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अरुणाचल में चीन की वजह से लगा राष्ट्रपति शासन, शत्रुघ्‍न सिन्हा ने कहा 'गलत हुआ'

कैच ब्यूरो | Updated on: 30 January 2016, 13:47 IST

शनिवार को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अरुणाचल प्रदेश में राष्‍ट्रपति शासन लगाए जाने को लेकर अपने तर्क रखे. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार को नोटिस जारी करके 27 जनवरी तक जवाब देने के लिए कहा था.

सुप्रीम कोर्ट में अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने सरकार की तरफ से पेश किए हलफनामें में कहा है, 'राज्‍य में गंभीर राजनीतिक अस्थिरता’ और 'युद्ध जैसे हालात' बन गये थे. अरुणाचल में चीन की ओर से लगातार खतरा बना हुआ है.

अंग्रेजी समाचारपत्र 'इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट में दिये हलफनामें में राज्यपाल जेपी राजखोवा की 6 रिपोर्टों का हवाला दिया है, जो उन्होंने राष्ट्रपति को भेजी थीं.

इन रिपोर्ट्स में राज्यपाल ने राष्ट्रपति को उन कारणों को विस्तार से बताया गया है, जिस पर विचार करते हुए राष्ट्रपति ने इसे अपनी हरी झंडी दी. इस मामले में गृह मंत्रालय की ओर से पेश हलफनामें के मुताबिक, अरुणचल प्रदेश के बड़े हिस्‍से पर चीन अपना हक जताता आया है. इस क्षेत्र को अस्थिर करने के लिए वह लंबे समय से घुसपैठ की कोशिश करता रहा है. इसलिए अरुणाचल प्रदेश में राष्‍ट्रपति शासन लगाया गया है.

इसके अलावा हलफनामें में यह भी कहा गया है कि राज्‍य में कानून-व्‍यवस्‍था लगभग नहीं के बराबर है. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई सोमवार एक फरवरी को होनी है.

भाजपा और केंद्र सरकार के गृह राज्य मंत्री किरण रिजीजू ने दो दिन पहले ही अरुणाचल संकट का ठिकरा कांग्रेस के ऊपर फोड़ा था की भाजपा से नाराज चल रहे सांसद शत्रुघ्‍न सिन्हा ने पार्टी लाईन के खिलाफ जाते हुए इस मामले पर ट्वीट किया है कि 'मेरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में गहरी आस्था है जो एक प्रगतशील व्यक्ति हैं लेकिन मुझे उस व्यक्ति पर आश्‍चर्य है, जिसने प्रधानमंत्री को अरुणाचल प्रदेश में राष्‍ट्रपति शासन लगाने की सलाह दी है'.

एक दूसरे ट्वीट में सिन्हा ने कहा कि 'प्रधानमंत्री को ऐसा करने की जल्दी तब थी जबकि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित था वह भी 5 जजों के समक्ष. आश्चर्य ये है कि आखिर इस मामले में इतनी जल्दी किस बात की थी. यदि इस मामले पर फैसला हमारे पक्ष में नहीं आया तो भगवान जाने प्रधानमंत्री क्या सफाई देंगे'. 

ज्ञात हो कि अरुणाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार के कुल 42 में से 21 विधायकों ने सीएम नबाम टुकी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था. 17 दिसंबर को सीएम नबाम टुकी के विरोध में कुछ विधायकों ने बीजेपी के साथ अविश्वास पेश किया था, जिसमें सरकार की हार हुई.

इसके बाद अरुणाचल में चल रहे संवैधानिक संकट पर बीते रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में हुई कैबिनेट मीटिंग में राष्ट्रपति शासन लगाने का फैसला किया गया. इसके बाद इस प्रस्ताव को राष्‍ट्रपति के पास भेजा गया, जिस पर राष्ट्रपति ने अपनी मुहर लगा दी.

First published: 30 January 2016, 13:47 IST
 
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