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केंद्र सरकार: सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वालों को नहीं बख्शेंगे

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 May 2016, 17:44 IST

केंद्र सरकार ने कहा है कि देश के धर्मनिरपेक्ष ढांचे से किसी को भी खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा. राज्यसभा में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरणे रिजेजू ने दादरी मामले का जिक्र करते हुए ये बयान दिया.

रिजेजू ने राज्यसभा में कहा कि दादरी की घटना के बाद केंद्र की ओर से एक एडवायजरी जारी की गई थी. जिसमें कहा गया था कि किसी भी कीमत पर सांप्रदायिक सौहार्द की रक्षा होनी चाहिए. 

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रिजेजू ने कहा, "जो भी देश के धर्मनिरपेक्ष और सांप्रदायिक सौहार्द के ताने-बाने को बिगाड़ने की कोशिश करेगा उससे सख्ती से निपटा जाएगा."

दादरी पर एडवायजरी का हवाला

राज्यसभा में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री ने कहा, "दादरी में हुई घटना को लेकर हमने कभी यूपी सरकार की आलोचना नहीं की. हमने कहा था कि ये एक दुखद घटना थी, जिस पर रिपोर्ट मांगी गई थी. साथ ही हमने हर मुमकिन मदद देने की कोशिश की."

पढ़ें:दादरी कांडः क्यों यह अखिलेश यादव की नाकामी है?

इस दौरान रिजिजू ने कहा कि शांतिपूर्ण माहौल सुनिश्चित करना केवल केंद्र सरकार की जिम्मेदारी नहीं है. इसके लिए सभी सियासी पार्टियों को एक साथ आगे आना होगा.

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा के दादरी कस्बे में पिछले साल एक मुस्लिम शख्स की हत्या कर दी गई थी. बिसहड़ा गांव में 28 सितंबर को 50 साल के मोहम्मद अखलाक को गोमांस पकाने की अफवाह पर गांव के ही लोगों ने पीट-पीट कर मार डाला था.

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2015 में बढ़ी असहिष्णुता !

हाल ही में एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन संस्थान ने अपने शोध के आधार पर कहा है कि 2015 में भारत में असहिष्णुता की घटनाएं बढ़ी हैं.

सालाना रिपोर्ट में यूएस कमीशन फॉर इंटरनेशनल रिलिजियस फ्रीडम (यूएससीआईआरएफ) ने भारत सरकार से सार्वजनिक रूप से कट्टरपंथी नेताओं को फटकार लगाने को कहा, जिन्होंने धार्मिक समुदायों के बारे में अपमानजनक बयान दिए हैं. 

पढ़ें:रिपोर्ट: 2015 में भारत में असहिष्णुता की घटनाएं बढ़ीं

यूएससीआईआरएफ की रिपार्ट के मुताबिक 2015 में भारत में असहिष्णुता बढ़ी है. साथ ही धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन वाली घटनाओं में इजाफा हुआ है. कमीशन का कहना है कि हालात का विश्लेषण करने के मद्देनजर वो 2016 में होने वाली घटनाओं पर भी नजर रखेगा.

हालांकि केंद्र सरकार ने रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा था कि अमेरिकी संस्था को भारत के सामाजिक ढांचे की समझ नहीं है. 

First published: 5 May 2016, 17:44 IST
 
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