदले' की कार्रवाई बताना शुरू कर दिया.

कुमार के खिलाफ आरोप साबित भी हो जाता है तो सीबीआई के छापे को केजरीवाल के खिलाफ साजिश के तौर पर देखा जाएगा

मंगलवार की सुबह पड़े छापे को लेकर संसद के दोनों सदनों में जबरदस्त हंगामा हुआ. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सबसे पहले आगे आते हुए सीएम ऑफिस को सील किए जाने की घटना को अभूतपूर्व करार दिया. उन्होंने केजरीवाल के ट्वीट का जवाब देते हुए कहा, 'मैं अचंभित हूं.' इसके बाद केजरीवाल ने जवाब देते हुए कहा, 'ममता दी यह अघोषित आपातकाल है.' बनर्जी के सहयोगी डेरेक ओ ब्रायन ने इसे राज्य सरकारों को गिराने की साजिश बताया.

असम के मुख्यमंत्री तरुण गगोई ने कहा, 'सीबीआई के अधिकार को लेकर विवाद नहीं है लेकिन छापा मारने का एक तरीका होता है. इसे एक तरीके से किया जाना चाहिए ताकि रिश्तों में कोई खटास नहीं आए.' 

सीबीआई के छापे का विरोध केवल मुख्यमंत्रियों ने ही नहीं किया. कांग्रेसी संसद कमलनाथ ने कहा, 'यह संघवाद की भावना के खिलाफ जाता है. यह ऐसा कदम है जिसकी निंदा की जानी चाहिए.'

वहीं कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के नेता डी राजा ने कहा, 'बीजेपी नेतृत्व वाली केंद्र सरकार और मोदी को यह बात समझ में आनी चाहिए कि दिल्ली में एक चुनी हुई सरकार और उसका मुख्यमंत्री है. मुझे ऐसा लगता है कि केंद्र सरकार इस सच्चाई को मुश्किल से पचा पा रही है.'

राजा ने कहा कि केंद्र सरकार के इसके बचाव में कई सारे तर्क दे सकती है लेकिन छापे का समय और परिस्थितियां यह बता रही हैं कि इसमें राजनीति बदले की भावना थी. यह संघीय ढांचे का उल्लंघन है.

कारण

सीबीआई की टीम ने पहले पहल सीएम ऑफिस पर क्यों छापा मारा? सीबीआई का दावा है कि कुमार और अन्य लोगों ने अपने आधिकारिक पदों का दुरुपयोग करते हुए एक निजी कंपनी को दिल्ली सरकार का ठेका दिया जब वह 2007-14 के बीच दिल्ली सरकार में शिक्षा और आईटी विभाग के प्रभारी थे.

एजेंसी के एक अधिकारी के मुताबिक सीबीआई ने हाल ही में दिल्ली डॉयलॉग कमीशन के पूर्व सदस्य सचिव आशीष जोशी की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया है. जोशी 1992 बैच के आईपी एंड टीएएफएस ऑफिसर हैं. उन्हें साल की शुरुआत में दिल्ली डॉयलॉग कमीशन का सदस्य सचिव बनाया गया था. हालांकि एक महीने बाद ही डीडीए के वाइस चेयरपर्सन आशीष खेतान ने उन्हें हटा दिया.

यह पहली बार नहीं है जब राजेंद्र कुमार के खिलाफ वित्तीय अनियिमतता के आरोप लगे हैं. सूत्रों के मुताबिक 2007 में उनके खिलाफ सीबीआई में एक मामला दर्ज किया था. इसके बाद 2014 में एक और शिकायत दर्ज की गई. हालांकि उस वक्त सीबीआई ने कोई कार्रवाई नहीं की.

सीबीआई ने दिल्ली डॉयलॉग कमीशन के पूर्व सदस्य सचिव आशीष जोशी की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया है

छापे का दूसरा पहलू यह है कि अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि कुमार और उनके छह अन्य  सहयोगियों ने किस तरह का अपराध किया है. क्या यह आधिकारिक पद के दुरुपयोग का मामला है कि कुमार ने कॉन्ट्रैक्ट दिया या फिर कॉन्ट्रैक्ट देने में उनकी भूमिका थी? या फिर उन्होंने कॉन्ट्रैक्ट को इस तरह से तैयार किया ताकि किसी विशेष एजेंसी को फायदा पहुंचाया जा सके?

सीबीआई के अधिकारी के मुताबिक कुमार की फाइलों में जिस एक अनियमितता का मामला सामने आया है वह यह है कि निजी कंपनियों को ठेका दिए जाने के मामले में टेंडर्स नहीं निकाला गया. हालांकि जिन्हें टेंडर दिया है वह पैनल में पहले से शामिल किए गए थे. एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि टेंडर निकाला जाना जरूरी नहीं है.

अधिकारी बताते हैं, 'किसी आइटम के लिए बस रेट के बारे में जानकारी देनी होती है और इस रेट के आधार पर सरकारी विभाग पैनल में शामिल किसी भी एजेंसी को ऑर्डर दे सकते हैं. टेंडर निकाले जाने की कोई जरूरत नहीं होती है. बस इस मामले में आपको खरीदे जाने वाले समान की सबसे बेहतर कीमत की तलाश करनी होती है.'

