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CBI ने SC में कहा- 'बोफोर्स केस में हिंदुजा बंधुओं की बेल का विरोध न करने का था आदेश'

कैच ब्यूरो | Updated on: 2 December 2016, 15:08 IST
(एजेंसी)

सुप्रीम कोर्ट में एक केस की सुनवाई के दौरान केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने बीते गुरुवार को यह कबूल किया किया कि उसे बोफोर्स घोटाले की जांच नहीं करने का आदेश मिला था.

सीबीआई ने कोर्ट के सामने माना कि उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा हिंदुजा बंधुओं के रिहा करने के आदेश के खिलाफ अपील नहीं करने का आदेश दिया गया था.

इस मामले में यह रहस्य तब सामने आया, जब इस मामले में ताजा सुनवाई के तहत जस्टिस टीएस ठाकुर और जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ के सामने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील करने वाले निजी याचिकाकर्ता वकील अजय कुमार अग्रवाल कोर्ट के सामने हाजिर नहीं हुए.

सुप्रीम कोर्ट की सीएस ठाकुर वाली खंडपीठ जानना चाहती थी कि इस मसले में 12 अगस्त, 2010 को हुई अंतिम सुनवाई में क्या हिंदुजा बंधुओं को नोटिस दी गई थी.

जस्टिस ठाकुर और जस्टिस चंद्रचूड़ सीबीआई से जानना चाहते थे कि क्या 18 अक्टूबर, 2005 की तारीख पर हिंदुजा बंधुओं को भेजी गई नोटिस मिली थी.

सीबीआई की ओर से यह केस लड़ रहे वकील पी.के. डे ने कहा कि सीबीआई को हाईकोर्ट के द्वारा 31 मई, 2005 को सुनाए गए फैसले के खिलाफ अपील करने की परमिशन नहीं दी गई थी.

हाईकोर्ट के इस फैसले से श्रीचंद, गोपीचंद और प्रकाशचंद हिंदुजा के साथ-साथ बोफोर्स कंपनी को छूट मिल गई थी.

सुप्रीप कोर्ट की बेंच ने सुनवाई करते हुए पूछा 'याचिकाकर्ता कहां है?' इस बीच याचिकाकर्ता ने अपनी अनुपस्थिति में किसी को नियुक्त भी नहीं किया था.

बेंच ने पूछा कि क्या याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट में ही प्रैक्टिस करता है. डे ने कहा, "हां, याचिकाकर्ता अजय कुमार सुप्रीम कोर्ट में ही प्रैक्टिस करते हैं."

इस बात को जानने के बाद बेंच ने जनवरी तक के लिए कार्यवाही स्थगित कर दी है. 18 अक्टूबर को कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील करने की छूट दी थी.

गौरतलब है कि बोफोर्स मामले में हाईकोर्ट ने हिंदुजा बंधुओं पर लगे तमाम आरोपों को रद्द कर दिया था और सीबीआई को इस केस के मामले में जमकर लताड़ भी लगाई थी.

हाईकोर्ट के जज ने सुनवाई के दौरान कहा था कि वो 14 साल तक चली इस जांच से कतई संतुष्ट नहीं हैं. वे कहते हैं कि इस केस की वजह से राजकोष को लगभग 250 करोड़ का घाटा हुआ है.

कोर्ट ने कहा कि इस केस से एक तरफ जहां राजस्व को भारी धक्का पहुंचा है, वहीं कई आरोपी तो इन आरोपों के साथ ही मर भी गए. वे इस केस की जांच करने वाली सीबीआई से ऐसी उम्मीद नहीं करते थे कि केस के प्रति उसका ऐसा रूख रहेगा.

First published: 2 December 2016, 15:08 IST
 
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