Home » इंडिया » cement factory close the development path
 

सीमेंट फैक्ट्री ने रास्ते के साथ बंद किया विकास का रास्ता

शिरीष खरे | Updated on: 26 March 2016, 23:20 IST
QUICK PILL
  • प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार जिले में परसवानी-हिरमी मार्ग बनाने के लिए साल 2006 में मिली थी मंजूरी.
  • सीमेंट फैक्ट्री की आपत्ति के चलते दस साल से रुका पड़ा है सड़क का निर्माण कार्य. कलेक्टर से लेकर मुख्यमंत्री तक गुहार लगाने के बावजूद नहीं सुलझ रहा है यह विवाद.

"मंजूरी मिले तो दस बरस गुजर गए साब, लेकिन इस रास्ते को पक्का बनाने के लिए एक पत्थर नहीं लगा. सीमेंट फैक्ट्री की ज्यादा से ज्यादा पत्थर खोदने की भूख अब हमारी जिंदगी के रास्ते में रुकावट बन रही है. ढाई किमी हिरमी का यही रास्ता तो हमारे लिए बाहर आने-जाने का इकलौता जरिया है, इस पर चलते हुए हमारी कई पीढ़ियां गुजर गईं. मगर अब कंपनी इसी पर कब्जा करके बड़े इलाके में खनन की तैयारी कर रही है. हम अपना दुखड़ा मुख्यमंत्री तक को सुना चुके हैं, सब कहते हैं सड़क तुम्हारी है, योजना जल्द पूरी होगी. मगर हर बार कंपनी के दबाव में सब रुक जाता है. कंपनी की तीन बड़ी खदानों ने पूरे गांव को घेर लिया है. हमारा गांव दोनों रास्तों से कटकर खदान में समाता जा रहा है,”

यह पीड़ा रायपुर से करीब 75 किमी दूर परसवानी (बलौदा बाजार) गांव के सरपंच बलरामजी की है.

पढ़ें: मनरेगा मेहनताने की मार सबसे अधिक छत्तीसगढ़ के मजदूरों पर

यहां के बाशिंदे गत कई सालों से सीमेंट फैक्ट्री की वजह से तकलीफ भोगने को मजबूर हैं. ग्रामीणों ने कई बार गुहार लगाई लेकिन उनकी सुनवाई नहीं है. यह पूरा इलाका सीमेंट फैक्ट्रियों का दंश झेल रहा है.

साल 2006 में परसवानी से हिरनी मार्ग प्रधानमंत्री सड़क योजना में शामिल किया गया. इसके लिए शासन स्तर पर तीन बार सर्वे भी हुए. मगर साल 2011 में आला अधिकारियों ने लिखित जवाब देते हुए बताया कि रास्ते की कुछ जमीन को कंपनी ने खनन लीज क्षेत्र का अभिन्न हिस्सा बताने के कारण सड़क नहीं बन पा रही है.

Ultra-take shirish khare

इलाके के सामाजिक कार्यकर्ता लालजी गायकवाड़ सवाल करते हैं, 'विकास के लिए सरकार किसानों की जमीन कंपनी को दे सकती है तो यहां विकास का रास्ता बनाने के लिए वह अब हाथ पर हाथ धरे क्यों बैठी है? वहीं, जो कंपनी औने-पौने दामों पर हमारी जमीन खरीदकर अरबों रुपए का कारोबार कर रही है, मौका पड़ने पर क्या हमें जीने का रास्ता नहीं दे सकती है?”

मुख्यमंत्री से गुहार लगाने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया, लेकिन कुछ हुआ नहीं

कामदेव साहू बताते हैं, बीते साल रायपुर में मुख्यमंत्री से गुहार लगाने के बाद पहली बार जिला प्रशासन हरकत में जरूर आया था, कलक्टर के निर्देश पर अधिकारियों ने मुआयना भी किया, मौखिक आश्वासन भी दिया, लेकिन हुआ कुछ नहीं.

आठ किमी घूमकर जाओ

ग्रामीण बताते हैं कि इस समस्या को हल करने की बजाय अधिकारी उन्हें सकलोर होकर आठ किमी लंबे रास्ते पर आने-जाने की नसीहत दे रहे हैं. फुलुकराम वर्मा कहते हैं, इस रास्ते पर दारू की दो दुकानों के अलावा कंपनी के दो मेन-गेट और दो रेल्वे क्रांसिग भी हैं. बीमार पड़ने वाले मरीजों के अलावा रोजाना स्कूल जाने वालों बच्चों के लिए इस रास्ते से समय पर पहुंचना मुश्किल होगा.

