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सीबीआई का दावा राजेंद्र कुमार एवं अन्य के खिलाफ हैं 'पुख्ता सुबूत'

सुहास मुंशी | Updated on: 13 July 2016, 8:09 IST
(कैच)

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने दावा किया है कि वह दिल्ली के पूर्व प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार एवं अन्य छह के खिलाफ जारी कथित भ्रष्टाचार के मामले को हल करने के बिल्कुल करीब है.

सीबीआई के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार उन्होंने 50 करोड़ रुपये के कथित घोटाले में पैसे के लेन-देन के सूत्रों का पता लगा लिया है.

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सीबीआई ने नगद 60 लाख रुपये घूस दिए जाने का भी सुबूत जुटा लिया है. एजेंसी के अनुसार हिरासत में लिए गए एक नौकरशाह को ये घूस दी गई थी, जिसके बदले उन्होंने निविदा में फेरबदल करवाई थी. नौकरशाह ने कथित तौर पर इस पैसे का उपयोग नोएडा में अपनी बीवी के नाम किफायती दर पर फ्लैट खरीदने में किया.

सीबीआई के दावे के अनुसार करीब 50 करोड़ रुपये के इस घोटाल के मुख्य सूत्रधार राजेंद्र कुमार थे. सोमवार को दिल्ली की सीबीआई अदालत ने सभी अभियुक्तों की हिरासत तीन दिन के लिए बढ़ा दी थी.

सीबीआई के अनुसार मामले में शामिल छह अभियुक्तों ने तीन करोड़ रुपये रिश्वत ली थी.

आरोप

राजेंद्र कुमार एवं अन्य अभियुक्तों पर आरोप है कि उन्होंने ईएसपीएल नाम की एक कंपनी बनाकर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए उसे सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी (पीएसयू) आईसीएसआईएल से कई करोड़ रुपये के ठेके लिए दिलाए. इनमें से कई ठेके सामान्य प्रक्रिया पूरा किए बगैर दिए गए थे.

माना जाता है कि राजेंद्र कुमार का केंद्र सरकार के तहत आने वाली कंपनी आईसीएसआईएल और दिल्ली सरकार के तहत आनी वाली कंपनी दिल्ली स्टेट इंडिस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (डीएसआईआईडीसी) में अच्छा खासा प्रभाव था.

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आईसीएसआईएल सरकार द्वारा उपयोग किए जाने वाले सभी सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर को अनुमति देती है.

सीबीआई के अनुसार राजेंद्र कुमार ईएसपीएल के अपने सहयोगियों को वॉयस-मेल भेजकर बताते थे कि कंपनी को ठेके लेने के लिए किस तरह निविदा भरनी है.

जांच में नए सुबूत

सीबीआई के अधिकारी ने कैच को बताया, "नौ जुलाई को हमने इस मामले में छह जगहों पर छापे मारे जिसमें हमें सातों अभियुक्तों के खिलाफ कई सुबूत मिले हैं. हमें न केवल ये पता चल गया है कि येे घोटाला कैसे किया गया बल्कि हमने पैसे कैसे और कहां गया इसका भी पता कर लिया है."

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इस अधिकारी के अनुसार ये मामला चट-पट हल हो गया. वो कहते हैं, "ईमानदारी से कहूं तो हमें लगता है कि हम सौभाग्यशाली हैं जो इतने कम समय में इतने सुबूत मिल गए." अधिकारी ने दावा किया कि एजेंसी अधिकतम एक महीने में अपनी जांच पूरी कर लेगी.

अधिकारी ने आगे बताया, "मसलन, ईएसपीएल ने दिल्ली सरकार द्वारा गैर-कानूनी तरीके से ली गई बड़ी धनराशि आगरा के एक प्रकाशन समूह को दिया. एक बार तो एकमुश्त 80 लाख रुपये भुगतान किए गए. ये पैसा जाली बिल बनाकर दिया गया था."

अधिकारी ने बताया कि सीबीआई ये जानने की कोशिश कर रही है कि इस प्रकाशन कंपनी को कथित भुगतान क्यों किया गया. सीबीआई को अपनी जांच में ये भी पता चला कि दिल्ली सरकार के वैट विभाग ने ईएसपीएल से 3.3 करोड़ रुपये कीमत के सॉफ्टवेयर खरीदे लेकिन विभाग ने इनका इस्तेमाल नहीं किया.

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सोमवार को सीबीआई ने अदालत से सभी अभियुक्तों की सात दिन की रिमांड पर भेजने की मांग की थी. सीबीआई ने अदालत से कहा कि एजेंसी की एक अधिकारी पर एक अभियुक्त की तरफ से दबाव डाला जा रहा है.  

सात में दो अभियुक्तों जीके नंदा और आरएस कौशिक को अदालत ने सोमवार को तीन दिन की रिमांड पर भेज दिया. इन दोनों को शनिवार को गिरफ्तार किया गया था. नंदा आईसीएसआईएल के पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर (एमडी) हैं और कौशिक मौजूदा एमडी.

सीबीआई के अनुसार कौशिक ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए निविदा के विज्ञापन में हेरफेर की जिससे ईएसपीएल को कई करोड़ों का ठेका मिल गया. नंदा पर भी अपने पद के दुरुपयोग का आरोप है. उन्होंने निविदा इस तरह पेश की जिससे केवल ईएसपीएल ने निविदा के लिए आवेदन किया.  

अधिकारी जो भी कहें गुरुवार को सीबीआई को अदालत में और सुबूत पेश करने है.

वहीं जब राजेंद्र कुमार के दिल्ली मुख्यमंत्री कार्यालय स्थित दफ्तर पर छापा मारा था तो दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार ने केंद्र सरकार और एजेंसी पर काफी तीखा हमला किया था. लेकिन इस मामले सभी अभियुक्तों की गिरफ्तारी के बाद से आम आदमी पार्टी ने लगभग चुप साध रखी है. 

First published: 13 July 2016, 8:09 IST
 
सुहास मुंशी @suhasmunshi

He hasn't been to journalism school, as evident by his refusal to end articles with 'ENDS' or 'EOM'. Principal correspondent at Catch, Suhas studied engineering and wrote code for a living before moving to writing mystery-shrouded-pall-of-gloom crime stories. On being accepted as an intern at Livemint in 2010, he etched PRESS onto his scooter. Some more bylines followed in Hindustan Times, Times of India and Mail Today.

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