सीबीआई छापे के बाद केजरीवाल जल्द ही डीडीसीए में हुए भ्रष्टाचार के मामले की जांच का आदेश दे सकते हैं

इसमें न तो इसमें भ्रष्टाचार के आरोपों के बारे में जानकारी है और न ही घपले की रकम के बारे में जिक्र किया गया है.

सीबीआई को अपने छापे को जायज ठहराने के लिए क्विड प्रो को साबित करना होगा और उसे यह जल्दी करना होगा. हालांकि सीबीआई के एक सूत्र की माने तो अभी तक ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है. 

सीबीआई को कुमार के घर से महज 2.4 लाख रुपये और 3 लाख रुपये की विदेशी मुद्रा मिली है. इसके अलावा तीन अचल संपत्तियों के कागजात मिले हैं. हालांकि सीबीआई ने अभी तक यह साबित नहीं किया है कि  इन संपत्तियों को नाजायज तरीके से हासिल किया गया है.

सीबीआई के एफआईआर में छह लोगों को आरोपी बनाया गया है. एक निजी कंपनी के तीन मैनेजिंग डायरेक्टर्स और एक दूसरी कंपनी के दो डायरेक्टर्स के अलावा एक कंपनी को आरोपी बनाया गया है. सीबीआई को दिल्ली के एक पूर्व नौकरशाह के घर से करीब 10 लाख रुपये की रकम मिली है.

केजरीवाल का आरोप

केजरीवाल इतने तेवर में पहले कभी नहीं दिखे जैसा वह मंगलवार की शाम को नजर आए. साफ तौर पर सीबीआई ने उन्हें यह मौका दिया है.

केजरीवाल ने कैमरे के सामने पूरी आक्रामकता से अपनी बात रखी. उन्होंने दावा किया अगर सीबीआई को उनके प्रिंसपल सेक्रेटरी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले की जांच करनी थी तो उन्हें संबंधित विभाग में छापा डालना चाहिए था न कि उनके ऑफिस पर जहां पुरानी फाइलें रखी जाती हैं.

उन्होंने कहा कि सीबीआई ने यह छापा अरुण जेटली से जुड़े डीडीसीए मामले की फाइल हासिल करने के लिए मारा था. उन्होंने कहा कि हम जल्द ही डीडीसीए मामले में जांच आयोग बिठाने वाले थे.

अगर सीबीआई को कुमार के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप की जांच करनी थी तो उन्हें संबंधित विभागों में छापा मारना चाहिए था

केजरीवाल ने कहा, 'जेटली कई वर्षों तक डीडीसीए के प्रेसिडेंट रहे हैं और मैंने उनके कार्यकाल के दौरान हुए भ्रष्टाचार की जांच के लिए कमेटी बनाई थी. कमेटी अपनी रिपोर्ट सौंप चुकी है और इसके लिए आयोग का गठन किया जाना था. इससे जुड़ी फाइलें मेरे दफ्तर में हैं.' 

अगर सीबीआई का छापा गलत तो केजरीवाल ने भी हद लांघते हुए प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ गलत शब्दों का इस्तेमाल किया. केजरीवाल ने उन्हें कायर और मनोरोगी तक कह डाला. हालांकि वो अपने कहे से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं.

केजरीवाल ने कहा, 'राजेंद्र तो बहाना है, केजरीवाल निशाना है.' मोदी को चुनौती देते हुए केजरीवाल ने कहा कि उनकी सरकार सीबीआई के आतंक से नहीं डरती. उन्होंने कहा, 'मोदी जी आपको नहीं पता मैं किस मिट्टी का बना हूं.' केजरीवाल जल्द ही डीडीसीए मामले में जांच का आदेश दे सकते हैं. इस संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि वह केंद्र सरकार के भ्रष्टाचार के मामलों के खिलाफ अपील दायर करना शुरू कर देंगे.

सीबीआई को दिल्ली सीएम के ऑफिस से कुछ विशेष हाथ नहीं लगा है. बीजेपी के लिए सबसे बड़ा झटका यह है कि हेरल्ड मामले में जो उसे बढ़त मिली थी वह इस छापे से गंवाती दिख रही है.

अब मोदी सरकार को संसद के भीतर और बाहर विपक्ष की एकजुटता का सामना करना पड़ेगा. शायद सरकार को अब इस सत्र में जीएसटी विधेयक के पास होने की संभावना छोड़ देनी चाहिए.

First published: 16 December 2015, 17:50 IST
 
सुहास मुंशी @suhasmunshi

He hasn't been to journalism school, as evident by his refusal to end articles with 'ENDS' or 'EOM'. Principal correspondent at Catch, Suhas studied engineering and wrote code for a living before moving to writing mystery-shrouded-pall-of-gloom crime stories. On being accepted as an intern at Livemint in 2010, he etched PRESS onto his scooter. Some more bylines followed in Hindustan Times, Times of India and Mail Today.

पिछली कहानी
अगली कहानी