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Chaitra Navratri 2018: क्या इन नौ दिनों के जैसा सम्मान महिलाओं को हर दिन नहीं मिलना चाहिए

आकांक्षा अवस्थी | Updated on: 18 March 2018, 16:40 IST

यत्र नार्यस्तु पूज्यते रमन्ते तत्र देवता
हमारे पौराणिक ग्रन्थों में लिखा है जहां नारी का सम्मान होता है, वहां देवता निवास करते हैं. हमारे देश की संस्कृति भी यही रही है. अपाला, घोषा जैसी स्त्रियां हमारी संस्कृति का उदाहरण हैं. लेकिन आज पितृसत्तात्मक समाज में आयी कुरीतियों ने इसे झूठला दिया हैं.

एक ओर नवरात्रों में नारी के माँ दुर्गा स्वरूप की पूजा होती है वहीं दूसरी ओर महिलाओं के प्रति हिंसा के आंकड़े कम होते नहीं दिख रहे हैं. कहीं दहेज के लिए किसी की बलि चढ़ा दी जाती है तो कहीं किसी नाबालिग के साथ दुष्कर्म हुआ ऐसी अनगिनत खबरें जैसे रोजमर्रा की जिंदगी में शुमार हो गई हैं.

देश में नवरात्री का त्यौहार पूरे ज़ोर शोर से मनाया जा रहा है. जिसको जो मांगना हो मांग लो, नौ दिन का व्रत करके या पहला आखिरी, एक वक़्त अन्न ग्रहण करके या फलाहार या निर्जल.

प्याज़,लहसुन,मांस,मदिरा सब छोड़ दो देवी के सम्मान में, बस नौ दिन के लिए। सब नौ दिन का सम्मान है,सारा खेला नौ दिन का है..माता की सारी शक्ति नौ दिन प्रचंड पर है...फिर ..?

फिर तो वही राम-राज्य होगा,सुन्दर कांड होगा,सत्यनारायण की कथा होगी...

बस यही है देश में नवरात्री की पूजा. नारी महिला सम्मान, जबकि जमीने स्तर पर ये सब बहुत दूर है, जहां कल्पना की जा सके एक समाज की जहां नारी को सिर्फ 9 नहीं पुर 365 दिन देवी माना जाये. जहां मंदिर में पत्थर की मूर्ती पर नहीं राह चलती किसी लड़की के चुनरी की भी उतनी ही इज्जत की जाये.

टॉमसन-रायटर्स ट्रस्ट लॉ फाऊण्डेशन की शोध-रिपोर्ट ने महिलाओं के लिए सबसे असुरिक्षत माने जाने वाले देशों में दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत को चौथा स्थान देकर तहलका मचा दिया था.

देश के हर राज्य में महिलाओं की सुरक्षा का स्तर अलग

-अलग है. इसके साथ ही आरोपियों पर दोष साबित न होने के चलते लैंगिंक हिंसा के मामलों में तेजी आई है और ये सारे ही मामले दक्षिण एशियाई देशों में महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा के इतिहास को दर्शाते हैं."
बलात्कार, यौन उत्पीड़न और महिलाओं के साथ होने वाले अपराध यही संकेत देते हैं कि भारत सुरक्षित नहीं है. राष्ट्रीय क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार 2015 के दौरान देश में बलात्कार के 34,651 दर्ज किए गए. लेकिन महिला सुरक्षा को लेकर काम कर रहे लोग इसे सही नहीं मानते. उनके मुताबिक बलात्कार के असल मामले इस आंकड़े से भी अधिक होंगे, लेकिन सुरक्षा की कमी और सामाजिक ताने-बाने के चलते कई बार महिलाएं सामने नहीं आती.

गौरतलब है कि भारतीय महिलाओं को अपराधों के विरुद्ध सुरक्षा प्रदान करने तथा उनकी आर्थिक तथा सामाजिक दशाओं में सुधार करने हेतु ढ़ेर सारे कानून बनाए गए हैं. इनमें अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम 1956, दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961, कुटुम्ब न्यायालय अधिनियम 1984, महिलाओं का अशिष्ट-रुपण प्रतिषेध अधिनियिम 1986, गर्भाधारण पूर्व लिंग-चयन प्रतिषेध अधिनियम 1994, सती निषेध अधिनियम 1987, राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम 1990, घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम 2005, बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006, कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध, प्रतितोष) अधिनियम 2013 प्रमुख हैं.

इस समय देश में तकरीबन 95000 से अधिक बलात्कार के मुकदमें अदालतों में लंबित हैं. इनका निपटरा कब होगा भगवान जाने. भारत में हर एक घंटे में 22 बलात्कार के मामले दर्ज होते हैं. ये वे आंकड़े हैं जो पुलिस द्वारा दर्ज किए जाते हैं. अधिकांश मामले में तो पुलिस रिपोर्ट दर्ज करती ही नहीं है.

बस यही है देश में नवरात्री की पूजा. नारी महिला सम्मान, जबकि जमीने स्तर पर ये सब बहुत दूर है, जहां कल्पना की जा सके एक समाज की जहां नारी को सिर्फ 9 नहीं पुर 365 दिन देवी माना जाये. जहां मंदिर में पत्थर की मूर्ती पर नहीं राह चलती किसी लड़की के चुनरी की भी उतनी ही इज्जत की जाये.

टॉमसन-रायटर्स ट्रस्ट लॉ फाऊण्डेशन की शोध-रिपोर्ट ने महिलाओं के लिए सबसे असुरिक्षत माने जाने वाले देशों में दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत को चौथा स्थान देकर तहलका मचा दिया था. देश के हर राज्य में महिलाओं की सुरक्षा का स्तर अलग-अलग है.

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बलात्कार, यौन उत्पीड़न और महिलाओं के साथ होने वाले अपराध यही संकेत देते हैं कि भारत सुरक्षित नहीं है. राष्ट्रीय क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार 2015 के दौरान देश में बलात्कार के 34,651 दर्ज किए गए. लेकिन महिला सुरक्षा को लेकर काम कर रहे लोग इसे सही नहीं मानते.

उनके मुताबिक बलात्कार के असल मामले इस आंकड़े से भी अधिक होंगे, लेकिन सुरक्षा की कमी और सामाजिक ताने-बाने के चलते कई बार महिलाएं सामने नहीं आती.

गौरतलब है कि भारतीय महिलाओं को अपराधों के विरुद्ध सुरक्षा प्रदान करने तथा उनकी आर्थिक तथा सामाजिक दशाओं में सुधार करने हेतु ढ़ेर सारे कानून बनाए गए हैं. इनमें अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम 1956, दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961, कुटुम्ब न्यायालय अधिनियम 1984, महिलाओं का अशिष्ट-रुपण प्रतिषेध अधिनियिम 1986, गर्भाधारण पूर्व लिंग-चयन प्रतिषेध अधिनियम 1994, सती निषेध अधिनियम 1987, राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम 1990, घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम 2005, बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006, कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध, प्रतितोष) अधिनियम 2013 प्रमुख हैं.

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इस समय देश में तकरीबन 95000 से अधिक बलात्कार के मुकदमें अदालतों में लंबित हैं. इनका निपटरा कब होगा भगवान जाने. भारत में हर एक घंटे में 22 बलात्कार के मामले दर्ज होते हैं. ये वे आंकड़े हैं जो पुलिस द्वारा दर्ज किए जाते हैं. अधिकांश मामले में तो पुलिस रिपोर्ट दर्ज करती ही नहीं है.

First published: 18 March 2018, 15:35 IST
 
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