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क्या हुआ था रात के 11 बजे ऐसा कि CBI के दोनों अफसरों की करनी पड़ी छुट्टी

कैच ब्यूरो | Updated on: 24 October 2018, 11:11 IST

देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई के भीतर बढ़ता टकराव देख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार को दखल देनी पड़ी. कैबिनेट की अपॉइंटमेंट कमेटी ने रात के तकरीबन साढ़े 11 एक आर्डर जारी किया, जिसमे आदेश दिया गया कि सीबीआई के डायरेक्टर अलोक वर्मा को छुट्टी पर भेज दिया जाए साथ ही विशेष डायरेक्टर राकेश अस्थाना को भी छुट्टी पर भेज दिया गया. फ़िलहाल इन दोनों सीबीआई के अफसरों के ऑफिस सील बंद कर दिए गए हैं और दोनों से सारे अधिकार छीन लिए गए हैं. एम नागेश्वर राव को फ़िलहाल अंतरिम डायरेक्टर बनाया गया है.

क्या हुआ रात जे 11 बजे

माना जा रहा था कि पीएम मोदी भी सीबीआई के अन्दरूनी टकराव से बेहद नाराज थे. मीडिया रिपोर्ट की माने तो सीबीआई के डायरेक्टर आलोक वर्मा ने एक आदेश जारी कर अस्थाना से सारी जिम्मेदारी वापस ले ली थी, जिसके बाद सरकार हरकत में आयी और अलोक वर्मा को खुद छुट्टी पर भेज दिया. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार दोनों को छुट्टी पर भेजने का फैसला केंद्र ने सीवीसी की सिफारिश के बाद लिया. सीवीसी ने सरकार को अनुशंसा की थी कि दोनों शीर्ष अधिकारियों में जंग चल के चलते उन्हें जबरन छुट्टी पर भेज दिया जाना चाहिए.

एजेंसी के डायरेक्टर अलोक वर्मा पहले से ही कहते रहे हैं कि अस्थाना पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं इसलिए उन्हें एजेंसी ने नहीं रहना चाहिए. आलोक वर्मा ने रिश्वत स्वीकार करने का विशेष निदेशक राकेश अस्थाना पर आरोप लगाया है. दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि अस्थाना के खिलाफ 29 अक्टूबर तक कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती है.

हालांकि के बॉस पर भ्रष्टाचार के इस तरह के आरोप पहली बार नहीं लगे हैं. पिछले कुछ सालों में इसके दो निदेशक रणजीत सिन्हा और एपी सिंह भ्रष्टाचार के मामलों में फंसे लेकिन वर्तमान विवाद व्यक्तिगत भ्रष्टाचार और राजनीतिक हस्तक्षेप से परे चला चला गया है. यह एक गंभीर संस्थागत संकट के संकेत देता है. सीबीआई के विशेष डायरेक्टर अस्थाना के जरिये कांग्रेस उनपर लगातार हमला कर रही है.

अस्थाना गुजरात कैडर के आईपीएस अफसर रहे हैं इसलिए कांग्रेस उन्हें पीएम मोदी का करीबी कह रही है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने उन्हें खुद पीएम मोदी का दुलारा अफसर कहा है. अस्थाना इससे पहले गुजरात पुलिस में सेवा दे चुके हैं. 2002 में गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस को जलाने की जांच उन्होंने ही की थी. पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल के दौरान मोदी ने स्वयं सीबीआई को "कांग्रेस जांच ब्यूरो" नाम दिया था. 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे 'कैद तोता' नाम दिया था. 

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First published: 24 October 2018, 11:09 IST
 
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