Home » इंडिया » Chandra Shekhar Azad Death Anniversary: Chandrasekhar Azad remained free till the last breath, shaheed chandrasekhar azad
 

पुण्यतिथि विशेष:आखिरी सांस तक आजाद ही रहे चंद्रशेखर आजाद

आदित्य साहू | Updated on: 27 February 2018, 11:15 IST

दुश्मन की गोलियों का हम सामना करेंगे,
आजाद ही रहे हैं, आजाद ही रहेंगे!

जब उनके कुछ क्रांतिकारी साथियों ने उनसे ठिठोली करते हुए पूछा कि अगर आप अंग्रेज पुलिस के हत्थे चढ़ गए तो क्या होगा? इस पर आजाद ने उपरोक्त लाइनों के जरिए ऐसा जवाब दिया कि उनके सारे दोस्त उनका मुंह ताकते रह गए. इसके बाद बैठक का माहौल गंभीर हो गया. थोड़ी देर सन्नाटा रहा. उन्होेंने अपनी धोती से रिवाल्वर निकालकर लहराते हुए कहा- "जब तक तुम्हारे पंडितजी के पास ये पिस्तौल है तब तक किसी मां ने अपने लाडले को इतना खालिस दूध नहीं पिलाया जो आजाद को जिंदा पकड़ सके."

 

इसके बाद सब ठहाका मारकर हंस पड़े. लेकिन इस हंसी के बीच उन्होंने ऐसी गहरी बात कह दी थी जो आजीवन उनके साथ रही. उनके आखिरी समय में भी उन्होंने अपने इस कथन को चरितार्थ किया.

27 फरवरी 1931 के उस दिन जब वह दोपहर में इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में अपने एक साथी के साथ बैठे कुछ सोच रहे थे तो अचानक अंग्रेज पुलिस की एक गोली आई और आजाद की जांघ में जा धंसी. आजाद जबतक कुछ समझ पाते पुलिस वालों ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया था. उन्होंने अपनी पिस्तौल निकाली और अपने क्रांतिकारी साथी को जाने के लिए कहा. आजाद सैकड़ों पुलिस वालों के सामने 20 मिनट तक लोहा लेते रहे और कई पुलिस अधिकारियों को घायल कर दिया. एक और गोली आई और आजाद के कंधे में जा धंसी.

अब आजाद की पिस्तौल में सिर्फ एक गोली बची थी. उन्होंने अपने पास की मिट्टी उठाई और माथे से लगा लिया. पुलिस का हाथ उनपर पड़े उससे पहले ही आजाद ने अपने पिस्तौल की आखिरी गोली अपनी कनपटी पर दाग दी. जिस जामुन के पेड़ की ओट में आजाद की मृत्यु हुई थी उसे रातों-रात कटवा दिया गया ताकि किसी को खबर ना लगे. लेकिन लोगों को पता चल गया. देशभर में क्रांति की लहर चल पड़ी.

First published: 27 February 2018, 10:48 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी