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एक मई को ही होगी कॉमन मेडिकल प्रवेश परीक्षा

कैच ब्यूरो | Updated on: 29 April 2016, 21:04 IST

राष्ट्रीय योग्यता प्रवेश परीक्षा (एनईईटी) के तहत मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के मामले में केंद्र सरकार की मांग सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है.

केंद्र सरकार ने अदालत से अपील की थी कि एक मई को होने वाली पहले चरण की प्रवेश परीक्षा एक मई के बजाय 24 जुलाई को आयोजित कराई जाए. लेकिन अदालत ने इस मांग को खारिज कर दिया.

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इसके साथ ही अब देशभर के मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए एनईईटी का पहला चरण एक मई को ही आयोजित होगा. केंद्र सरकार ने अदालत से गुरुवार के फैसले पर दोबारा विचार करने की अपील की थी. 

सुप्रीम कोर्ट में अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि परीक्षा को टालने से मेडिकल की तैयारी करने वाले छात्रों को समय मिल जाएगा. साथ ही केंद्र ने अदालत से अपील की थी कि राज्यों की परीक्षाओं को रद्द ना किया जाए.

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को फैसला सुनाया था कि इसी साल से मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए एक एनईईटी का आयोजन होगा. 

एक मई, 24 जुलाई को एनईईटी


पहले चरण की परीक्षा एक मई को जबकि दूसरे चरण की परीक्षा 24 जुलाई को कराने का आदेश दिया गया है. एक एनजीओ ने अदालत में याचिका दाखिल करते हुए कहा था कि अलग-अलग प्रवेश परीक्षाएं होने से लाखों छात्रों को मेडिकल की करीब 90 परीक्षाओं में हिस्सा लेना पड़ रहा है. 

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एनजीओ ने दलील दी थी कि कोर्ट की इजाजत के बावजूद सरकार ने एक साथ प्रवेश परीक्षा नहीं कराई. एक मई को सीबीएसई की एआईपीएमटी परीक्षा है, वहीं महाराष्ट्र में सीईटी पांच मई को है.

कर्नाटक में मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए आठ मई की तारीख प्रस्तावित थी. इस तरह मई में एम्स समेत पांच अलग-अलग प्रवेश परीक्षाएं प्रस्तावित हैं.

'राज्यों की प्रवेश परीक्षा ना रद्द हो'


इसके तहत एक मई को प्रस्तावित ऑल इंडिया प्री मेडिकल टेस्ट (एआईपीएमटी) की मेडिकल परीक्षा ही एनईईटी के पहले चरण की परीक्षा होगी

मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया और सीबीएसई ही प्रवेश परीक्षा का पूरा आयोजन करेंगे, जो अभी तक एआईपीएमटी की परीक्षा आयोजित कराते थे.
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महाराष्ट्र सरकार करेगी अपील


केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से गुरुवार को दिए अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है. इससे पहले महाराष्ट्र सरकार ने अदालत के फैसले के खिलाफ याचिका दाखिल करने का फैसला किया है.

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मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस का कहना है कि आखिरी वक्त में लिए गए फैसले की वजह से छात्रों को काफी मुश्किल का सामना करना पड़ेगा. ऐसे में राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करेगी.
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वहीं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर खुशी जताते हुए इसे एक मील का पत्थर साबित होने वाला फैसला करार दिया है.


First published: 29 April 2016, 21:04 IST
 
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