पढें: छत्तीसगढ़ में हर दूसरे दिन एक आदिवासी महिला से होता है बलात्कार

ग्रामीणों ने ग्रामसभा में प्रस्ताव पारित कर अपने लिए परसवानी से हिरमी मार्ग बनाने की मांग की है. सरपंच बलरामजी का आरोप है कि कंपनी कारर्पोरेट सामाजिक जवाबदेही (सीएसआर) की राशि का गलत इस्तेमाल कर रही है.

कंपनी ने खनन के लिए एक पक्की सड़क बनाकर लाखों रुपए की राशि सीएसआर मद में डाल दी है, जबकि ग्रामीण आज भी कच्चे रास्ते पर जाने के लिए मजबूर हैं.

फैक्ट्री में सीएसआर के तहत नियुक्त अधिकारी विनोद श्रीवास्तव कहते हैं, ''लीज के अंतर्गत रास्ते की जमीन कारखाने के अधिकार में आती है. ग्रामीणों से बात चल रही है, हमने कहा कि दूसरे रास्ते से भी शहर की तरफ जाया जा सकता है, उनका कहना है कि दूसरा रास्ता लंबा है. हमारा मानना है कि यदि ग्रामीण दूसरे रास्ते पर आने-जाने के लिए तैयार हो जाएं तो कंपनी उसके निर्माण के लिए सहयोग राशि देने पर विचार कर सकती है, लेकिन अभी कोई समाधान निकल नहीं रहा है.''

पढ़ें: छत्तीसगढ़ पुलिस का दमन जारी, एक और पत्रकार को किया गिरफ्तार

बलौदा बाजार के कलेक्टर बासव राजू एस बताते हैं कि "परीक्षण नए सिरे से किया जाएगा. वे कहते हैं, 'मेरे कलक्टर बनने के बाद कोई शिकायत नहीं आई है. फिर भी इस प्रकरण में नए सिरे से परीक्षण कराने के लिए संबंधित विभाग के अधिकारियों को निर्देश दूंगा."

परसवानी में सीमेंट फ़ैक्ट्री पी गई पूरे गांव का पानी

चूना पत्थरों की खदानों ने हमारी जिन्दगी तबाह कर डाली. बीस बरस पहले इस गांव में सीमेंट बनाने वाली फ़ैक्ट्री लगने के बाद यहां की चट्टानों को खोदकर ज़मीन को ऐसा बर्बाद किया कि बांध में पानी कम पड़ गया. इस साल सूखे में तो हमारे खेत और पशुओं को पानी पिलाना मुश्किल हो गया है.

फैक्ट्री की वजह से बांध में पानी की कमी हो गई, जिससे खेती और पशुओं के लिए पानी का संकट हो गया है

फ़ैक्ट्री चालू करने से पहले पूरे गांव को नौकरी और शिक्षा सुविधा देने का वादा किया था, जो बस झांसा बनकर रह गया. यह दर्द रायपुर से करीब दो घंटे दूर परसवानी (बलौदाबाजार) के रहवासियों का है.

ultra-take-shirish khare

इनके मुताबिक साल 1992 में निजी कम्पनी की सीमेंट फ़ैक्ट्री लगने के साथ ही यहां चूना खदानों का विस्तार होता चला गया. लगातार खनन के चलते इन लोगों के हाथ से अब जल और ज़मीन भी निकलती जा रही है.

सरपंच बलरामजी कहते हैं, "गांव के नक्शे पर 80 फीसदी चूना खदानें हैं. पहले यहां 1007 एकड़ ज़मीन पर खेती होती थी, लेकिन अब 200 एकड़ खेत ही हैं. खेत खराब होने से ज्यादातर लोग बेकार हैं."

पढ़ें: 'विकास पथ' पर बढ़ रहे छत्तीसगढ़ की स्याह सच्चाई है टीबी

लोकराम वर्मा के मुताबिक, चूना पत्थरों की लगातार खुदाई के चलते मिट्टी की गुणवत्ता में आई कमी ने उपज की गुणवत्ता गिरा दी है, साथ ही आबोहवा को भी जहरीला बना दिया.

चारा तक खरीदने को मजबूर हैं किसान. गायकवाड़ बताते हैं, ‘दो दशक पहले यहां ढाई हजार से ज्यादा पशु थे, लेकिन अब हजार से भी कम पशु बचे हैं. खनन गतिविधियों के कारण यहां न पानी बचा और न ही चारागाह. 75 पशु अकाल मौत मर गए. साल 1980 के पहले यहां चारागाह के लिये 200 एकड़ ज़मीन थी, लेकिन अब चूना पत्थरों के खनन के लिये सरकार ने चारागाह के नाम पर महज दो एकड़ की ज़मीन छोड़ी है.’

First published: 26 March 2016, 23:20 IST
 
शिरीष खरे @catch_hindi

विशेष संवाददाता, राजस्थान पत्रिका

पिछली कहानी
अगली कहानी